मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने दिए आदेश….

रामानुजगंज(पृथ्वलाल केशरी) मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में रामानुजगंज जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 2 में कार्यरत एसडीओ एवं इंजीनियर के द्वारा बिना कार्य कराए दो करोड़ से अधिक शासकीय राशि का भुगतान कर दिया गया था जिसको लेकर न्यायालय में एक परिवाद प्रस्तुत किया गया था जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायधीश ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सात दिवस के अंदर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच उपरांत अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश पारित किया गया है। अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता डी.के.सोनी के द्वारा संबंधित विभाग में एसडीओ राजेंद्र प्रसाद सिंह एवं इंजीनियर सुजीत कुमार गुप्ता के द्वारा बिना कार्य कराए 2 करोड़ रुपए से ऊपर शासकीय राशि का

भुगतान कर दिया गया था। जिसकी शिकायत रामानुजगज थाने में 6 जून 2022 को संपूर्ण दस्तावेज के साथ की गई थी जिसमें उल्लेख किया गया था कि 220:56 लाख रुपए का भुगतान जल संसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उप संभाग रामानुजगंज के तत्कालीन प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी राजेंद्र प्रसाद सिंह एवं उप अभियंता सुजीत कुमार गुप्ता के द्वारा कार्य का भुगतान किया गया है। सूची में दिए गए कार्यों के कार्य स्थल का निरीक्षण कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग क्रमांक 2 रामानुजगंज के द्वारा किया गया जिससे ज्ञात हुआ कि वर्ष 2021-22 के दौरान कराए गए सर्वेक्षण का कार्य फर्जी और गुणवत्ता विहीन है। कार्यस्थल पर किसी भी तरह का कोई चिन्ह नहीं है। केवल अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंता द्वारा कागजों में फर्जी तरीके से कार्य अंकित कर संबंधित एजेंसियों के नाम पर फर्जी भुगतान कराया गया है जो एक अपराधिक कृत्य है तथा फर्जी तरीके से सर्वे कर राशि आहरण करने के संबंध में कार्यालय कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग क्रमांक 2 रामानुजगंज के द्वारा प्रमुख अभियंता(डाटा सेंटर) जल संसाधन विभाग शिवनाथ भवन नया रायपुर अटल नगर नया रायपुर को 11मई 2022 को पत्र लिखकर भुगतान किए गए शासकीय राशि की वसूली करने का निवेदन किया गया था।

             उक्त दोनों अधिकारी कर्मचारी के द्वारा संयुक्त रूप से षड्यंत्र पूर्वक शासकीय राशि का फर्जी दस्तावेज के सहारे आहरण कराया गया है जिसमें दोनों अधिकारियों के अलावा अन्य लोग जिसको राशि भुगतान की गई है तथा उक्त राशि का चेक जिसके नाम से काटा गया वह भी अपराध में शामिल है क्योंकि बिना सर्वे का कार्य कराएं सूची के अनुसार दो करोड़ से ज्यादा की राशि का भुगतान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कर दिया गया है जो कि एक अपराधिक कृत्य है। उक्त दोनों अधिकारियों के द्वारा शासकीय राशि का गबन करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने एवं कूट रचना करने के संबंध में अपराध पंजीबद्ध किया जाना आवश्यक है। वहीं पुलिस अधीक्षक बलरामपुर को 21 जून 20 22 को प्रथम सूचना पत्र प्रस्तुत किया गया था लेकिन उन आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। तत्पश्चात उक्त मामले को रामानुजगंज मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में धारा 156(3)का परिवाद पेश किया गया है। उक्त प्रकरण में सुनवाई करते हुए न्यायधीश पंकज आलोक तिर्की ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सात दिवस के अंदर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच उपरांत अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने हेतु आदेश पारित किया गया है। अब देखना है की कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही कर रही है या उनका साथ दे रही हैं, डीके सोनी ने बताया कि अगर कोर्ट के आदेश का पालन पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी रामानुजगंज के द्वारा नही किया जाता है तो उनके विरुद्ध न्यायलय अवमानना का आवेदन पेश करुंगा।

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