हाथियों द्वारा शव को घेरे जाने से नहीं हो सका पीएम, रायपुर से पहुंची विशेषज्ञों की टीम
अंबिकापुर. सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र मंगलवार की सुबह एक गर्भवत हथिनी का शव मिला था। इस घटना को बीते 24 घंटे भी नहीं हुए कि बुधवार की सुबह घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर इसी दल की एक और हथिनी का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। इस हथिनी की मौत किस कारण से हुई है, फिलहाल इसका पता नहीं चल सका है। ग्रामीणों की सूचना पर वन अमला गांव में तो पहुंचा लेकिन प्यारे दल के हाथियों द्वारा दिन भर शव को घेरे रखे जाने से कोई भी मौके पर जाने की हि मत नहीं जुटा पाया व शव का पीएम नहीं हो सका। वहीं दो दिन के भीतर दो हथिनियों की मौत से विभाग में हडक़ंप मचा हुआ है, इसका कारण जानने रायपुर से विशेषज्ञों की टीम पहुंच गई है।
प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत गणेशपुर क्षेत्र में बुधवार को 24 घंटे के भीतर 2 हाथियों की मौत का मामला सामने आया है। गणेशपुर बांध से लगे चिटकाबहरा जंगल में एक और हथिनी का शव ग्रामीणों ने देखा। उन्होंने इसकी सूचना तत्काल वन वि ााग प्रतापपुर को दी। ताया जा रहा है कि जिस पोजिशन में हथिनी का शव मिला था, उसी स्थिति में इस हथिनी का शव भी पाया गया है। हथिनी की मौत किस कारण से हुई है इसका पता नहीं चल सका है। प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में लगातार हो रही हाथियों की मौत ने सबके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। केरल में भूखी हथिनी को मार दिए जाने से पूरा देश उबल पड़ा था। ऐसे में यहां हो रही हाथियों की मौत भी गंभीर चिंता का विषय है। गौरतलब है कि 8 जून की सुबह गणेशपुर जंगल में मृत मिली हथिनी गर्भवती तो थी ही, वह लिवर की गंभीर बीमारी से भी पीडि़त थी। पीएम के दौरान उसके लिवर से करीब 150 सिस्ट निकले थे। वहीं उसके लिवर का साइज भी काफी बढ़ चुका था। उसके गर्भ में पूर्ण विकसित शावक भी था। डॉक्टरों के अनुसार प्रसव पीड़ा से तड़पकर उसकी मौत हुई थी।
आसपास घूमता रहा हाथियों का दल
बुधवार को हथिनी का शव जहां मिला, उसके आसपास प्यारे दल के हाथी दिन भर घूमते रहे। उन्होंने शव को घेरे रखा था, इसकी वजह से वन अमला मौके पर जाने की हि मत नहीं जुटा सका। इस कारण से शव का पीएम भी नहीं हो सका। वहीं जिस पोजिशन में हथिनी की मौत हुई, उसी हालत में अब एक और हथिनी का शव मिलने से यह सवाल उठ रहा है कि कहीं यह भी लिवर की बीमारी से तो पीडि़त नहीं थी। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के जंगल में यदि काफी दूषित पानी है तो इस पानी को पीने से लिवर की बीमारी हो सकती है।

रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ
दो दिन के भीतर प्यारे दल के दो हथिनियों के शव मिलने से वन विभाग में हडक़ंप मचा हुआ है। अब मौत का कारण जानने रायपुर से विशेषज्ञों को बुलाया गया है। रायपुर से एडिशनल पीसीसीएफ अरूण पांडे व दो डॉक्टर्स की टीम पहुंच गई है। अब गुरूवार को हाथियों के शव के पास हटने के बाद पीएम करने के साथ ही विशेषज्ञ मौत के कारण जानने की भी कोशिश करेंगे।

वन विभाग की गंभीर लापरवाही आ रही सामने
हाथियों की लगातार हो रही मौत ने शासन-प्रशासन को भी सोचने पर विवश कर दिया है। शासन स्तर से हाथियों की देख-रेख के लिए करोड़ों रुपए वन विभाग को दिए जा रहे हैं, इसके बावजूद वन अधिकारी चैन की बंशी बजा रहे हैं। गर्भवती हथिनी को यदि लिवर की बीमारी थी तो इसका पता कैसे जि मेदारों को नहीं चला। यदि आज मृत मिली हथिनी के पीएम रिपोर्ट में भी लिवर की बीमारी का खुलासा होता है तो इनकी मौत का जि मेदार कौन होगा? यदि क्षेत्र में दूषित पानी है तो वन परिक्षेत्र में लगातार गश्त का दावा करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को पता कैसे नहीं चला।

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