दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता के कारण पर्यटक के बीच धीरे-धीरे लोकप्रिय हॉलिडे डेस्टिनेशन बनते जा रहा है। कुछ पर्यटक मानसिक-आत्मिक शांति के लिए प्रकृति के करीब हरे-भरे गंतव्य की ओर रूख करते हैं तो कुछ शहरों से दूर खदान जैसे इलाकों की ओर। साधारण शब्दों में अलग-अलग शौक व पसंद के हिसाब से स्थलों का चुनाव पर्यटक करते हैं।छत्तीसगढ़ का किरंदुल भी एक ऐसी जगह है जो राज्य की हसीन वादियों और खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करता है।

मानसून में इस जगह की खूबसूरती देखने लायक होती है। समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ यह अज्ञात स्थल कुछ अलग अनुभव प्राप्त करने के लिए एक आदर्श गंतव्य है। किरंदुल मुख्य तौर पर अपनी लौह अयस्क खानों की वजह से ज्यादा लोकप्रिय है। यदि आप जुलाई महीने में छत्तीसगढ़ में घूमने का प्लान कर रहे हैं तो इस लेख के माध्यम से जानिए यह किरंदुल आपका किस प्रकार मनोरंजन कर सकता है।

मलांगिर वॉटरफॉल

किरंदुल में घूमने की बात होती है तो सबसे पहले मलांगिर वॉटरफॉल का नाम जरूर लिया जाता है। मलांगिर वॉटरफॉल को किरंदुल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ का छिपा हुआ खजाना माना जाता है।किरंदुल की हसीन वादियों में मौजूद यह वॉटरफॉल सैलानियों के बीच काफी फेमस है। हरे-भरे वन और छोटे-बड़े पहाड़ों के बीच में मौजूद मलांगिर वॉटरफॉल की असल खूबसूरती मानसून में देखने लायक होती है। मानसून में इस वॉटरफॉल को देखने और स्नान करने हर रोज हजारों पर्यटक पहुंचते हैं।

कदपाल टैलिंग बांध

मलांगिर वॉटरफॉल घूमने के बाद आप कदपाल टैलिंग बांध जा सकते हैं। किरंदुल के हरे-भरे वनों के बीच में मौजूद यह बांध खूबसूरत दृश्यों को प्रस्तुत करता है। मानसून में यह बांध सैलानियों के लिए काफी पसंदीदा जगह बन जाती है। कदपाल टैलिंग बांध का मुख्य रूप से सिंचाई और बिजली पैदा करने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन आसपास के इलाकों में यह पिकिनिक स्थल के रूप में भी काफी फेमस है। कदपाल टैलिंग बांध के आसपास मौजूद वनों में आप ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। वनों के बीच में खूबसूरत तस्वीरों को भी कैद कर सकते हैं। कदपाल टैलिंग बांध मुख्य रूप से सिंचाई और बिजली पैदा करने के लिए बनाया गया है। कुछ अलग अनुभव पाने के लिए आप इस खास स्थान के भ्रमण का प्लान बना सकते हैं।

किरंदुल आयरन माइंस

यह तो आप जानते ही होंगे कि छत्तीसगढ़ माइंस की खुदाई में के लिए जाना जाता है। ऐसे में अगर आप किसी हसीन जगह घूमने के साथ-साथ माइंस की खुदाई से रूबरू होना चाहते हैं तो किरंदुल आयरन माइंस जा सकते हैं। किरंदुल आयरन माइंस जिसे कई लोग बैलाडीला आयरन माइंस के नाम से भी जानते हैं। लगभग 40 किमी के क्षेत्र में फैला10 किमी चौड़ा बैलाडिला लौह अयस्क क्षेत्र देश भर के पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इस क्षेत्र में 11200 मिलियन प्रीमियम ग्रेड लौह अयस्क है। इसलिए यहां अतबक वर्तमान तकनीकी और मशीनरी से तीन खानों की खुदाई की जा चुकी है। यह खदाने काफी साहसिक एडवेंचर का एक विकल्प हो सकती है। अगर आप सख्त दिल के हैं तो प्रसाशन की मदद से इन खानों के अंधरों का अनुभव ले सकते हैं।

दंतेश्वरी मंदिर

किरंदुल का दंतेश्वरी मंदिर काफी पवित्र और लोकप्रिय मंदिर है। यह राज्य से चुनिंदा धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोगों का आस्था का केंद्र यह मंदिर देवी सती को समर्पित है। पौराणिक की किवदंतियों के अनुसार शिव से तांडव के दौरान सती का एक दांत इसी स्थान पर गिरा था, इसलिए इस मंदिर का नाम दंतेश्वरी मंदिर पड़ा। किरंदुल से लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में चालुक्य राजाओं द्वारा किया गया था। यह मंदिर प्राचीन वास्तुकला कौशल को चित्रित करता है। मंदिर जो चार खंडों में बांटा गया है। मंदिर के मुख्य मंडप में देवी दांतेश्वरी विराजमान हैं।

बत्तीसा मंदिर

माता दांतेश्वरी के दर्शन के बाद आप आप भगवान शिव को समर्पित बत्तीसा मंदिर में जाकर दैवीय वातावरण का स्पर्श कर सकते हैं। यह मंदिर आस्था के साथ-साथ अपनी आकर्षक वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। सिमेट्रिक डिजाइन और मंदिर की खूबसूरती इस शहर की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का जीता जागता सबूत है।मंदिर में दो आकर्षक मंडर भगवान शिव को समर्पित हैं। उनमें से एक में एक बड़ा शिवलिंग है। अपनी खासियतों की वजह से यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं द्वारा दौरा किया जाता है बल्कि स्थापत्य गौरव को देखने के लिए यहां भारी संख्या में सैलानी भी आते हैं।

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