*कांग्रेस की बेसतही गुटबाजी को देखकर कई विधायक बनने का ख्वाब देख रहे*

रोमी सिद्दीकी

अम्बिकापुर/ सरगुजा संभाग के हृदय के रूप में पहचान रखने वाला अंबिकापुर विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरगर्मी तेज होती जा रही है लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में क्या कांग्रेस का तोड़ या कहे मुकाबले में भाजपा नया कोई प्रत्याशी खड़ा करेगी या फिर पुराने प्रत्याशी को ही एक बार फिर मौका देगी हालांकि यह सब बातें केवल अटकलें है लेकिन इस बीच इतना तो तय है कि कांग्रेस के वर्तमान विधायक कैबिनेट मंत्री टीएस सिंह देव का एक बार फिर से अंबिकापुर विधानसभा चुनाव लड़ना लगभग तय है लेकिन श्री सिंह देव के सामने भाजपा से कौन चुनाव लड़ेगा यह काफी दिलचस्प होगा..

हालांकि भाजपा में अम्बिकापुर से चुनाव लड़ने के लिए दर्जन से ज्यादा लोग लाइन में खड़े है इन लोगों के द्वारा अंबिकापुर विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में दीवारों पर अबकी बार भाजपा सरकार के साथ अपने नाम का पोस्टर भी चस्पा करा दिया है जिनमें कुछ लोग ऐसे है जो कभी कांग्रेस में सक्रिय रहे लेकिन उपेक्षा का आरोप लगा के भाजपा में आ गए वही कुछ भाजपा में ही राजनीति लम्बे समय से कर रहे हैं लेकिन भाजपा नेताओं की ही माने तो इनमें जनाधार वाला कोई भी नेता नहीं है जो सीधे तौर पर सिंह देव को टक्कर दे सके इनमें से ज्यादातर लोग चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि सिंह देव से चुनाव हार कर नेता बनना चाहते हैं कुछ नेता टीएस सिंह देव का केवल विरोध मात्र व कुछ कट्टर हिन्दू नेता स्वयं को साबित कर इस विधानसभा सीट में भाजपा के टिकट के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन इनमें अधिकांश कभी पार्षद,जनपद पंचायत तो कोई जिला पंचायत तक का चुनाव हार चुके हैं

लेकिन भाजपा में लंबे समय से सक्रिय नेताओं की माने तो टिकट की दौड़ में इन नेताओं का दूर-दूर तक कोई नाम नहीं है उन्होंने इसका कारण तो नहीं बताया लेकिन इशारों इशारों में यह बताएं कि भाजपा इस बार अंबिकापुर विधानसभा सीट में नया प्रयोग करने वाली है वह आगामी विधानसभा चुनाव में किसे टिकट देगी यह तो नहीं मालूम लेकिन संगठन के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसा व्यक्ति को टिकट दिया जाए जो नया हो , साफ सुथरी छवि का हो और उसकी विचारधारा संघ से मिलती हो यानी यह साफ है कि इस बार भाजपा अंबिकापुर विधानसभा सीट से नया प्रयोग के साथ एक नया प्रत्याशी को भी मैदान में खड़ा करने वाली है हालांकि प्रत्याशी कौन होगा ..? कुछ लोगों से बात करने पर एक व्यक्ति का नाम बार बार आ रहा है हम उसका नाम तो नहीं बता सकते हैं लेकिन इशारा के माध्यम से आप को हिंट कर देते हैं वह व्यक्ति संघ प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का पुरी जिम्मेदारी उठाया था…

ब्राह्मण समुदाय से आने वाला यह व्यक्ति लंबे समय तक बैंक अधिकारी के रूप में अंबिकापुर में अपनी सेवाएं दे चुका है बुद्धिजीवी के साथ-साथ आम लोगों में इसकी पकड़, जनसंवाद काफी अच्छा है एक नेता के मुकाबले..यही नहीं इस व्यक्ति का मुस्लिम व ईसाई समुदाय में भी अच्छी दखल है मुस्लिम समुदाय के प्रथम श्रेणी के लोग इन्हें काफी अच्छा मानते हैं…

दूसरी ओर अपनी बायोडाटा लेकर लाइन में खड़े भाजपा के नेताओं के बारे में ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है कुछ तो केवल शिकायत, शिकायत, शिकायत और कुछ तो बेवजह नगर विधायक के विरोध में लगे रहते हैं वही कुछ नेता भाजपा के 15 वर्षों के कार्यकाल में इतना धन अर्जित कर लिए हैं कि उन की लालसा अब विधानसभा चुनाव लड़ने की है इसके लिए अपने सामान्य दिनचर्या में भी राजनीति के गुण लाने की जुगत में लगे हुए हैं लेकिन भाजपा के अंदर ही इतनी ज्यादा आपसी मतभेद उभर चुकी हैं कि इन नेताओं में से किसी को भी अगर संगठन एक बार भी मौका देती है तो भाजपा को एक बार फिर यह सीट गंवाना पड़ सकता है…


हालत यह है कि हर एक भाजपा का स्थानीय नेता अपना गुट लेकर बड़ा नेता बनने की जुगाड़ बना रहा है मौजूदा समय में ये नेता एक दूसरे को रखना पसंद नहीं कर रहे हैं हर कोई अपनी लाइन खिचने में है क्योंकि ठीक इसके विपरीत कांग्रेस में टिकट के लिए ना तो कोई लाइन है नहीं कोई दूसरा दावेदार कांग्रेस कार्यकर्ताओं का वर्तमान विधायक के लिए खड़े रहना विधायक की जबरदस्त किलेबंदी का प्रमाण है.. कांग्रेस में गुटबाजी से इंकार नहीं किया जा सकता है लेकिन जो गुटबाजी सतह पर नजर आ रही है वे भी विधानसभा चुनाव में श्री सिहं देव के सामने टिकना तो छोडिये अगर श्री सिह देव से उनका आमना सामना भी हो जाये तो वे सीधे उनके चरणों में गिर जाते हैं.. ऐसी स्थिति में अंबिकापुर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अंदर लगभग स्थिति सामान्य है बल्कि मौजूदा समय में जो परिदृश्य आम जनता के सामने लगातार आ रहा है जिसे एक लाइन में उपेक्षा कहे तो इससे वर्तमान विधायक के प्रति आम जनता के मन में जबरदस्त तरीके से जुड़ाव बनता जा रहा है जिसका लाभ विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है…

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