0कार्रवाई को लोगो ने कहा प्रशासनिक आतंकवाद

सूरजपुर । कोरिया जिले में सुर्खियां बटरोने के बाद यहां तबादले पर आईं एक महिला तहसीलदार के खिलाफ सोशल मीडिया में लोगो ने मोर्चा खोल दिया है। यह मोर्चा गुरुवार को एक निजी क्लिनिक पर जबरन की गई कार्रवाई के खिलाफ खोला गया है।जिसमे उन्होंने निजी क्लिनिक पर शोसल डिस्टेंसिंग का पालन नही करने का मामला बताते हुए 15 हजार रुपए जुर्माने की कार्रवाई की है। इसके विरोध में क्लिनिक संचालक ने आज अपनी क्लिनिक बन्द करने सम्बंधित पोस्ट सोशल मीडिया में डाली और क्लिनिक के सामने उक्ताशय की सूचना चस्पा कर इलाज नही करने बात कही है उसके बाद से सोशल मीडिया सहित आम लोगो ने तल्ख प्रतिक्रिया देते हुए इस कार्रवाई का विरोध किया है।लोगो ने इसे प्रशासनिक आतंकवाद तक करार दे दिया है यहां तक कि उक्त तहसीलदार के कोरिया में लगे आरोपो से सम्बंधित खबरों को भी नए सिरे से पोस्ट कर सामने लाया है।लोगो का कहना है कि प्रशासन जिले में इलाज का मुकम्मल इंतजाम कर नही पा रहा है कोविड अस्पतालों में रोज लोगो की मौत हो रही है। पिछले 24 घण्टे में एक दर्जन से अधिक लोगो ने दम तोड़ दिया जिसमें समय पर इलाज नही मिलने का आरोप लगा रहा है। कोविड अस्पताल की अव्यस्थाओ रोज ब रोज सामने आ रही है जिस पर प्रशासन कुछ कर नही पा रहा है ऐसे मुश्किल वक्त में लोगो की जान बचाने का जब शहर का एक मात्र सहारा बने  ऐसे निजी क्लिनिक पर कार्रवाई किये जाने का मतलब क्या है…?क्या प्रशासन का मकसद यह नही है कि किसी भी सूरत में लोगो की जान बचाई जाए तो उल्टे ऐसा कर रहे लोगो को हतोसहित किया जा रहा है। त्रिपाठी किलनिक के संचालक आनंद मोहन त्रिपाठी ने बताया कि उनके क्लिनिक के बाहर लोगो को आधार बना कर कार्रवाई की गई जबकि उनके परिसर में वे पूरी तरह नियमो का पालन कर रहे है अब कोई बाहर खड़ा है तो वे कैसे जिम्मेदार हो गए…?प्रशासन के इस कार्रवाई से वे आहत है इसलिए लोगो का इलाज करने में खुद को असमर्थ बताते हुए ऐसे पोस्टर चस्पा किया है। आनंद मोहन त्रिपाठी यहां जिला चिकित्सालय में पदस्थ थे पर निजी कारणों से इस्तीफा देकर अपने किलनिक मे सेवाएं दे रहे है। जोगी कांग्रेस के पूर्व नेता पंकज तिवारी ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि प्रशासन को इस मुश्किल के वक्त में लोगो की जान बचाने को प्राथमिकता देना चाहिए न कि इस तरह की जबरन कार्रवाई कर परेशान किया जा रहा है उन्होंने कहा है कि इस पर रोक नही लगा तो वे आंदोलन को विवश होंगे।

Categorized in: