ग्राम पंचायतों को फर्जी ओडीएफ घोषित किए जाने शिकायत के बाद जिला पंचायत सीईओ ने पंचायतों से हितग्राही साथ शौचालय का फोटो मंगवाया

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विकाश केशरी – रामानुजगंज – जनपद पंचायत रामचंद्रपुर विकासखंड के 82 ग्राम पंचायतों को फर्जी ओडीएफ घोषित किए जाने एवं हजारों शौचालय आज भी नही बना पैसा आहरित कर लेने की लगातार आती शिकायतों के बीच जिला पंचायत सीईओ के कड़े रुख के बाद पंचायतों में हड़कंप है जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों से हितग्राही साथ शौचालय का फोटो मंगवाया है।
गौरतलब है कि रामचंद्रपुर विकासखंड को शासन से झूठा तमगा दिलाने के लिए फर्जी रूप से विकासखंड के 82 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया जब पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया जा रहा था तब गांव गांव में विरोध के जबरदस्त स्वर उठे थे जो राजधानी तक भी पहुंची थी परंतु तत्कालीन जनपद के अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा एवं पंचायत के द्वारा भी ग्रामीणों को यह आश्वासन दिया गया कि शासन का दबाव है अभी ओडीएफ घोषित कर लिए जाने दीजिए बाद में आप सभी का शौचालय पूर्ण कर लिया जाएगा परंतु विकासखंड के ओडीएफ घोषित होने के 3 वर्ष बाद भी आज भी हजारों शौचालय अधूरे हैं एवं जो शौचालय बने भी थे वह बनने के 1 माह के अंदर ही धराशाई होना प्रारंभ हो गए थे आज स्थिति ऐसी है की अधिकांश शौचालय उपयोग के लायक बचे ही नहीं। रामचंद्रपुर विकासखंड की फर्जी ओडीएफ घोषित किए जाने की कई शिकायतें जिला पंचायत तक भी गई जिसके बाद जिला पंचायत सीईओ के द्वारा सभी ग्राम पंचायत को आदेशित किया गया है कि हितग्राहियों के साथ शौचालय की फोटो जमा करें जिला पंचायत सीईओ के इस आदेश के बाद पंचायतों के हाथ पैर फूलना प्रारंभ हो गए हैं क्योंकि जो शौचालय बने हैं वह तो करीब-करीब सभी टूटने के कगार पर आ गए हैं वही जो शौचालय बनी ही नहीं उसका फोटो हितग्राही के साथ कैसे देंगे। सभी पंचायत अब इससे बचने के लिए अपना जुगाड़ लगाने में लगे है।

तत्कालिक तकनीकी सहायकों की भूमिका भी संदिग्ध- रामचंद्रपुर विकासखंड में शौचालय के निर्माण में हुए महा घोटाले में पंचायतों के साथ साथ तत्कालिक तकनीकी सहायकों की भूमिका संदिग्ध है। जनपद कर्मियों, तकनीकी सहायकों के सह पर ही पंचायतों द्वारा इतने बड़े स्तर पर शौचालयों में घोटाला किया गया।

मटेरियल के नाम पर किया गया सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार- तत्कालिक तकनीकी सहायकों जनपद कर्मियों के सह पर करीब करीब सभी पंचायतों में मटेरियल के नाम पर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किया गया शौचालयों में अत्यंत गुणवत्ता विहीन मटेरियल लगाए गए वही बाजार मूल्य से अधिक दर पर भुगतान फर्जी रूप से किया गया।

जांच में भी घोटाला- जब रामचंद्रपुर विकासखंड को ओडीएफ घोषित गया जिसके बाद गांव गांव से शौचालयों की शिकायत की अंबार लग गई परंतु जांच के नाम पर भी घोटाला किया गया। आज तक किसी भी पंचायत का घोटाला का सच सामने नहीं आ सका।

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