दतिमा मोड़(अनूप जायसवाल)- भैयाथान विकासखण्ड के ग्राम बतरा में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के कर्मियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए लोगों ने क्षेत्र के आसपास में अन्य बैंकों की शाखा खोलने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार बैंक में व्याप्त अव्यवस्थाओं और मनमानी के चलते यहां के उपभोक्ता काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आस-पास में एकमात्र बैंक होने से लोगों को न चाहते हुए भी इसी बैंक से लेन-देन करने की मजबूरी बन गया है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने बताया कि अनेक ग्रामों का केन्द्र माने जाने वाले बतरा में संचालित इस ग्रामीण बैंक की शाखा की व्यवस्था शाखा प्रबंधक की मनमानी के चलते चरमरा गई है। क्षेत्र के इस इकलौते बैंक में इतने खाते खुल चुके हैं कि बैंक प्रबंधन इन खातों का संचालन सही ढंग से नहीं कर पा रहा है। खामियाजा ग्रामीण उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। खातेदारों ने बताया कि उन्हें बैंक में आने के बाद अपना काम कराने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। ग्राहकों के लिए न तो बैठने की जगह है और न ही पेयजल की कोई व्यवस्था की गई है। उपभोक्ताओं को अपने ही जमा किए रुपए को निकालने, जमा करने या दूसरे कामों के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। लेन-देन में परेशानी हो रही है।

शाखा प्रबंधक व कैशियर की मनमानी, हौसले बुलंद…

ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक व कैशियर का मनमानी चरम पर हैं खाताधारी बैंक के चक्कर लगा रहे है और उनकी लापरवाही के चलते कई किलोमीटर दूर से चलकर आने वाले खाताधारक कई घंटे इंतजार करने के बाद वापस लौट रहे हैं। इन खाताधारकों में कई तो बहुत ही लाचार और वृद्ध लोग हैं, जिन्हें देखकर भी इन लापरवाह बैंक कर्मियों का दिल नहीं पसीजा है। बैंक कैशियर हमेशा विवादों के घेरे में रहते है आए दिन खाता धारियों से विवाद की स्थिति बनती है और बदतमीजी करना आम बात हो गई हैं। शुक्रवार को तो एक बुजुर्ग बैंक कर्मियों के सामने ही रो पड़ा। उसका कहना था कि वह कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रहा है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी बैंक कर्मी उसकी एक नहीं सुनते हैं। ज्ञात हो कि बीते दिनों बैंक के बाहर नेटवर्क नहीं है का बोर्ड लगा था और अंदर अपने चहेतों को पैसों की निकासी कर रहे थे। दर्जनों लोग बैंक परिसर में निकासी की आस में देर शाम तक बैठे रहे। लोगों का कहना है कि आए दिन इस बैंक के कर्मचारी लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं।

पैसा नही मिलने से कर्ज व धान बेचकर की अंतिम संस्कार…

कैश की किल्लत अब मानवीय संवेदनाओं पर भी भारी पड़ने लगी है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि एक युवक की मां के निधन पर उसे अंतिम संस्कार के लिए इस बैंक से पैसा नहीं मिला। बैंक कर्मचारियों ने उससे दूसरे दिन आने की बात कही। बैंक ने नहीं दिए पैसे तो धान बेचकर मां का अंतिम संस्कार करना पड़ा। उसकी मां देहांत हो गया था इसके बाद भी कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा और उसे बिना पैसे दिए वापस कर दिया गया। इसके बाद एक साथी से कुछ रुपये उधार लेकर व घर में रखा धान बेचकर मां का अंतिम संस्कार किया।

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