अंबिकापुर। पछुआ के उत्तरी राज्यों, उत्तराखंड, हिमाचल आदि में प्रभावी रहने के कारण हुई व्यापक वर्षा, बर्फबारी और ओलावृष्टि के कारण ठंडी हुई हवाएं आज सुबह से ही नगरीय वातावरण में प्रभावी हैं। हालांकि मंगलवार की रात से ही ठंडी हवाएं चल रही थी, जिस कारण सुबह का मौसम ठंडक लिए रहा। इस समय वातावरण का तापमान हमारे शरीर के तापमान तक पहुंचने की स्थिति में है।
पिछले दिनों अंबिकापुर का अधिकतम तापमान लगातार 30 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, वहीं मानव शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। इस परिस्थिति में जब शरीर और वातावरण में तापान्तर शून्य या न्यून हो जाए तब ऊष्मा का संवहन या स्थानांतरण रुक जाता है। कहें तो न तो ऊष्मा वातावरण से शरीर में प्रवेश करती है और न शरीर से वातावरण में स्थानांतरित होती है। इस परिस्थिति को थर्मोन्यूट्रल स्टेट कहा जाता है। जब थर्मोन्यूट्रल स्टेट की स्थिति में शरीर और वातावरण होता है तब ऊष्मा संतुलन हेतु शरीर को कोई कार्य नहीं करना पड़ता है। जब ऊष्मा का संवहन नहीं होता है तब शरीर की संचित अतिरिक्त ऊष्मा वातावरण में विस्थापित नहीं हो पाती, लिहाजा एक शारीरिक उदासीनता या शिथिलता का आभास होने लगता है। न पसीना निकलता है और न ही अंदर शोषित होता है, तब हमें एक विचित्र सी बेचैनी लगने लगती है। कहा जाए तो इस समय हम इसी थर्मोन्यूट्रल स्टेट की स्थिति में हैं।
मौसम वैज्ञानिक एएम भट्ट के अनुसार मार्च का महीना प्रारम्भ हो चुका है, सूर्य की स्थिति दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा से भूमध्य रेखा की ओर है और अब यह भूमध्य रेखा के नजदीक पहुंच चुका है। मार्च के 21-22 तारीख को सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर पूरी तरह से लम्बवत हो जाएंगी और पूरी पृथ्वी पर दिन और रात की अवधि 12-12 घण्टों की हो जाएगी। 21-22 मार्च के बाद सूर्य हमारे गोलार्ध अर्थात उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करेगा और क्रमश: कर्क रेखा की ओर अग्रसर हो जाएगा। दिसम्बर में जो दिन की अवधि लगभग 10 घण्टों की थी वह अब बढ़ कर साढ़े 11 घण्टे से अधिक हो चुकी है। उत्तरी गोलार्ध की सूर्य से दूरी घटने के साथ दिन की अवधि के बढ़ने से अधिक सौर ऊष्मा का आपतन हो रहा है, जिससे निरन्तर वायुमंडलीय तापमान में वृद्धि हो रही है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि यह समय पश्चिमी विक्षोभ की प्रबलता के लिए भी बेहद अनुकूल होता है। पश्चिम दिशा से भारत में प्रवेश करने वाली व्यापारी हवाएं ही पश्चिमी विक्षोभ के रूप में आती हैं। ये हवाएं मेडिटेरियन, कैस्पियन, अटलांटिक और भूमध्य सागर से अपने साथ भारी मात्रा में नमी ले कर चलती हुई इराक, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान में गरजती-बरसती हुई भारत के हिमालयन क्षेत्रों से टकरा जाती हैं। यहां अरब सागर की नमी युक्त तरंगें द्रोणिका और चक्रवाती परिसंचरणों के रूप में विक्षोभ की कमजोर हो चुकी ऊर्जा को पुन: सुदृढ़ करती हैं और हिमालय की बर्फीली शिलाओं का संपर्क विक्षोभ की तरंगों को शीतल कर देती हैं, जो पुन: आगे बढ़ती हुई भारत के विभिन्न क्षेत्रों तक अनुकूल गमन पथ का अनुशरण करती हुई कई बार पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों और ओड़िसा तक पहुंच जाती हैं। चूंकि पछुआ की हवाएं ठंडी होती हैं, जिससे ओलावृष्टि और बर्फबारी की भी परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हैं। हालांकि प्रत्यक्ष रूप से तो पछुआ कई बार फसलों को नुकसान पहुंचाती और स्वास्थ्य के प्रतिकूल ही जान पड़ती हैं परंतु परोक्ष में वायुमंडलीय ताप संतुलन की दृष्टि से तापीय अनुकूलता को बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, अन्यथा वायुमंडलीय दैनिक तापवृद्धि पर कोई लगाम नहीं होगा और वातावरण का तापमान जीवन के प्रतिकूल परिस्थितियों तक बढ़ जाएगा। पछुआ के प्रभाव से ही तापमान की एकतरफा वृद्धि पर अंकुश लग पाता है।
मुख्य ऋतुओं के बनने-बिगड़ने से उप ऋतुएं होती हैं प्रभावी
फरवरी-मार्च की वार्षिक समयावधि में जब सूर्य क्रमश: 23.5 डिग्री दक्षिण की मकर रेखा से 0 डिग्री की भूमध्य रेखा की ओर प्रभावी होने लगता है, तब एक सामान्य अनुभव होता है कि दिन की अवधि बड़ी और रातें छोटी होने लगी हैं। चूंकि सूर्य पृथ्वी का प्रत्यक्ष ऊष्मा स्रोत है और कोई भी ऊष्मा स्रोत अपने नजदीक की वस्तुओं को दूरस्थ वस्तु की तुलना में हमेशा अधिक गर्म करता है। सूर्य 21-22 सितंबर से 21-22 मार्च तक पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में धरातल के नजदीक रहता है, इसलिए इस अवधि में वहां ग्रीष्म और उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु होता है। ऊष्मा की दृष्टि से ऋतुएं दो होती हैं शीत और ग्रीष्म। दूसरी ओर 21-22 मार्च से 21-22 दिसम्बर तक सूर्य की निकटता और विचरण उत्तरी गोलार्ध में होने के कारण यहां ग्रीष्म ऋतु होता है। इन दो मुख्य ऋतुओं के बीच मौसम के विभिन्न कारक तत्वों के बनने-बिगड़ने और प्रभावी होते रहने के कारण अन्य उप ऋतुएं वर्षा, हेमंत, शिशिर, बसंत आदि प्रभावी होते हैं।
एक नजर इधर भी
मौसम विभाग ने 03 मार्च को अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री सेल्सियस, वर्षा 0.0 मिमी, 04 मार्च को अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस, वर्षा 0.0 मिमी, 05 मार्च को अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस, वर्षा 0.0 मिमी दर्ज किया गया।

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