रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम सुभाष नगर के वार्ड क्रमांक 9 में रहने वाले 66 वर्षीय राजेंद्र माझी को बागवानी लगाने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि अपने घर पर 50 डिसमिल जमीन में करीब डेढ़ सौ से अधिक प्रकार की औषधीय पौधे फूल फल के पौधे तैयार कर दिए हैं। औषधीय पौधों में कई दुर्लभ किस्म के औषधीय पौधे भी हैं वही फूल भी कई दुर्लभ प्रजाति के लगे हुए हैं। जिसे देखने आसपास गांव के लोग तो आते ही हैं वही दूर दूर से भी लोग राजेंद्र माझी के बागवानी देखने आते हैं। वही इन्हें कृषि में विभिन्न प्रकार के आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए भी जाना जाता है।

                                            राजेंद्र माझी ने बताया कि मेरे पिता भी बागवानी घर में लगाए थे जिनसे  मुझे प्रेरणा मिली एवं मैंने आज डेढ़ सौ किस में से अधिक औषधीय पौधे फल फूल लगाए हैं। श्री माझी ने बताया कि दो दशक के मेहनत के बाद मेरा ऐसा बागवानी तैयार हो पाया है। प्रतिदिन 2 से 3 घंटे सुबह बागवानी में देता हु। श्री माझी ने बताया कि औषधीय पौधे कई प्रकार के बीमारियों में चमत्कारिक लाभ देते हैं ऐसा मैंने खुद प्रयोग करके देखा है एवं दूसरों पर भी प्रयोग किया है। इसलिए मेरा प्रयास रहता है कि बागवानी में अधिक से अधिक औषधीय पौधे लगा सकूं।

जहां जाते हैं पौधे लेकर आते हैं- राजेंद्र माझी बताते हैं कि मैं जहां भी जाता हूं कुछ लाऊं चाहे न लाऊं पौधे जरूर खोज कर ले आता हूं अभी तक मैंने रायपुर धमतरी अंबिकापुर कोलकाता से कई प्रकार के पौधे लाकर लगा चुका हूं।

कई दुर्लभ प्रकार के भी हैं औषधीय पौधे- राजेंद्र माझी के बागवानी में औषधीय पौधे चलता, अनंमूल, फिलेमवाइन  हड़जोड़वा, मधुगामिनी, गंधराज ,झरबेरा पिपली,चुईझाल,अडूसा,अपराजिता, ब्रह्मकस पाषाणभेद, हेलिफोर्निया, सिंदूरी सहित डेढ़ सौ प्रकार से अधिक के औषधीय पौधे फल फूल लगे हुए हैं।

नौ प्रकार के गुड़हल एवं एक ही आम पेड़ में 5 वैरायटी के फलते हैं आम- राजेंद्र माझी के बागवानी में कई प्रकार की विभिन्नताए हैं जहां 9 प्रकार के गुड़हल है वही एक ही आम के पेड़ में 5 वैरायटी के आम के फल फरते हैं। वही सेवंती गुलाब नींबू की की भी कई प्रजातियां है।

मिल चुका है उन्नत कृषक पुरस्कार-2018 में राजेंद्र माझी को रायपुर में जिला स्तरीय उन्नत कृषक पुरस्कार कृषि धान उत्पादकता के लिए मिला था जिसमें ₹25000 की नगद राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था। एवं कई बार विभिन्न विभागों के द्वारा प्रमाण पत्र मिला है।

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