स्थानीय बेरोजगारों का हक छीनकर लोगों को परोस रहे मिलावटी शराब

अंबिकापुर। अंग्रेजी शराब दुकानों के शासकीय करण के बाद बेरोजगार युवकों को उम्मीद थी कि पढ़ने-लिखने के बाद बनी बेरोजगारी की स्थिति में कम से कम सेल्समैन का काम करके वे अपनी आजीविका चलाएंगे, लेकिन उनकी इस मंशा पर छत्तीसगढ़ प्रदेश से बाहर दिगर राज्यों में शिक्षा ग्रहण किए लोगों ने ग्रहण लगा दिया है। अंबिकापुर की शराब दुकानों में कितने स्थानीय बेरोजगार सेल्समैन का काम कर रहे हैं, इसकी मॉनीटरिंग जिम्मेदारों ने करने की कोशिश नहीं की, जिस कारण प्लेसमेंट के अधिकारी की मनमर्जी चल रही है। शासकीय अंग्रेजी शराब दुकानों में दिगर राज्य के लोगों का दबदबा बना है। इनकी दबंगई के आगे उपभोक्ताओं को मिलावटी शराब परोसने का गोरखधंधा तो चल ही रहा है, मिलावटी शराब की शीशी में कीड़ा, कचड़ा होने जैसी शिकायत भी सामने आ चुकी है। ब्लैकलिस्टेड पूर्व ठेकेदारों के गुर्गों को शराब दुकान में सेल्समैन की जिम्मेदारी देने से ऐसे हालात बनने की भी चर्चा हो रही है।

उल्लेखनीय है बीते नवंबर 2021 में शहर के गंगापुर में स्थित शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान से मिलावटी शराब परोसने जैसी शिकायत बिलासपुर तक पहुंची थी। इसके बाद बिलासपुर से विभागीय टीम गंगापुर शराब दुकान में पहुंचकर छापामार कार्रवाई की थी। टीम ने इस दौरान करीब 200 सीसी सहित एक पाव रंग बरामद कर प्लेसमेंट के कर्मचारियों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद कुछ समय के लिए मिलावट का खेल बंद कर दिया गया था। पुन: शहर के शराब दुकानों में बिहार, उत्तर प्रदेश के लोग आकर अपनी दबंगई शुरू कर दिए हैं। शराब के शौकीनों का आरोप है कि यहां मिलावट का खेल बेखौफ चल रहा है। जिले में पदस्थ विभाग के उच्च अधिकारी भी इन पर मेहरबान हैं। अब तक स्थानीय लोगों की इन दुकानों में भर्ती नहीं हुई है, बाहरी लोगों को पनाह देने का परिणाम है कि बेधड़क मिलावटी शराब बेचकर मलाई काट रहे हैं। अंबिकापुर में स्थित एक अंग्रेजी शराब दुकान में जार के सामने मिलावट की गई शराब व ढक्कन का नजारा हाल में कुछ लोगों ने अपनी आंखों से देखा और इसकी तस्वीर भी कैद की है।

कर रहे लोगों की जान से खिलवाड़
शराब वैसे भी सेहत के लिहाज से नुकसानदायक है। इसके बाद मिलावटी व रंग मिलाकर शराब परोसी जाने लगे तो वह स्वास्थ्य के लिए कितना लाभप्रद होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। शराब दुकानों में कार्यरत सेल्समैन और मैनेजर के पास ऐसी शिकायत लेकर कोई जाए भी तो वे शीशी वापस करने दबाव बनाते हैं, लेकिन पूर्व में कुछ मदिरा प्रेमियों ने इनकी हरकतों को सार्वजनिक करने के लिए रुपये के बरबादी की परवाह ना करते हुए ना तो उक्त शराब का सेवन किया और ना ही कीड़ा, कचड़ा, जाली युक्त शराब को वापस किया। इसके बाद भी अफसरों की मेहरबानी बनी रहने से खुलेआम मिलावटी शराब खपाने का गोरखधंधा चल रहा है। मुनाफाखोरी के लिए इनकी कारगुजारियां लोगों के सेहत से खिलवाड़ करने जैसा है।

बिहार में पढ़ाई, छत्तीसगढ़ का निवास
सूत्रों का कहना है शहर व जिले की शराब दुकानों में उत्तर प्रदेश व बिहार के पूर्व ब्लैकलिस्टेड ठेकेदारों के कर्मचारियों का कब्जा है। जिले में बैठे प्लेसमेंट अधिकारी को मदिरा प्रेमियों के सेहत से हो रहे खिलवाड़ की परवाह नहीं है। ऐसे में लोगों का कहना है आबकारी विभाग के मुखिया ही जब इन पर मेहरबान हों, तो कार्रवाई कौन करेगा। कुछ जिम्मेदार लोगों ने तह तक पहुंचने के बाद बताया कि औरंगाबाद से आकर छत्तीसगढ़ का निवास बनवाए नरेंद्र पासवान बिहार पटना में पढ़ाई किए हैं। ये वर्तमान में भगवानपुर अंग्रेजी शराब दुकान में कार्यरत हैं। रंजय उर्फ बबलू रायपुर के पंडरी बस स्टैंड में स्थित अंग्रेजी शराब दुकान से ब्लैक लिस्टेड बताए जा रहे हैं। प्लेसमेंट के मैनेजर के सह पर जनसेहत से खिलवाड़ का सिलसिला अनवरत चल रहा है।

हमेशा सुर्खियों में रहा गंगापुर शराब दुकान
गंगापुर में स्थित शासकीय शराब दुकान शुरूआत से सुर्खियों में रहा है। यहां कार्यरत मैनेजर उपेंद्र चंद्रवासी भी मूलत: झारखंड के रहने वाले है, जो छत्तीसगढ़ रायपुर से दुकानों से होते सरगुजा में शरण लिए हैं ताकि अंग्रेजी शराब में मिलावट कर मोटी रकम कमाई जा सके। सरगुजा जिले के अंग्रेजी शराब दुकानों में सर्वाधिक राजस्व आय इस दुकान से होता है। एक वायरल वीडियो से जाहिर हो रहा है कि मिलावट के लिए 12 से 15 लीटर पानी का जार ये रखते हैं। सूत्र बताते हैं कि मिलावट का गोरखधंधा करते समय इनके द्वारा काफी सावधानी बरती जाती है ताकि इनकी करतूत का सीसीटीवी में फुटेज कैद ना हो जाए। बहरहाल पुन: छापामार कार्रवाई के लिए टीम पहुंचे, इस ओर लोग टकटकी लगाए बैठे हैं।

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