आदिवासी सीएम और ओबीसी-सवर्ण डिप्टी सीएम

2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जबरदस्त वापसी की। 90 में से 54 सीट हासिल कर बहुमत के साथ सरकार बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है। बुधवार को प्रधानमंत्री-गृहमंत्री समेत तमाम दिग्गज भाजपा नेताओं की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के नवनियुक्त मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शपथ ली। उनके साथ अरुण साव और विजय शर्मा ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यहां गौर करने वाली बात यह है कि राज्य के शीर्ष पद पर किसी वर्ग के साथ नाइंसाफी नहीं की गई है। आदिवासी वर्ग से विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री बनाया गया है तो ओबीसी तथा सवर्ण वर्ग का भी ख्याल रखते हुए दोनों वर्गों के प्रतिनिधियों को भी महत्वपूर्ण पद दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से आदिवासी वर्ग से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया था। राज्य गठन के बाद कांग्रेस ने स्व. अजीत जोगी को छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री बनाया था, जो आदिवासी वर्ग से थे। लेकिन वे लंबे समय तक नहीं टिक पाए, और 2003 में भाजपा की सरकार बनी तो डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री बनाये गए। इसके बाद 2018 तक भाजपा की सरकार रही और डॉ. रमन ही मुख्यमंत्री रहे। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई और भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में बाजी पलट गई और भाजपा वापस सत्ता में आ गई।
भाजपा की दुबारा वापसी के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि डॉ. रमन सिंह को वापस मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। उनके अलावा बिलासपुर सांसद तथा लोरमी विधानसभा से नवनिर्वाचित विधायक अरुण साव तथा सरगुजा सांसद व भरतपुर-सोनहत से नवनिर्वाचित विधायक रेणुका सिंह का नाम आगे चल रहा था। इसी बीच पार्टी के आला कमान ने आदिवासी कार्ड खेलते हुए कुनकुरी विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायक व पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया। छत्तीसगढ़ में आदिवासी और ओबीसी की सर्वाधिक जनसँख्या है, जिसने इन दोनों वर्गों को साध लिया, उसकी जीत निश्चित है। यही फार्मूला अपनाते हुए भाजपा ने ओबीसी वर्ग से अरुण साव को भी अहम् पद देते हुए उपमुख्यमंत्री बनाया है। वहीं सवर्णों का भी मान रखते हुए कवर्धा विधायक विजय शर्मा को भी उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

विष्णु देव साय ने 1990 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिसके बाद वे 1998 तक विधायक रहे। वहीं 1999 में उन्होंने पहला लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। विष्णुदेव साय साल 2004 में दोबारा सांसद चुने गए। इसके बाद 2009 और 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें इस्पात और खनन मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। वे कांग्रेस सरकार में भी विभिन्न समितियों के सदस्य रह चुके हैं।विष्णु देव साय को साल 2006 में छत्तीसगढ़ का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। वहीं, 2011 में वे दोबारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। 8 जुलाई 2023 को उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य बनाया गया। विष्णुदेव साय राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके दादा स्वर्गीय बुधनाथ साई 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक थे। उनके बड़े पिता जी यानी उनके पिता के बड़े भाई स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साई जनसंघ के सदस्य थे और 1962-67 और 1972-77 तक दो बार विधायक रहे। वह 1977-79 तक एक बार संसद के रूप में भी चुने गए और जनता पार्टी सरकार में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।

सवर्ण वर्ग से उपमुख्यमंत्री बने विजय शर्मा की राजनीति सफर का शुरुआत छात्र जीवन से हुई। साल 1989 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता रहे हैं। इस दौरान कवर्धा नगर इकाई के सहसंयोजक का दायित्व भी संभाला है। इसके बाद 1993 में वे छात्र संगठन में सक्रिय रहे। वह 2004 में भाजयुमो कबीरधाम जिला के जिला अध्यक्ष रहे। उनका राजनीतिक कद बढ़ाता गया और 2011 में उन्होंने जिला महामंत्री की कमान संभाली। वे दो बार के जिला पंचायत सदस्य भी रहे हैं। साल 2016 में प्रदेश अध्यक्ष युवा मोर्चा छत्तीसगढ़ की कमान संभाली।

डिप्टी सीएम शर्मा का राजनीतिक सफर यहीं खत्म नहीं हुआ वह और निरंतर आगे बढ़ते गए। फिर उन्हें भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश मंत्री बनाया गया। इसके बाद प्रदेश महामंत्री बनाया गया। विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने कबीरधाम विधानसभा सीट से डिप्टी सीएम विजय शर्मा को टिकट दिया। उनके सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता मोहम्मद अकबर थे, उनको पटखनी देते हुए विजय शर्मा ने जीत हासिल की है। इनका नाम डिप्टी सीएम के लिए पहले से ही चर्चा में था। इसके बाद आज मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह के दौरान विजय शर्मा ने दूसरे उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की।

ओबीसी वर्ग से डिप्टी सीएम अरुण साव अभी तक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। साल भर पहले ही इनको यह जिम्मेदारी दी गई थी। अरुण साव ने कम समय में पूरे प्रदेश का दौरा किया और कार्यकर्ताओं को मजबूत किया। विधानसभा चुनाव में इसके परिणाम देखने को मिला। वह छत्तीसगढ़ में कमल खिलाने में सफल रहे। उनका का राजनीतिक सफर सफर देखा जाए तो वह छात्र जीवन से ही अपनी राजनीति की शुरुआत कर दी थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए थे। अरुण साव साल 2019 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीत कर सांसद बने थे। वहीं, इस बार लोरमी विधानसभा से टिकट दिया गया था, जहां साव ने जीत हासिल की। भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश का ओबीसी चेहरा होने की वजह से उपमुख्यमंत्री पद दिया है।

अरुण साव मुंगेली से ग्रेजुएशन और बिलासपुर से कानून की डिग्री ली। इस दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी सक्रिय रहे। 1990 में एबीवीपी की मुंगेली जिला यूनिट के अध्यक्ष बने। इसके बाद एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य भी रहे। 1996 में अरुण साव ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयूमो) के साथ अपने करियर की शुरुआत की। साव छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की और राज्य के महाघिवक्ता के कार्यालय में उन्होंने काफी समय तक काम किया।

विष्णु देव साय के साथ भाजपा ने ओबीसी वर्ग से अरुण साव तथा सवर्ण वर्ग से विजय शर्मा को भी अहम् पद दिया है। दोनों को उपमुख्यमंत्री नियुक्त गया है। इससे यह साफ़ है कि भाजपा ने एक साथ तीनों वर्गों को साध लिया है।

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