बैकुंठपुर । राज्य के गौठनों में निर्मित गोबर पेंट   का सरकारी भवनों के रंग-रोगन में उपयोग  करने  के लिए मुख्यमंत्री  के निर्देश के पस्चात भी एमसीबी जिला  अंतर्गत मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में  केमिकल युक्त पेंट का उपयोग किया जा रहा।  जबकि जिले के कलेक्टर द्वारा गौठनों में निर्मित गोबर पेंट से ही रंग रोगन करने व उपयोग करने की अपील आम जनता से की गई हैं। इसके बावजूद वन मंडल मनेन्द्रगढ में शासन व जिला प्रशासन की अनदेखी करते हुए खुलेआम  बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त पेंट का उपयोग  शासकीय कार्यो में  किया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और महिलाओं व युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाने के उद्देश्य से गौठानों में विकसित ग्रामीण औद्योगिक पार्क में कई रोजगारपरक कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गौठान में गोबर पेंट का निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को वन मंडल मनेन्द्रगढ़ ठेंगा दिखा रहा है। आज भी वन मण्डल मनेन्द्रगढ़ के अन्तर्गत कराये जा रहे विभिन्न कार्यों में केमिकल युक्त पेंट का उपयोग बदस्तूर जारी है। विदित हो कि मुख्यमंत्री बघेल ने विभागों द्वारा केमिकल पेंट का उपयोग किए जाने पर नाराजगी जताते हुए निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। लेकिन शायद वन मण्डल कार्यालय को प्रदेश के मुखिया के आदेश निर्देश से कोई लेना देना नही है। यहीं कारण है की वन मण्डल कार्यालय परिसर, काष्ठागार और अन्य जगहों पर बेख़ौफ़ होकर केमिकल पेंट का उपयोग किया जा रहा है और शासन के नियमों का मजाक उड़ाया जा रहा है।

आपको बता दें की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिसंबर 2022 में आदेश जारी कर प्रदेश के सभी सरकारी भवनों और कार्यालयों के रंग रोगन में गोबर पेंट का उपयोग करने के निर्देश जारी किए थे। उन्होंने इसे सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में शामिल किया था साथ ही कहा था कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से प्रदेश सरकार के अन्य महत्वाकांक्षी योजनाओं की तरह है। इसे भी नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी व गोधन न्याय योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों के गौठानों में गोबर से कम्पोस्ट खाद के साथ-साथ अन्य सामग्री का निर्माण महिला समूहों द्वारा किया जा रहा हैं। एवं गौमूत्र से फसल कीटनाशक और जीवामृत तैयार किये जा रहे है। महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क योजना के तहत गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल, पर्यावरण अनुकूल, प्राकृतिक ऊष्मा रोधक, किफायती, भारी धातु मुक्त, अविषाक्त एवं गंध रहित गुण पाये जाते हैं। इसके गुणों को देखते हुये छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समस्त शासकीय भवनों की रंगाई हेतु गोबर से प्राकृतिक पेंट के उपयोग के लिये आदेश जारी किया गया था। सीएम के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा प्रदेश के सभी अधिकारियों को आदेश जारी कर सरकारी कार्यालय में गोबर पेंट ही उपयोग करने के निर्देश दिए थे।

यह भी कहा गया था कि सरकारी भवनों में बाजार से मिलने वाले केमिकल युक्त पेंट का उपयोग किसी भी परिस्थिति में नही किया जाना है फिर भी यदि यह किया जाता है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। इसके बाद भी अधिकारी इसकी अनदेखी कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिले के वन मंडल मनेन्द्रगढ कार्यालय एवं उनके परिक्षेत्रों में ही इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों एवं सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशों को दरकिनार कर वन मंडल मनेन्द्रगढ के रंग-रोगन में खुलेआम केमिकल युक्त पेंट का उपयोग हो रहा है। जबकि केमिकल युक्त पेंट के उपयोग को मुख्यालय ने पर्यावरण के लिए हानिकारक बताते हुए इसका उपयोग नहीं करने के लिए लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी संबंधित अधिकारी सरकारी फरमान को दरकिनार कर मनमानी करते हुए केमिकल पेंट से डेटिंग पेंटिंग करा रहे हैं। वही जब इस संबंध में जिले के जिम्मेदार उप वन मंडल अधिकारी मनेन्द्रगढ़ से जानकारी चाही गई तो उन्होंने इस संबंध में फ़ोन पर कोई भी जानकारी नही देने का  हवाला देते हुए कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

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