हसदेव अरण्य क्षेत्र की सभी 23 प्रस्तावित कोयला खदानों को निरस्त करने उठी आवाज

कांग्रेस की टीम को ग्रामीणों ने दिखाया, कैसे हो रहा हसदेव अरण्य का विनाश

अंबिकापुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदानों के लिए वनों की कटाई और ग्रामीण आदिवासियों के साथ अत्याचार के मामलों की जांच के लिए गठित कांग्रेस की टीम ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह की अगुवाई में जांच टीम ने साल्ही, हरिहरपुर, घाटबर्रा और फतेहपुर के लोगों से बात की। जांच टीम को ग्रामीणों ने बताया प्रभावित गांव के लोग अपनी जमीन नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे पिछले 675 दिन से जंगल और जमीन बचाने के लिए हरिहरपुर और घाटबर्रा गांव में धरना दे रहे हैं। ग्राम हरिहरपुर में धरने पर बैठे ग्रामीणों के प्रतिनिधियों रामलाल करियाम साल्ही, इंद्र कुंवर मदनपुर, उमेश्वर साल्ही, सम्पतिया हरिहरपुर ने ग्रामीणों की ओर से एक स्वर से कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र की सभी 23 प्रस्तावित कोयला खदानों को निरस्त किया जाए। परसा खदान के लिए ग्रामीणों की सहमति नहीं है। 27 जनवरी 2018 को वन अधिकार पट्टा के लिए ग्राम सभा की बैठक हुई थी। ग्राम सभा के प्रस्ताव में एक से 21 तक खदान का कोई जिक्र नहीं हुआ। ग्राम सभा की समाप्ति के बाद उदयपुर के रेस्ट हाउस में तत्कालीन कलेक्टर व पुलिस के अधिकारियों ने सरपंच, सचिव पर दबाव बनाकर अलग से क्रमांक 22 में खदान के लिए सहमति का एजेंडा लिखकर हस्ताक्षर करा लिया। फर्जी ग्राम सभा के प्रस्ताव के संबंध में उदयपुर थाना से लेकर राज्यपाल तक शिकायत की जा चुकी है, अभी तक जांच नहीं हुई है। घाटबर्रा में सामुदायिक वन अधिकार का पट्टा मिला था, उसे निरस्त कर दिया गया। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। यहां वनों की कटाई को लेकर विशेष ग्राम सभा हुई थी। ग्रामीणों के विरोध के चलते उसे निरस्त कर दिया गया। आरोप है कि बाद में घर-घर रजिस्टर घुमाकर हस्ताक्षर कराया गया। घाटबर्रा के अधिकांश लोगों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया, तो फर्जी हस्ताक्षर कराया गया। कृष्णा प्रसाद ने आरोप लगाया धनीराम आत्मज संतराम की मृत्यु 15-16 साल पहले हो चुकी है, उनका भी हस्ताक्षर रजिस्टर में है। ऐसे कई नाम हैं, जिनकी मृत्यु ग्राम सभा से पहले हो चुकी है लेकिन कार्रवाई पंजी में इनके दस्तखत हैं। जांच टीम के संयोजक पूर्व मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह ने ग्रामीणों के हवाले से बताया नए खुलने वाले परसा खदान के लिए वनों की कटाई की स्वीकृति मिलने की बात कंपनी के लोग कहते हैं, हालांकि संबंधित कागज कभी नहीं दिखाया गया, इसे लेकर ग्रामीणों में संशय की स्थिति है। ग्रामीण डरे हुए हैं, उन्हें लगता है अडानी कंपनी प्रशासन के साथ मिलकर कभी भी जंगल की कटाई शुरू कर सकती है। एक अनुमान के मुताबिक परसा और केते एक्सटेंशन खदान के लिए कुल 9 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे। इस दौरान विनय शर्मा बंटी, ओमप्रकाश सिंह, आशीष वर्मा, रामचन्द्र यादव, राजू सिंह, दिनेश शर्मा, धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य  मौजूद  थे।
बारहमासी नदियों का अस्तित्व कर रहे खत्म
कांग्रेस की टीम ने हाल में किए गए जंगल की कटाई और खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम को ग्रामीणों ने दिखाया किस तरह अडानी कंपनी बारहमासी छोटी नदियों को डाइवर्ट कर उनका अस्तित्व खत्म कर रही है। कांग्रेस की जांच टीम के सदस्य पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम, गुलाब कमरो, श्रम कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष शफी अहमद, अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, जिला कांग्रेस सरगुजा के अध्यक्ष राकेश गुप्ता, सूरजपुर अध्यक्ष भगवती राजवाड़े, राजनाथ सिंह ने प्रभावितों के बयान के हवाले से बताया कि वनों की कटाई के लिए पुलिस और प्रशासन के साथ अडानी कंपनी के अधिकारियों द्वारा दबाव बनाए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश उपज रहा है, जो कभी भी हिंसक रूप ले सकता है।
रवैया नहीं बदला तो बन सकती है उग्र स्थिति
ग्रामीणों ने कांग्रेस की टीम को बताया कि 21 दिसंबर को पेड़ कटाई से ठीक पहले राम लाल, ठाकुर राम, जयनंदन, श्रीपाल पोर्ते, शिव प्रसाद कुसरो को अलसुबह सादी वर्दी में हथियार से लैस पुलिसवालों ने घरों को घेर कर उठा लिया। जयनंदन के घर का दरवाजा तोड़ दिए। रामलाल को कपड़ा तक नहीं पहनने दिया। गांव के पक्के कच्चे सभी रास्तों तक पुलिस का पहरा लगा कर तीन दिन में करीब 30 हजार बड़े-छोटे पेड़ों को इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से काट दिया। जब पेड़ काटना होता है तो आंदोलन के मुखिया लोगों को नजरबंद कर देते हैं। ग्रामीणों को धरना स्थल में जुटने नहीं देते। मारपीट व धमकी आम बात है। लगातार प्रताड़ना से ग्रामीणों के अंदर आक्रोश पनप रहा है। यदि प्रशासनिक तंत्र और कंपनी का रवैया नहीं बदला तो जल, जंगल और जमीन को बचाने कभी भी उग्र हो सकते हैं।

Categorized in: