कुत्तों के बधियाकरण को साकार करने की उठी मांग
अंबिकापुर। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। आदमी ही नहीं मवेशी भी इनसे सुरक्षित नहीं हैं। बच्चों के लिए ये कुत्ते और भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। नगर निगम के द्वारा आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की कई बार योजना बनाई गई लेकिन यह फ्लॉप ही साबित हुई है। हाल में कुत्तों ने गाय के बछड़ों को बुरी तरह से जख्मी कर दिया। गौ सेवा मण्डल ने रेस्क्यू कर दो दिन में तीन ऐसे गाय के बच्चों का उपचार कराया, जिनको कुत्तों ने पूरी तरह से नोच डाला था। निगम प्रशासन को इस ओर ध्यान देने और कुत्तों के बधियाकरण योजना को साकार करने की जरूरत है। लोगों का कहना है कि शहर के कुछ ऐसे स्थल हैं जहां काफी संख्या में आवारा कुत्ते जमा रहते हैं, जो कब किसके लिए मुसीबत बन जाएंगे कहना मुश्किल रहता है। वाहन चालकों को अचानक दौड़ाने से खतरे की स्थिति बन जाती है। बकरी, गाय व बछड़ों को देख ये कुत्ते उन पर टूट पड़ते हैं। गौ सेवा मंडल ने तीन दिनों में पांच ऐसे जख्मी गाय के बछड़ों का उपचार कराने की कोशिश की, जिन्हें कुत्तों के झुंड ने नोच डाला था। गौ सेवा मंडल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुत्ते भी बेजुबान हैं। लेकिन शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इनके बधियाकरण के पहल की जरूरत है। अपनी भूख मिटाने के लिए मवेशियों ही नहीं इंसानों पर भी झपट पड़ते हैं। गौ सेवा मंडल सरगुजा सभी जीवों की रक्षा करता है, चाहे वह कुत्ता हो या बिल्ली, बकरी, गाय खरगोश। सभी जीव समान हैं, परन्तु कुत्तों के हमले से मवेशियों, इंसानों को पहुंचने वाली क्षति, रैबीज का खतरा चिंतनीय है। गौ सेवा मंडल ने निगम व प्रशासन से मांग की है कुत्तों के बधियाकरण योजना को साकार किया जाए, ताकि इनकी संख्या पर रोक लगे। कई बार कुत्ते के बच्चे भी किसी गाड़ी के चपेट में आ जाते हैं, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी यह पहल जरूरी है।

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