IAS अनिल टुटेजा को हाई कोर्ट से मिली अग्रिम ज़मानत के मुख्य आधार

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) राशन घोटाले में आरोपी बनाए गए आईएएस अफसर अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट ने राहत पहुंचाते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। मामले की सुनवाई कर रही हाईकोर्ट की बैंच ने सोमवार को पूरक चालान पेश किए जाने पर उन्हें अग्रिम जमानत दी है।
मामले में पेश किए गए चालान के साथ शामिल एफआईआर की कॉपी में अनिल टुटेजा का नाम न होने के बाद उन्हें यह राहत दी गई है। छत्तीसगढ़ राज्य के नागरिक आपूर्ति निगम में 63 हजार करोड़ स्र्पये का यह कथित घोटाला साल 2015 में सामने आया था। मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने नागरिक आपूर्ति निगम के कुछ बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के विभिन्न् ठिकानों पर छापेमारी की।
इस छापेमारी में करोड़ों रुपये, डायरी, कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज, हार्ड डिस्क और डायरी भी जब्त की गई थी। इस मामले में नागरिक आपूर्ति निगम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया था। पिछली सरकार के कार्यकाल में इस मामले की जांच की क्लोजर रिपोर्ट जमा कर जांच बंद कर दी गई थी। सत्ता परिवर्तन के बाद एसआईटी का गठन कर मामले की दोबारा जांच कराई जा रही है।

ज़मानत के मुख्य आधार :

  1. टुटेजा के ख़िलाफ़ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है I ( No Direct Evidence )
  2. कोई आय से अधिक सम्पत्ति का मामला नहीं I ( No Case of Disproportionate Asset )
  3. एक रुपए की भी बरामदगी नहीं I ( Case of Zero Recovery )
  4. केंद्र सरकार से जून 2016 में अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने के 30 महीने तक चालान पेश नहीं पेश किया गया और अचानक से चुनाव के परिणाम के ठीक 5 दिन पहले चालान पेश किया गया I
  5. मात्र 8 माह का कार्यकाल, जिसमें ना तो कभी खराब चावल लिया गया और ना ही सरकार को कोई क्षति पहुँची I
  6. जब किसी को अपनी पूर्ण जाँच के दौरान गिरफ़्तार नहीं किया गया तो अब जाँच होने के और चालान पेश होने के 4 साल बाद गिरफ़्तार करने का कोई कारण नहीं बनता I
  7. पूर्व जाँच ही एक विवादास्पद स्थिति में खड़ी है, जिसमें की पूरी जाँच का मक़सद किसी को फँसाना और किसी को बचाना था I
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