सभी को सुरक्षित तरीके से उतार कर किया गया सेनिटाइज
अंबिकापुर। श्रमिकों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रैन मंगलवार को अंबिकापुर रेलवे स्टेशन पहुंची। जिला प्रशासन द्वारा पहले से ही श्रमिकों को लेकर सारी व्यवस्था की गई थी। ट्रैन के पहुंचते ही दो-दो बोगियों के श्रमिकों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए उतारा गया। इसके बाद उनका पंजीयन करने के बाद संबंधित जिले के अधिकारियों के सुपूर्द कर दिया गया। सभी श्रमिकों का मेडिकल टीम द्वारा स्क्रेनिंग कर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
सरगुजा संभाग के सभी जिले के ५२७ श्रमिकों को केरल के तिरुवन्तपुरम से लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रैन अंबिकापुर पहुंची। तिरुवन्तपुरम से जब यह ट्रैन निकली थी तो इसमें प्रदेश के विभिन्न जिले के १२०० से अधिक यात्री सवार थे, जिन्हें दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर में उतारने के बाद मंगलवार को अंबिकापुर पहुंची। पहले से तैनात रेलवे व प्रशासन की टीम द्वारा नियमों का पालन कराते हुए पहले ट्रैन से सभी श्रमिकों को उतारा गया। इसके बाद उन्हें सोशल डिस्टेंश का पालन कराते हुए स्टेशन के बाहर ले जाया गया। जहां उनके जिले के अनुसार पंजीयन किया गया। इसके बाद जशपुर के ४५८ श्रमिक, बलरामपुर के ७७ श्रमिक, सरगुजा से १०, सूरजपुर से १ व कोरिया के १ श्रमिक को वहां उपस्थित उनके जिले के अधिकारियों के सुपूर्द कर दिया गया। सोशल डिस्टेशिंग के नियमों का पालन कराते हुए ट्रैन पहुंचने के बाद रेलवे पुलिस द्वारा दो-दो बोगियों से श्रमिकों को उतारने की व्यवस्था की गई। इसके बाद उन्हें बाहर ले जाया गया, जहां लाइन से उन्हें स्टेशन के बाहर उतारा गया। इस दौरान सभी का सेनेटाईजेशन किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया परीक्षण
श्रमिकों के पहुंचने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग का अमला वहां मौजूद था। पीपीई कीट में तैनात चिकित्सकों द्वारा सभी श्रमिकों का स्क्रेनिंग करने के बाद व उनका तापमान लेने के बाद उन्हें उनके जिले के लिए रवाना किया गया।

पूरा डिटेल किया गया दर्ज
स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद सभी श्रमिकों का पूरी ट्रैवलिंग हिस्ट्री दर्ज की गई। उनकी विस्तृत जानकारी पंजीयन करने के बाद उन्हें संबंधित जिले के अनुसार बसों में बैठाया गया। इसके बाद उन्हें बसों के माध्यम से रवाना किया गया।

नहीं लगा टिकट किराया
श्रमिकों ने बताया कि उनका ट्रैन में कोई किराया नहीं लगा। हालांकि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अपने-अपने अंश की राशि पहले ही रेलवे को जमा करा दिया गया था।

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