पुलिस अधीक्षक ने किया आगाह-अनजान फाइलों को डाउनलोड करने से बचें


अंबिकापुर। निजी सुरक्षा में सेंध लगाने साइबर ठग वाट्सएप में एपीके फाइल भेजने में लगे हैं, इससे बचाव के लिए पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने आम नागरिकों को सतर्क किया है। उन्होंने बताया है कि साइबर अपराधी एपीके फाइल के जरिए मोबाइल हैक करके एक्सेस प्राप्त करते हैं और कई साइबर घटनाओं अंजाम देते हैं। ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए अपील जारी करते हुए पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी प्रक्रिया के जरिए साइबर ठग आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। इससे बचने के लिए अनजान फाइलों को डाउनलोड करने से बचना चाहिए। किसी संदिग्ध गतिविधि की आशंका होने पर तत्काल नजदीकी थाना या चैकी में शिकायत दर्ज कराएं। ऑनलाइन ठगी के मामलों में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सम्पर्क करने कहा गया है।
साइबर ठगी के नए-नए तरीको से जागरूक करने और ठगी की घटनाओं से बचाव के लिए पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने अपील जारी किया है। उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड जैसी घटनाओं के बारे में अलर्ट करने के बावजूद लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं। साइबर ठग अब वाट्सएप के जरिए अनजान एपीके फाइल भेजकर निजी सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं और एपीके फाइल डाउनलोड करने वाले उपयोगकर्ता का मोबाइल हैक करने के बाद एक्सेस प्राप्त करके साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी प्रक्रियाओं के जरिए साइबर ठग नागरिकों को अपने जाल के फंसाकर ठगी की वरदात को अंजाम दे रहे हैं। साइबर ठगी के नए तरीकों से बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपायों को पुलिस अधीक्षक ने जनसामान्य से साझा किया गया हैं।
एपीके फाइल की लिंक के जरिए साइबर फ्रॉड
पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने बताया है कि हालिया दिनों में साइबर ठगों द्वारा व्हाट्सएप पर बैंक या आधार अपडेट, निमंत्रण अथवा किसी योजना के नाम पर एपीके फाइल का लिंक भेजा जा रहा है। एपीके फाइल को डाउनलोड करने की लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन हैक हो जाता है, जिससे ठग फोन के कैमरा, माइक्रोफोन, जीपीएस, मैसेज और ओटीपी तक पहुंच जाते हैं। साइबर ठगों द्वारा ऐसे फाइल, ऐप वाट्सएप किसी अज्ञात नंबर अथवा ग्रुप में भेजे जा रहे हैं। ऐसे फाइल को डाउनलोड करने पर वे संबंधित मोबाइल को हैक करके पूरा एक्सेस पा जाते हैं। इसके बाद मोबाइलधारक की निजी जानकारियों में बैंक डिटेल्स, ओटीपी इन्हें आसानी से मिल जाता है। उन्होंने बताया है कि सबसे पहले ठग एपीके फाइल लिंक के जरिए व्हाट्सएप को हैक करते हैं। व्हाट्सएप हैक हो जाने पर, मोबाइलधारक से जुड़े सभी ग्रुप्स में यह फाइल भेज दी जाती है, जिससे एक चेन बनती है और ज्यादा से ज्यादा लोगों के ने आसानी से निशाना बना लेते हंै।
मिले ऐसा लिंक तो बरते सावधानी
पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि यदि व्हाट्सएप या किसी अनजान ग्रुप में बैंक या आधार अपडेट के नाम पर कोई एपीके फाइल आती है, तो उसे भूलकर भी डाउनलोड न करें। ऐसा करने पर साइबर ठग आपकी सारी निजी जानकारी चुरा सकते हैं। उन्होंने कहा है इससे बचने के लिए अपने फोन का ऑटोमैटिक डाउनलोड का ऑप्शन बंद कर दें। अज्ञात लिंक न खोलें, किसी अनजान लिंक को खोलने से बचें। अपने व्हाट्सएप को हमेशा टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर रखें। यदि गलती से डाउनलोड हो जाए, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
साइबर ठगी का नया तरीका डिजिटल अरेस्ट
पुलिस अधीक्षक ने बताया है कि साइबर ठगों द्वारा डिजिटल माध्यम से किसी व्यक्ति को किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहने अथवा पार्सल में गलत सामान होने सहित अन्य भ्रामक जानकारी देकर गिरफ्तार करने का झूठा दावा किया जाता है। डिजिटल अरेस्ट की फर्जी घटनाओं के जरिए ठगों का मकसद लोगों के मन में अचानक डर की स्थिति उत्पन्न करना होता है, इसके बाद पीड़ित व्यक्ति को यह यकीन दिलाया जाता है कि वह अपराधिक गतिविधियों में शामिल है और पीड़ित से भारी भरकम रकम की मांग की जाती है। साइबर ठगों द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को बहुत ही नियोजित तरीके से अपनाया जाता है, जिससे वारदात होने के बाद पीड़ित व्यक्ति कभी अपराध की रिपोर्ट ना कर सके।
डिजिटल अरेस्ट प्रक्रिया के दौरान की गतिविधि
साइबर ठगों द्वारा पीड़ित को वीडियो कॉल या व्हाट्सअप कॉल करके कुछ खास प्रक्रिया से गुजरने के लिए बाध्य किया जाता है। वीडियो कॉल के दौरान आसपास के जगह को पुलिस स्टेशन या किसी अन्य एजेंसी के जैसा मिलता-जुलता बनाकर लोगों के मन मे डर पैदा करते हैं। घटनाओं की पुष्टि के लिए कई तरह की जानकरियां भी मांगी जाती है, ऐसे फर्जी कॉल करने वाले खुद को पुलिस, नॉरकोटिक्स, साइबर सेल, इन्कमटैक्स या सीबीआई अधिकारियों की तरह पेश करते हैं। वे बकायदा किसी ऑफिस से यूनिफॉर्म में कॉल करते हैं, इसके बाद पीड़ित पर अनर्गल आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी जाती है और दावा किया जाता है कि पूछताछ होने के दौरान उसे वीडियो कॉल पर ही रहना होगा। वह किसी और से बातचीत नहीं कर सकता है, जब तक कि प्रक्रिया पूर्ण ना हो जाए। इसी दौरान मामले से बचाने के ऐवज में बड़ी रकम की मांग करते हुए ठगी कर ली जाती हैं।
फर्जी ठगी की घटनाओं से ऐसे बचें
0 अनजान व्यक्तियों के कॉल ना उठाएं, अज्ञात नंबर से आए व्हाट्सअप कॉल अथवा वीडियो कॉल को स्वीकार ना करें।
0 किसी भी परिस्थिति में डरें नहीं, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है।
0 पुलिस या अन्य एजेंसी किसी भी व्यक्ति, आरोपी से व्हाट्सप्प कॉल, वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर कार्रवाई नहीं करती।
0 ऐसी घटनाओं की सूचना तत्काल अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।

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