मनेन्द्रगढ। आजादी के 75 सालों के बाद भी हिंदी देश की राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी यह केवल केंद्र सरकार एवं प्रशासनिक अमलों की असफलता नहीं ब ल्कि हम सबकी असफलता की ओर इशारा करती है- उक्त आशय के विचार राष्ट्रभाषा हिंदी दिवस के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं राज्य पाठ्यक्रम निर्माण समिति के सदस्य सतीश उपाध्याय ने व्यक्त किया। भाषा को देश के संस्कार और संस्कृति से जोड़ते हुए उपाध्याय ने कहा कि ‘ देश की राजभाषा हिंदी संपर्क या संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि इसमे देश की संस्कृति और सभ्यता का दर्शन भी होते है।
भाषा पाठ के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद छत्तीसगढ़ की हिंदी पाठ्य पुस्तक के संबंध में उन्होंने कहा कि’ -यह प्रसन्नता की बात है कि- कोरिया जिले से राष्ट्रभाषा के परिदृश्य में एवं भाषा विकास के लिए मुझे लेखन एवं पाठ निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ। जिसमें वर्तमान में प्रचलित स्कूल शिक्षा विभाग की कक्षा नौवीं एवं दसवीं हिंदी पाठ्य पुस्तक में स्कूली छात्रों में राष्ट्रभाषा के हिंदी के प्रति रुचि पैदा करने एवःउनकी रचनात्मकता क्षमता को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम का निर्माण किया गया है। हिंदी के पाठ पुस्तक निर्माण के समय यह भी ध्यान रखा गया है कि- बच्चों में साहित्यिक विधाओं की समझ विकसित हो । पाठ्यक्रम के अंतर्गत बच्चे कविता जीवनी निबंध आत्मकथा बैंक रेखाचित्र एवं लघु कथा से परिचित हो सकें। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के द्वारा प्रचलित वर्तमान कक्षा नवमी एवं दसवीं की हिंदी के पाठ्यक्रम में पाठ्यक्रम निर्माण में सहयोगी वरिष्ठ साहित्यकार लेखक सतीश उपाध्याय ने हिंदी की विविध विशेषताओं की चर्चा करते हुए कहा कि -भाषा के माध्यम से हम देश के सांस्कृतिक परिवेश से भी एवं उसकी पृष्ठभूमि से भी परिचित करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी पाठ्यक्रम के द्वारा शिक्षार्थियों की अध्ययन प्रवृत्ति एवं उनके जीवन मूल्यों को भी बढ़ाया जा सकता है। कक्षा नवमी एवं दसवीं के प्रचलित हिंदी पाठ्यक्रम जो स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किया गया है उसमे विविध प्रश्न भी दिए गए है।
इन प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों के मूल्यांकन के साथ हिंदी के प्रचार प्रसार एवं उनकी अभिरुचि को बढ़ाने का प्रयास किया गया है। पाठ्य पुस्तक निर्माण समिति लेखन समूह के सदस्य श्री उपाध्याय ने हिंदी पाठ्यपुस्तक के निर्माण के चयन एवं प्रस्तुति पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि हिंदी भाषा साहित्य को समझने के लिए यह जरूरी है कि पाठ्यक्रम को सरस एवं उद्देश्य पूर्ण बनाया जाए एवं छात्रों को भविष्य निर्माण के लिए आगे बढ़ने के लिए उनके जीवन के क्षेत्र में भाषा साहित्य काम आए। श्री उपाध्याय ने आशा व्यक्त किया वर्तमान में प्रचलित स्कूल शिक्षा विभाग की हिंदी पाठ्य पुस्तक क्षेत्रों में सोच विचार विमर्श एवं अभिव्यक्ति के नए अवसर मिल रहेहै। इस पाठ पुस्तक से विद्यार्थियों की भाषा एवं साहित्य कृतियों के विकास की दृष्टि से यह पाठ पुस्तक काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है। पाठ्य पुस्तक के संबंध में जानकारी देते हुए सतीश उपाध्याय ने बताया कि- हिंदी पाठ्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को प्रकृति एवं पर्यावरण, समसामयिक मुद्दे, मानवीय अनुभूतियों ,छत्तीसगढ़ कला संस्कृति एवं व्यक्तित्व , छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य जीवन दर्शन ,एवं विविध व्यक्तित्व से व्यक्तित्व एवं उनके कृतियों से परिचय कराया जा रहा है। शैक्षिक अनुसंधान परिषद ने पाठ्यक्रम को डिजिटल बनाने हेतु क्यू आर कोड का भी अंकन किया है। वर्तमान में प्रचलित स्कूली हिंदी कक्षा नवमी एवं 10वी की मुद्रित पुस्तकों की संख्या 1लाखसे अधिक मुद्रित किया गया है। जिसके माध्यम से बच्चे राष्ट्रभाषा हिंदी को आत्मसात करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ज्ञातव्य है कि हिंदी छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के प्रकाशन में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल में प्रचलित कक्षा नौवीं एवं दसवीं के पाठ पुस्तक लेखन समूह में सतीश उपाध्याय ने भी लेखन एवं संपादन का कार्य किया है। एवं राष्ट्रभाषा हिंदी के विकास के लिए पिछले तीन दशकों से साहित्य सृजन कर रहे हैं ।

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