अस्पताल में हुई थी मौत, सड़क मार्ग तक मिली शव वाहन की सुविधा

सात किमी की दूरी तय करने ग्रामीणों को आए दिन करना पड़ता है ऐसे हालात का सामना

 

गिरजा ठाकुर

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों का विकास किस हद तक हो पाया है, इसकी तस्वीर इंटरनेट मीडिया से वायरल होते जिला प्रशासन के कानों तक पहुंचने वाली उस आवाज से लगाई जा सकती है, जिसमें एक बीमार को मौत के बाद ग्रामीणों का समूह खाट में शव को लेकर गृहग्राम तक पहुंचने संघर्ष करने में लगा है। ऐसे में इस बात को नकारा नहीं जा सकता है घाट-पहाड़ों में बसे ग्रामीण आज भी विकास की धारा से कोषों दूर हैं। सरकारी तंत्र इनके विकास का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सिर्फ आश्वासन देते रहा, जिस कारण ऐसे हालातों में बदलाव नहीं आ पाया है। चुनावी वर्ष में जनप्रतिनिधि स्वयं ऐसे दुर्गम स्थलों का भ्रमण प्रशासन की टीम के साथ कर रहे हैं। साथ ही सवाल यह उठ रहा है विकास का झुनझुना बजाने वाले जनप्रतिनिधि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों की सुध चुनावी वर्ष में लेने ही क्यों निकलते हैं। सरगुजा के नामचीन जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में में ऐसे हालात का सामना लोगों को करना पड़े, तो समझा जा सकता है कि सरकार और उनका तंत्र किस हद तक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन समर्पण भाव से करने में लगा है।
जी हां…सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत का पटकुरा के आश्रित ग्राम घटोन का ऐसा ही एक वीडियो इंटरनेट मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है, जिसमें आधा दर्जन लोग एक बीमार को मौत के बाद शव को खाट में ले जाते नजर आ रहे हैं। हालांकि ऐसी तस्वीर सामने आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 23 वर्षों में ऐसे हालात के बीच वन क्षेत्र में बसे लोगों का बसर करना सरकारी तंत्र के विकास के दावों को तमाचा मारता प्रतीत होता है। विडंबना ही कहा जाए बीमार पड़ जाए या किसी की मौत इलाज के दौरान हो जाए तो ऐसे जगहों में बसे ग्रामीणों के घरों तक एंबुलेंस पहुंच पाना मुमकीन नहीं है। गांव-गांव को सड़क, बिजली व पानी की सुविधा से जोडऩे के कोशिशों में नाकामी या इच्छाशक्ति के अभाव को ऐसी तस्वीरें परिलक्षित कराती हंै। ग्रामीणों के द्वारा वर्षों से बसाहट तक सड़क बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन हालात में बदलाव नहीं आ पाया है। सात किलोमीटर सड़क बन जाए तो ग्रामीणों को ऐसे दुर्दिन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
200 की आबादी वाला है आश्रित मोहल्ला
बताया जा रहा है कि लखनपुर ब्लाक अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत पटकुरा के आश्रित ग्राम घटोन में दो सौ लोगों की आबादी निवास करती है। गांव के सेल्बेस्टर लकड़ा की बीमारी से मौत अस्पताल में हो गई थी। प्रशासन का कहना है कि शव लेकर ग्रामीण मुक्तांजलि वाहन से रवाना हुए थे, लेकिन ग्रामीण के घर तक शव वाहन का पहुंच संभव नहीं था। पहुंचविहीन मार्ग होने के कारण वाहन के पलटने का भी खतरा था। ऐसे में जहां तक संभव हो सका, मृतक के शव को वाहन से पहुंचाया गया, इसके बाद ग्रामीण उसे खाट से लेकर गांव की ओर रवाना हुए।

 

कलेक्टर कहते हैं-ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों का किया है चिन्हांकन

कलेक्टर कुंदन कुमार ने मामले को लेकर कहा-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी और जहां तक सड़क है वहां तक हमारे शव वाहन से उन्हें छोड़ा गया है। चूंकि उसके बाद बहुत ही दुर्गम रास्ता है, वहां तक शव वाहन नहीं जा सकता। गाड़ी ले जाने पर पलट जाएगी। एंबुलेंस के कर्मचारियों ने पहुंच मार्ग तक शव को लाने के बाद स्वजनों को सौंप दिया। जिस व्यक्ति की मौत हुई है, वे ऊपर पहाड़ पर रहते हैं। किसी भी हालत में न बाइक से और न ही वाहन से नहीं ले जाया जा सकता है। वन विभाग का रोड होने के कारण इस समस्या से डीएफओ को अवगत करा दिया गया है। टीम एक बार सर्वे करेगी, सात किलोमीटर का रास्ता दुर्गम और पहाड़ी होने के कारण कई पेड़ काटने पड़ेंगे। इसे वनमंडलाधिकारी को वर्किंग प्लान में ऐड करने के लिए मैंने बोला है। जिले में कई ऐसे रास्ते हैं, जहां कोई वाहन नहीं जा सकती है। जिले में सभी जगह शव वाहन की सुविधा है, लेकिन जहां तक रास्ता है, वहीं तक कोई वाहन पहुंच सकती है। पहाडिय़ों में जहां दो-चार घर हैं, वहां गाडिय़ां नहीं पहुंच पाती हैं। हमने 20 ऐसे पंचायतों को चिन्हांकित किया है, जो इस वजह से पहुंचविहीन हैं। सभी सड़कों को एक बार में नहीं बनाया जा सकता। कई जगह फारेस्ट क्लीयरेंस लेने पड़ेंगे। बहुत पेड़ों को काटना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में जनसंख्या के आधार पर प्राथमिकता देते हुए सड़क का निर्माण वन विभाग के सहयोग से किया जाएगा। जिला प्रशासन का पूरा प्रयास है, इस प्रकार की परिस्थिति नहीं बने।

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