अंबिकापुर। महानगरों के बाद डिजीटल एरेस्ट का मामला सरगुजांचल में भी आने लगा है। हाल में एक सेवानिवृत वन अधिकारी को उनके पुत्र की गिरफ्तारी का भय दिखाकर 50 हजार रुपये ऐंठने का मामला सामने आया था। पुन: अंबिकापुर के व्यवसायी शिवेश सिंह के पास डिजीटल एरेस्ट करने के मामले में फोन आया। फोन करने वाले ने उन्हें भयभीत करने और आधार कार्ड, पेन कार्ड भेजने के लिए उत्प्रेरित करने हरसंभव कोशिश की, लेकिन 11 मिनट तक चली बातचीत के बीच वे टालमटोल करते रह गए। वीडियो कॉलिंग करके कथित पुलिस अधिकारी ने उनके घर का कोना-कोना तक देखा, कि संबंधित व्यक्ति कहां है, कमरे में और कोई तो नहीं है। फोन करने वाले उन्हें भयभीत करते हुए कमरे से बिना अनुमति नहीं निकलने, अन्य किसी से बात नहीं करने जैसी हिदायत भी देते रहे। जागरूक नागरिक होने के कारण शिवेश इनकी हरकतों से वाकिफ होने के लिए उनकी हर बातों में हां में हां मिलाते रहे। आधार कार्ड और पेन कार्ड की जानकारी देने की बारी आई तो उन्होंने सीए के पास डाक्यूमेंट होने की बात कहकर टालमटोल किया। कथित पुलिस अधिकारी ने सीए को फोन लगाकर कागजात मंगवाने के लिए कहा, इस पर उन्होंने एक ही मोबाइल नंबर होने की बात कही, बाद में अवकाश का दिन होने के कारण डाक्यूमेंट नहीं मिलने की बात कहते हुए फुर्सत के पलों में ठग का समय जाया करते रह गए। शिवेश का कहना है कि डिजिटल एरेस्ट के मामले में जिस नम्बर से कॉल आया था, वह भारत से बाहर, पाकिस्तान का था। इसका वीडियो उन्होंने सरगुजा रेंज के आईजी, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों को सौंपा है, ताकि लोग ऐसे मामलों के प्रति जागरूक रहें। शिवेश ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से भी लोगों को सजग किया है कि ऐसे कॉल को गंभीरता से न लें। अगर परिवार के किसी सदस्य को एरेस्ट करने की बात कहकर कोई भयभीत करता है तो पहले इसकी पुष्टि करने के लिए संबंधित स्वजन से संपर्क करें।
बयान
वर्तमान में सइबर अपराध नए स्वरूप में सामने आ रहा है। नए तरीके से ठगी की कोशिश की जा रही है। इसका उभरता प्रकार डिजीटल एरेस्ट के रूप में सामने आने लगा है। वाइस कॉल करके फर्जी पुलिस व क्राइम अधिकारी के द्वारा फर्जी गलती का एहसास कराया जाता है और एक कमरे में नजरबंद करने की कोशिश की जाती है। झांसे में आ जाने पर ठगी की घटना को अंजाम दे डालते हैं। ऐसे ह्रासमेंट से बचने के लिए अनजान नम्बरों को जल्दी अटैंड नहीं करें। किसी भी घटनाक्रम को बताकर कोई भयभीत करता है तो पहले वास्तविकता जानें। पुलिस को सूचना दें, ताकि विधिसम्मत कार्रवाई की जा सके।
अमोलक सिंह ढिल्लो
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा

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