किन बातों से घबरा रहा था अस्पताल प्रबंधन, क्या यह पत्रकारों का सार्वजनिक अपमान नहीं

GIRIJA THAKUR

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की कमियों को सामने लाने वाले पत्रकारों के लिए स्व स्फूर्त नियम-कानून बनाने का दौर चल रहा है। हवाला बड़े अधिकारियों के निर्देश का देकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को किस प्रकार ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है, यह नजारा शनिवार को देखने को मिला। आपातकालीन चिकित्सा परिसर के सामने कोविड-19 गहन चिकित्सा इकाई, जो एसईसीएल बिश्रामपुर, महापौर एवं पार्षद निधि अंबिकापुर के द्वारा प्रदत्त है, इसके प्रवेश द्वार पर अचानक मीडिया प्रवेश निषेध का कागज चस्पा कर दिया गया। इसमें अलग से किसी ने यह भी उल्लेख कर दिया है कि बिना अनुमति, नीचे आदेशानुसार भी कलम से लिखा गया प्रतीत हो रहा है। दरअसल शनिवार को सरगुजा कलेक्टर की वाहन से तेज रफ्तार में स्कूटी सवार युवती टकरा गई थी। पत्रकार अपने काम के अनुरूप घायलों का हाल समाचार लेने के लिए रोजाना की भांति पहुंचे, तो यहां कागज में प्रिंट व हस्तलिखित ‘मीडिया प्रवेश बिना अनुमति निषेधÓ लिखा देखकर दंग रह गए। इसके बाद उन्होंने घायलों के बारे में बाहर से जानकारी प्राप्त की और निकल लिए। गहन चिकित्सा इकाई के सामने से गुजर रहे लोगों की नजर भी इस चस्पा कागज पर पड़ रही थी। इनके द्वारा फोन व अन्य माध्यम से सवाल उठाया जाने लगा कि ऐसा क्या हो गया, जो मीडिया के प्रवेश पर बिना अनुमति निषेध का कागज चस्पा करना पड़ गया। सवाल लाजिमी भी था। इसका जवाब दैनिक काम में लगे रहने वाले पत्रकारों के पास भी नहीं था। मीडिया प्रवेश निषेध का यह कागज किसके आदेश पर चस्पा किया गया, इसे लेकर प्रबंधन के बाएं-दाएं मंडराने वाले कुछ टिप्पणी करने से कतराते रहे। इनका कुछ नहीं कहना भी जायज था क्योंकि किसी प्रकार की टिप्पणी इन पर भारी पड़ सकती थी। बहरहाल यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि किन परिस्थितियों में ऐसी तल्ख सूचना चस्पा करनी पड़ी।

Categorized in: