152 प्रतिशत के तहत पट्टा के लिए दिए गए एनओसी को लेकर उठा सवाल

अंबिकापुर। शहर के सरगुजा सदन में नगर निगम की हंगामेदार सामान्य सभा हुई। विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर भेदभाव करने का आरोप लगाया, साथ ही स्वच्छता सर्वेक्षण में फिसड्डी होने का कारण शहर के सड़कों की खस्ताहालत, डामरीकरण नहीं होने व नाली निर्माण में भेदभाव को बताया। साथ ही नजूल भूमि पर 152 प्रतिशत के तहत फर्जी पट्टा देने सहित अन्य मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश की गई, इधर सत्ता पक्ष भी पट्टा के मामले को लेकर गंभीर नजर आया और न सिर्फ जांच कराने की सहमति दी बल्कि 2017 के पहले के कब्जा प्रमाणीकरण हो, इसके लिए दोनों दलों के पार्षदों के साथ कमेटी बनाकर प्रशासन की टीम के साथ जांच के लिए सहमति बनी। इन सबके बीच सामान्य सभा की बैठक में लिए गए निर्णयों के प्रति सत्ता पक्ष व निगम प्रशासन के गंभीर नहीं होने का भी आरोप लगा।

नगर निगम की सामान्य सभा गुरुवार को दोपहर 12 बजे सभापति अजय अग्रवाल की उपस्थिति में शुरू की गई। भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने नजूल भूमि पर 152 प्रतिशत के तहत पट्टा देने के मामले में फर्जीवाड़ा का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा 152 प्रतिशत पट्टा वितरण के दौरान किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया है। पट्टा के लिए 1578 लोगों को एनओसी दे दिया गया है। आने वाले समय में नजूल भूमि किसी भी शासकीय निर्माण के लिए नहीं मिल सकेगी। शासन के नियम के तहत वर्ष 2017 से पूर्व नजूल भूमि पर काबिज लोगों को पट्टा दिया जाना था। इसके लिए न तो ऐसे लोगों के संपत्ति व सामेकित कर की जांच की गई और न ही बिजली बिल के भुगतान की स्थिति देखी गई, केवल एनओसी दे दी गई। भू-माफिया पूरी तरह से सक्रिय रहे। सत्ता पक्ष की ओर से पीडब्ल्यूडी प्रभारी शफी अहमद ने इसे स्वीकार करते हुए जांच कराने के बाद पट्टा निरस्त करने व राशि राजसात करने व खुली भूमि का पट्टा जारी करने के लिए गलत जानकारी देने वालों को बर्खास्त करने की बात कही। इस पर सभापति ने कहा कई ऐसे लोगों को भी पट्टा जारी किया गया है, जिन्होंने एनओसी भी प्राप्त नहीं किया है। सत्ता पक्ष के पार्षद प्रमोद चौधरी ने दुर्घटना जोन व सड़क हादसों पर अंकुश का मुद्दा उठाया। इस पर पीडब्ल्यूडी प्रभारी शफी अहमद ने कहा कि बायपास का प्रवधान हो गया है। लोगों को मुआवजा का भी वितरण शासन द्वारा किया जा चुका है। सत्ता व विपक्ष के पार्षदों ने एकराय होकर कहा कि शहर में आए दिन मार्ग को वन-वे किया जाता है। इसके लिए निगम से अनुमति लेना तो दूर बात करना तक पुलिस व प्रशासन के अधिकारी उचित नहीं समझते हैं। विपक्ष के पार्षदों ने सत्ता पक्ष पर विकास कार्य में भेदभाव का आरोप लगाया। इनका कहना था कि नाली, सड़क का निर्माण कार्य नहीं होने व शहर के शौचालयों में गंदगी पसरे रहने के कारण ही नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में निचले पायदान पर आ गया। स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम शहर के हर गली मोहल्ले का निरीक्षण करती है। सत्ता पक्ष की ओर से पीडब्ल्यूडी प्रभारी शफी अहमद ने नाली निर्माण व डामरीकरण कार्य में भेदभाव के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि आज से दस वर्ष पूर्व नगर निगम की स्थिति काफी खराब थी। नाली जाम रहता था, पानी की समस्या रहती थी। हमारी निगम सरकार ने निगम को स्वच्छता के क्षेत्र में नंबर वन पर लाने का काम किया है। निगम आयुक्त के लगातार तबादला व जिम्मेदारी के साथ काम नहीं करने के कारण ही सर्वेक्षण सूची मेें नीचे पहुंच गए हैं। इसमें सभी को मिलकर काम करना होगा। विपक्षी पार्षदों ने साफ-सफाई का काम ढंग से नहीं होने का आरोप लगाया। इस पर महापौर डॉ. अजय तिर्की ने कहा कि सफाई कार्य की  निगरानी हेतु सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, फिर भी सफाई कार्य में सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस वार्ड में गंदगी दिखती है उस वार्ड व क्षेत्र के सुपरवाइजर का वेतन काटा जाए। इस पर सत्ता पक्ष-विपक्ष दोनों की सहमति बनी। पार्षदों को 11 माह से मानदेय नहीं मिलने की बात भी सामने आई।

हम हंसी-ठिठोली के मूड में नहीं
विपक्ष के पार्षद हरमिन्दर सिंह टिन्नी ने कहा कि सामान्य सभा में केवल हंसी-ठिठोली होती है, निर्णयों पर अमल नहीं होता। पूर्व में कई निर्णय हुए थे और कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई। इस पर महापौर डॉ. अजय तिर्की व पीडब्ल्यूडी प्रभारी शफी अहमद ने कहा कि ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।

सौंदर्यीकरण के नाम पर सुखा दिया तालाब
विपक्ष के पार्षद मधुसूदन शुक्ला ने सदन में शहर के तालाबों की खराब स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सभी तालाबों को सौंदर्यीकरण के नाम पर सुखा दिया गया है। शासन के पैसों को पानी में बहाया गया है। उन्होंने सत्ता पक्ष को घेरते हुए कहा कि 9 साल में एक भी निगम की उपलब्धि नहीं है। एक भी निर्माण कार्य नहीं कराए गए। सारी की सारी योजनाएं केन्द्र सरकार की हंै।

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