मनेंद्रगढ़। भागलपुर के सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद राहुल रोहिताश्व का जीवन वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं प्रकृति के बचाव के लिए समर्पित है। राहुल रोहिताश्व ने अपने वर्चुअल संदेश में कहा कि- संकटग्रस्त जीवो जैसे गरुड गिद्ध, कीट पतंगों की विभिन्न प्रजातियो पर संकट गहराता जा रहा है ,मेरी कोशिश है कि विभिन्न माध्यमों से प्रकृति के अनमोल उपहारों के रूप में इस जीव जगत में विचरण करने वाले समस्त वन्य प्राणियों का संरक्षण हो ।
विगत दिनों भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में पर्यावरणविद सह डाक टिकट संग्रह कर्ता राहुल ने वन विभाग की ओर से वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे पर अपने डाक टिकटों का प्रदर्शन किया। जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। डाक टिकट संग्रह कर्ता राहुल ने बताया कि विश्व वन्यजीव दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है। डाक टिकट प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश लोगों को अधिक से अधिक वन्य प्राणियों के प्रति उनके मन में संवेदनशीलता जगाना है। उन्होंने कहा अक्टूबर से मार्च महीने के के अंत तक संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप के प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है इन दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण सुरक्षा तथा संवर्धन हेतु विभिन्न माध्यमो से जानकारी देकर इन जीवों को बचाने की अपील की गई। राहुल रोहिताश्व के कार्यों को भागलपुर के डीएफओ डॉ भारत चिंतापल्ली चांद झुनझुनवाला,बी एन एच एस के वैज्ञानिक सुब्रत देवाता, सरदार बिक्रमजीत सिंह पर्यावरणविद राजा बोस सहित अनेक लोगों ने सराहा है।
पर्यावरणविद राहुल ने दुर्लभ डाक टिकट संजो के रखे हैं। डॉ शांति स्वरूप भटनागर ,मेरी क्यूरी ,मेघनाथ शाहा ,अल्बर्ट आइंस्टीन सहित दर्जनों वैज्ञानिक के कार्यों के माध्यम से राहुल ने लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत करते हैं। लहेरी टोला निवासी राहुल रोहिताश्व के पास ऐसे दुर्लभ डाक टिकट का अनोखा संग्रह है जो यह बतलाते हैं कि इन वैज्ञानिकों ने पशु पक्षियों के प्रति अपना जीवन समर्पित कर दिया ।उनके पास 120 देशों के 3 हजार से ज्यादा डाक टिकट जमा है ।28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर पर्यावरणविद राहुल अपनी यह अनोखी डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगाई , और लोगों को वन्य जीवोके प्रति सचेत किया। उन्होंने बतलाया डॉक्टर सी वी रमन पर विभिन्न देशों ने डाक टिकट जारी किया था।

राहुल रोहिताश्व का जीवन

-राहुल के पिता विजय वर्धन सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्होंने कुछ डाक टिकट राहुल को देकर कहा था कि इन टिकटो में भारत और उसकी समृद्ध संस्कृति की झलक है, इसे हमेशा संजोकर रखना इसके बाद वे डाक टिकट एकत्रित करने लगे ।बाद में यह शौक जुनून बन गया आज राहुल के पास भारत सहित अन्य देशों के धर्म संस्कृति सामाजिक और राजनीतिक सहित अन्य अवसरों पर जारी किए जाने वाले डाक टिकट मौजूद हैं पर्यावरणविद और भारतीय खाद्य निगम के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर राहुल रोहिताश्व ने अपने शौक के लिए सगे संबंधियों मित्रों संस्थाओं से संपर्क साधा उनके पास अभी तक दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण डाक टिकटों का संग्रह है जिसमें भारत के अलावा चीन वर्मा पाकिस्तान नेपाल सऊदी अरब अमेरिका और यूरोप के कई देशों के अति दुर्लभ डाक टिकटों का संग्रह है ।अब यह टिकट आसानी से उपलब्ध नहीं है उनके पास ब्रिटिश भारत से लेकर आधुनिक भारत तक के लगभग 700 शब्दों का संग्रह है फोटोग्राफी एवं बागवानी में रुचि रखने वाले राहुल ने अपने घर के छत पर भी 100 से अधिक गमले लगा रखे हैं। जिसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे भी हैं वह परिंदों की पतंगों तितलियों और विभिन्न वन्यजीवों की फोटो लेकर उनके संरक्षण के प्रति आम लोगों से अपील करते रहते है ।उनका कहना है कि -प्रकृति के रहस्यों को समझना है तो प्रकृति के करीब जाना होगा ।वह वन्य प्राणियों से संबंधित रिसर्च भी कर रहे हैं ।अपने वर्चुअल संदेश में उन्होंने बतलाया कि 20 मार्च को अभी अंतरराष्ट्रीय गौरैया दिवस मनाया गया। नासिक महाराष्ट्र स्थित नेचर फॉरएवर सोसाइटी के अध्यक्ष दिलावर हुसैन जिन्हें -“स्पेरो मेंनऑफ इंडिया “भी कहा जाता है के अथक प्रयासों से सन 2010 से वैश्विक स्तर पर गौरैया दिवस मनाने की शुरुआत हुई ।श्री दिलावर हुसैन का गौरैया संरक्षण स्तर पर उनके इसी भागीरथी प्रयास के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टाइम मैगजीन ने उन्हें सन 2008 का हीरो ऑफ द अर्थ पुरस्कार से सम्मानित भी किया है। गौरैया बिहार तथा दिल्ली की राजकीय पक्षी भी है ।गौरैया के संरक्षण के संबंध में राहुल ने बताया कि पहले जहां गौरैया हमारे घरों के आसपास साधारण रूप से दिख जाती थी पर अब धीरे-धीरे इसका अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है ।अब गौरैया की काफी कम आबादी देखी जा रही है। स्टेट ऑफ इंडिया वर्ल्ड रिपोर्ट 2020 के अनुसार अभी संपूर्ण भारतवर्ष में गौरैया की आबादी स्थिर है, हालांकि बड़े शहरों में पर्याप्त भोजन तथा आवास की कमी के कारण इनकी आबादी में भारी कमी देखी गई है परंतु गांव तथा छोटे शहरों में इनकी संख्या भी स्थिर बनी हुई है। गौरैया की घटती संख्या को ध्यान में रखकर भारतीय डाक विभाग ने भी समय-समय पर डाक टिकट जारी किया है उन्होंने बतलाया कि मेरे निजी संग्रह में विश्व के 18 देशों जैसे भारत क्यूबा नेपाल शारजाह सैलेरिनो कनाडा, हेल्वेटिया जॉर्जिया, डेनमार्क, वेनेज़ुएला , मंगोलिया, पुर्तगाल,स्कॉटलैंड ,रोमानिया कंबोडिया रसिया बेल्जियम तथा बांग्लादेश इत्यादि देशों द्वारा जारी गौरैया के विभिन्न प्रजातियों पर डाक टिकट स्पेशल कवर और बैंकनोट्स का महत्व पूर्ण संग्रह उपलब्ध है।
डाक टिकटों के माध्यम से जल जंगल जमीन एवं वन्यजीवों की वर्तमान स्थिति को जन जन तक पहुंचाने वाले एवं वन्य प्राणियों को संरक्षित करने वाले राहुल रोहिताश्व से सतीश उपाध्याय जिला समन्वयक राष्ट्रीय हरित वाहिनी ने बातचीत कर उन्होंने उन्हें छत्तीसगढ़ आने का आमंत्रण दिया है और उन्होंने यह आमंत्रण स्वीकार कर छत्तीसगढ़ की समृद्ध धरती में मौजूद वन्यजीव पर अध्ययन के लिए अपनी सहमति दी है शीघ्र ही उनका छत्तीसगढ़ प्रवास होगा

Categorized in: