झांसी जिले में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढ निकाला है, जिसकी हत्या कर लाश को गायब करने के आरोप में फतेहपर जिला कोतवाली में 4 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज था. जबकि मृतक व्यक्ति झांसी में जिंदा मिला है. दरअसल, आरोपी झांसी के नई बस्ती मोहल्ले में छुपकर रह रहा था. जिंदा मिले शख्स की मां ने उसकी पत्नी, बेटा, साली और सास पर हत्या का केस दर्ज करा दिया था. एक साल बाद बेटे को पता चला कि उसका पिता जिंदा है.

वहीं, इस मामले में वह और उसकी मां, मौसी के अलावा उसकी नानी पर कोर्ट के आदेश पर हत्या का केस दर्ज है. ऐसे में पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है. इसी दौरान बेटे को पता चला कि उसका पिता झांसी में रह कर जोमेटो कंपनी में काम कर रहा है. जहां बेटे ने झांसी कोतवाली पुलिस को सूचना देकर पकड़वा दिया. इस दौरान झांसी पुलिस ने ज़ियाउर्रहमान को गिरफ्तार करके मामले की जांच-पड़ताल शुरु कर दी है.

जानिए क्या हैं पूरा मामला?
बता दें कि, बीते एक साल पहले जिस ज़ियाउर्रहमान की हत्या हो गई थी. वह जिंदा झांसी के कोतवाली इलाके में मिला है. जहां एक साल पहले ज़ियाउर्रहमान की मां सायरा बेगम ने फतेहपुर में मुकदमा दर्ज कराया था कि उनका बेटा ज़ियाउर्रहमान लापता है. उसकी हत्या कर कर दी गई है, उसका शव नदी में फेंक दिया गया है, इसके बाद से ज़ियाउर्रहमान की तलाश फतेहपुर पुलिस को थी. वहीं, उन्नाव से आए ज़ियाउर्रहमान के बेटे अजीम खान ने झांसी के कोतवाली में उसकी पहचान कर ली और पुलिस उसे कोतवाली ले कर आ गई.

पुलिस की पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
ज़ियाउर्रहमान ने कोतवाली पहुंचकर पुलिस को बताया कि उसकी शादी साल 2002 में सोफिया खान के साथ हुई थी. जहां 5 साल पहले सोफिया ने ज़ियाउर्रहमान पर उन्नाव में रहने का दबाव बनाया और ना मानने पर सोफिया की ओर से ज़ियाउर्रहमान के खिलाफ दहेज का मुकदमा दर्ज कराया गया. उसके बाद हरजा-खर्चा का मुकदमा अलग से दर्ज कराया गया. इन सब बातों से परेशान होकर ज़ियाउर्रहमान ने फतेहपुर छोड़ दिया, उसके बाद वह बेंगलुरु गया और बाद में झांसी आकर जोमैटो में काम करने लगा और यहां पर रह रहा था. जबकि, ज़ियाउर्रहमान की लापता और हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए फतेहपुर पुलिस उसको ढूंढ रही थी.

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