अंबिकापुर। स्कूल से घर लौटे बालक ने चाचा को पेट में दर्द होने की जानकारी दी। तकलीफ देख उसे स्वजन सीतापुर स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लाकर भर्ती कराया गया था, यहां तीन दिन बाद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पूछताछ में बालक ने बेर और स्कूल से मध्यान्ह भोजन खाकर आने की जानकारी दी थी।
जानकारी के मुताबिक सीतापुर थाना क्षेत्र के अखरापारा सहनपुर का आयुष लकड़ा पिता नागेंद्र लकड़ा 12 वर्ष अपने चाचा के यहां रहकर पढ़ाई करता था। बच्चे के पिता बाहर काम करते हैं। 26 मार्च को वह स्कूल गया और जल्दी ही घर वापस लौट आया। बच्चे के चाचा अजय लकड़ा ने आयुष के जल्दी घर लौटने पर उसे टमाटर के खेत में पानी पटाने के लिए साथ में चलने कहा। मिट्टी तेल नहीं होने के कारण पंप स्टार्ट नहीं हुआ। इसके बाद अजय लकड़ा और आयुष गन्ने के खेत में पानी पटाने के लिए चले गए। यहां आयुष ने अपने चाचा को पेट में असहनीय दर्द होने की जानकारी दी। इसके बाद वे उसे अस्पताल लेकर गए, यहां चिकित्सक ने उसे भर्ती करने की सलाह दी। खान-पान के बारे में पूछने पर बालक ने तीन-चार बेर का फल और स्कूल में मध्यान्ह भोजन करने की जानकारी दी थी। बच्चे की तबीयत खराब देख उसे बेहतर जांच व उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर ले जाने की सलाह दी गई। यहां उसका उपचार चल रहा था, इसी बीच बुधवार को अलसुबह साढ़े तीन बजे उसकी मौत हो गई। संदेह पर पुलिस ने मर्ग कायम कर बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया है।

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