जब चक्कर आया तो स्कूल से निकाल दी गई नेत्रहीन सरस्वती, कलेक्टर से कहा मुझे गायकी सीखनी है और शिक्षक बनना चाहती हु।

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तुझसे नाराज़ नहीं जिंदगी हैरान हूँ मै……….
और वास्तव में यह घटना न केवल सरस्वती को बल्कि समाज के सभी वर्ग के लोगों को हैरान कर देने वाली है

कोतबा(मयंक शर्मा):- देश में जिस दिन नेत्रहीन आई ए एस प्रांजल पाटिल तिरुअनन्तपुरम के कलेक्ट्रेट में एडिशनल कलेक्टर का पदभार ग्रहण कर रही होती है ,वहीँ दूसरी ओर जशपुर के कलेक्टर श्री नीलेश क्षीरसागर के समक्ष यह दरख्वास्त लेकर जशपुर की एक नेत्रहीन बालिका कु0 सरस्वती खड़ी होती है। रायपुर के नेत्रहीन विद्यालय के संचालक के द्वारा उसे कक्षा 7वीं के क्लास से मात्र इसलिए भगा दिया गया क्योंकि वह स्कुल के शौचालय में गिर गई थी जिसके कारण उसे चक्कर आते थे।


सबसे आश्चर्यकारक बात यह है की प्रदेश की राजधानी से एक नेत्रहीन बालिका को जशपुर के सुदूर ग्राम झोलङ्गा भेज दिया जाता है की अपने गांव जाओ और अपना ईलाज करा लेना ठीक हो जाओगी तभी आना ।
न तो यह सरकार की गलती है न ही व्यवस्था का दोष है दोष है तो सिर्फ समाज के असंवेदनशील हो जाने का
फिर भी सरस्वती जशपुर कलेक्ट्रेट के गार्डन में गुनगुना रही होती है।तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूॅं मैं, तेरे मासूम सवालों से परेशान हूॅं मैं— यह गीत सातवीं कक्षा की नेत्रहीन छात्रा सरस्वती का तब सबसे पसंदीदा गीत बन गया, जब उसे रायपुर के एएनएबी दृष्टिबाधित बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय से निकाल दिया गया। उसका जुर्म बस इतना था कि उसे दो, तीन बार चक्कर आया और वह कुछ समय के लिए बेहोश हो गई। प्रबंधन ने यह कहकर भेज दिया कि जब वह ठीक हो जाए तब स्कूल आए। सरस्वती बाई के पिता चंद्रनाथ राम जशपुर जिले के ग्राम झोलंगा में रहते हैं और मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। कक्षा पांचवी तक सरस्वती को जशपुर में पिता ने अध्ययन कराया और पांचवी के बाद जशपुर में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए व्यवस्था नहीं होने पर उसे रायपुर में जिला प्रशासन की मदद से भेजा गया। वर्तमान में सरस्वती का गला खराब है और इससे पहले उसकी गायकी से प्रभावित होकर समाजिक कार्यकर्ता रामप्रकाश पांडे ने सरस्वती की कई बार मदद की और बच्ची को पढाने के लिए परिजनों को प्रेरित किया गया। गत तीन माह से उसकी तबियत खराब होने लगी और रायपुर के दृष्टिबाधित स्कूल में ही उसे दो, तीन बार चक्कर आए और कुछ पलों के लिए वह बेेहोश हो गई। जिसके बाद परिजनेां को सूचना देते हुए स्कूल से गांव भेज दिया गया। गरीब परिवार ने अपने स्तर पर बच्ची को चिकित्सा दिलाने प्रयास किया, लेकिन बच्ची की कोई बिमारी समझ नहीं आई। मिडिया की पडताल पर यह बात समझ में आई कि बच्ची को न्यूरो से जुडी बिमारी संबंधित हो सकती है, जिसके लिए उसे सिटी स्केन जैसे जांच व विशेषज्ञ की आवश्यकता पडेगी।

कलेक्टर से मदद लेने पहुंची सरस्वती

अपनी समस्या लेकर दृष्बिाधित सरस्वती के परिजन कलेक्टर जशपुर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर के पास पहुंचे। संवदेनशील कलेक्टर निलेश कुमार ने बच्ची से मिलते ही उसके प्रतिभा की सराहना की और हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया। कलेक्टर निलेश कुमार ने कहा कि बच्ची के इलाज सहित उसके पढाई के लिए वे हर संभव मदद करेंगे। जब कलेक्टर ने दृष्टिबाधित सरस्वती से पूछा कि वह क्या बनना चाहती है तो सरस्वती ने कहा कि वह शिक्षिका बनना चाहती है और संगीत सीखते हुए कुछ अलग करना चाहती है। बच्ची के आत्मविश्वास से कलेक्टर काफी प्रभावित हुए और स्नेह बांटते हुए परिजनों को हिम्मत रखने व हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया। वर्तमान में सरस्वती ग्राम झोलंगा में रह रही है और उसे इंतजार है कि वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाए और फिर से अपने स्कूल चले जाए।

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