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अंबिकापुर। जहां एक ओर सरकार बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं शिक्षा संस्थान के आड़ में मनमानी का गोरखधंधा भी चल रहा है। यही नहीं शासन के द्वारा नि:शुल्क शिक्षा के प्रावधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बच्चों के भविष्य की चिंता स्कूल संचालकों को नहीं है। ऐसा ही मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से सामने आया है। यहां आरटीई में चयनित बच्ची का नाम फीस वसूलने के लिए काट दिया गया। इसकी शिकायत कलेक्टर तक पहुंचाने के बाद भी बच्ची के स्वजन को राहत नहीं मिल पाई है। कार्रवाई नहीं होने से संस्था संचालक के हौसले बुलंद है।

रामानुजगंज नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 08 निवासी रजत कुमार ने लिखित शिकायत पत्र में बलरामपुर जिला कलेक्टर को बताया गया है कि साई बाबा पब्लिक स्कूल रामानुजगंज में उनकी दो पुत्रियों का आरटीआई के माध्यम से नि:शुल्क शिक्षा के लिए चयन हुआ है। आशी कुमारी का आरटीई के तहत कक्षा पांचवीं में 08 सितंबर 2020 से एवं रिधिमा कुमारी का आरटीई से कक्षा पहली के लिए 01 सितंबर 2020 को साई बाबा पब्लिक स्कूल रामानुजगंज में प्रवेश हेतु चयन हुआ। आरटीई से चयन के बाद भी पिछले दो वर्षों से दोनों पुत्रियों का फीस जमा करने के लिए उन्हें मानसिक रूप से बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा था। संस्था प्रमुख मनोज कुमार के द्वारा फीस नहीं देने पर बच्चियों को स्कूल से निकाल देने व परीक्षा में बैठने नहीं देने की बात कही जा रही थी। यह बात बच्चियों से सुनने के बाद उन्होंने दोनों पुत्रियों का यह कहते हुए स्कूल भेजना जारी रखा कि वे सर से बात कर लेंगे। रजत कुमार जब स्कूल के संचालक मनोज कुमार से मिले तो उनके द्वारा जबरन पिछले दो वर्षों का स्कूल फीस, आशी कुमारी का प्रवेश शुल्क 4250 रुपये एवं मासिक फीस 850 रुपये, रिधिमा का 3015 रुपये प्रवेश शुल्क एवं मासिक फीस 650 रुपये जमा करवाया गया। रुपये जमा करने के बाद इसकी रसीद नहीं दी गई। आरोप है कि रसीद मांगने पर मनोज कुमार ने कहा आरटीई के तहत पढ़ना है तो भी फीस देना पड़ेगा, इसकी रसीद नहीं दी जाएगी। ज्यादा नेतागिरी करने पर दोनों बच्चों का नाम काटकर संस्था से बाहर कर देने की धमकी दी गई। कलेक्टर से किए गए शिकायत में उन्होंने कहा है उक्त घटना की शिकायत जब उन्होंने रामचंद्रपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर से की तो स्कूल प्रमुख ने कक्षा पहली में पढ़ने वाली बच्ची रिधिमा का नाम काटकर उसे संस्था से बाहर कर दिया गया। बच्ची के भविष्य को देखते हुए उन्होंने उसका दाखिला स्वामी आत्मानंद स्कूल में कराया। बच्ची वहां अकेले पढ़ने के लिए तैयार नहीं थी, वह बड़ी बहन के साथ पढ़ने का जिद्द की। इसके बाद उन्होंने पुन: प्राचार्य मनोज कुमार से मिलकर बच्ची की पीड़ा का जिक्र किया, तो उन्होंने ज्यादा परेशान करने पर दूसरी पुत्री का भी नाम काट देने की बात कही गई। स्कूल के प्रमुख की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर कलेक्टर बलरामपुर तक उन्होंने अपनी पीड़ा पहुंचाई लेकिन दो माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। परेशान बच्ची के पालक ने संस्था संचालक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

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