पतरापाली में आयोजित भागवत कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं का भीड़

रामानुजनगर। धर्ममय आचरण ही जीवन में शांति का मूल है। यदि हमें सुखमय शांतिपूर्ण जीवन जीना है तो मनुष्य को कथा श्रवण करना चाहिए। कथाओं के श्रवण से मन की आंतरिक दरिद्रता का विनास तो होता ही है इससे विवेकशीलता व ज्ञान चक्षु हमेशा खुले रहेंगे। उक्त उद्गार ग्राम पतरापाली में श्री ओमदत्त दुबे, चंद्र दत्त दुबे के यहां आयोजित श्री मद्भागवत कथा में चित्रकूट धाम से आए श्री मद्भागवत कथा के सरस प्रवक्ता ‌ श्री सुरेशानंद जी महाराज ने व्यास पीठ से व्यक्त किए।
ग्राम पतरापाली में पिछले 15 दिनों से यहां का माहौल भक्तिमय बना हुआ है। 30 मार्च रामनवमी के दिन से सार्वजनिक भागवत कथा का आयोजन हुआ। इसके बाद 6 अप्रेल से दुबे परिवार की ओर किए गए श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दिब्य आयोजन से क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से लगातार भक्तिमय बना हुआ है। और हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त कथा श्रवण कर रहे हैं। कथा के दौरान श्री सुरेशानंद जी महाराज ने बताया कि मन पूर्वक यदि आपने अपने बुद्धि की तिजोरी खोलकर प्रवचन के एक भी शब्द को रखने का प्रयत्न किया है तो आप धर्म वान व धनवान होंगे। जीवन में दुख और सुख अपने कर्मों से मिलता है सुखी जीवन जीने के लिए सदा सत्कर्म करते रहना चाहिए। इस ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पंचम दिवस श्री कृष्ण जन्मोत्सव, षष्ठम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया गया। इस दौरान मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों तथा मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो पद्य के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का विस्तार से मोहक वर्णन तथा सप्तम दिवस गोपीयों की महारास लीला रूकमणि विवाह की कथा सुनाई। 13 अप्रेल को सुदामा चरित की कथा के बाद कथा का विश्राम होगा। वहीं 14 अप्रेल को पूर्णाहुति के साथ यज्ञ का समापन होगा श्री दुबे परिवार की ओर से अंतिम दिन की कथा श्रवण करने अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होने श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है

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