विभाग प्रमुखों के कक्ष के समीप शराब, बियर की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास, चखना के पैकेट दे रहे संकेत

GIRIJA THAKUR

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल का एडमिन परिसर शराबखोरी का अड्डा बन गया है। कहने को अस्पताल में सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध किए गए हैं, लेकिन इसमें सेंध लग चुका है। एडमिन परिसर में शराब, बियर की बोतलें, चखना के पैकेट, डिस्पोजल ग्लास का जगह-जगह जमाव इस बात का संकेत दे रहा है कि यह परिसर पूरी तरह से असुरक्षित है। छुट्टी के बाद यहां मय के दीवानों की महफिल जमती है। इसी परिसर में वॉयरोलाजी लैब के अलावा मेडिसिन लेक्चर हॉल, चर्म रोग विभाग, मनोरोग विभाग, सर्जरी विभाग का संचालन होता है। विभाग प्रमुखों की अवकाश के दिन को छोड़कर यहां मौजूदगी रहती है। यहां आए दिन मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. रमनेश मूर्ति, अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या सहित अन्य विभाग प्रमुखों, विषय वेत्ताओं की मौजूदगी में मेडिकल की शिक्षा ले रहे छात्र-छात्राओं के लिए सेमीनार, लेक्चर होते हैं, इसके बाद भी ऐसी गतिविधियों का अस्पताल के मुख्य परिसर में होना कहीं न कहीं सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को सामने ला रहा है। हाल में अस्पताल अधीक्षक ने सरगुजा के तीन विधायकों के अस्पताल में पहुंचने पर बताया था कि सुरक्षा की दृष्टि से यहां निजी कंपनी के 50 सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। यह जानकारी कितनी सही थी, इसका दावा हम नहीं करते, लेकिन निजी सुरक्षा गार्डों के अलावा अस्पताल परिसर में पुलिस सहायता केंद्र होने के बाद भी ऐसे परिदृश्य का सामने आना कहीं न कहीं सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले लोगों की हीला-हवाली को सामने ला रहा है। इस दिशा में सार्थक पहल की जरूरत है क्योंकि कोरोना एलर्ट के साथ ही वायरोलाजी लैब में जांच का दबाव बढ़ सकता है। यहां महिला स्वास्थ्य कर्मियों व मरीजों का आना-जाना लगे रहेगा। ऐसे में असामाजिक गतिविधियों को नजरअंदाज करना आने वाले समय में अस्पताल प्रबंधन के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।

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