एनएबीएल के रिपोर्ट पर मरीज नहीं होता है परेशान’

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अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग द्वारा प्रदेश स्तरीय चार दिवसीय एनबीएल कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें मुम्बई की विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. बिन्दु मलकान द्वारा एनएबीएल की तरफ से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दूसरे दिन डॉ. बिन्दु मलकान ने प्रशिक्षार्थियों से कहा कि एनएबीएल भारत सरकार का उपक्रम है जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुणवत्तायुक्त लैब व एनएबीएच हेल्थ के सेक्टर में काम करती है। एनएबीएल के प्रशिक्षण के बाद लैब को अपडेट किया जाता है। चूंकि डॉक्टर मरीजों के जीवन पर काम करते हैं और १०० प्रतिशत रिपोर्ट के आधार पर जीवन को बचाने का काम किया जाता है। किसी भी लैब को एनएबीएल का प्रमाण पत्र तभी मिलेगा, जब वह उसके मानक अनुसार १०० प्रतिशत अपडेट होगा। इसमें दस्तावेज रखने की प्रक्रिया को सीखाया जाता है। प्रशिक्षण के दूसरे दिन डॉ आरसी आर्या, डॉ. आर मूर्ति, डॉ. अलका सिंह, डॉ. विकास पाण्डेय सहित अन्य चिकित्सक व तकनीशियन उपस्थित थे। कोई भी लैब जब एनएबीएल के मानक अनुरूप अपडेट होता है तो उस लैब का राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ता है। इसके साथ ही आम नागरिक का भी भरोसा बढ़ता है। एनएबीएल के तहत जो भी पैथोलॉजी लैब काम करते हैं उनके रिपोर्ट को सभी मानते हैं। इससे बार-बार जांच कराने में आने वाले खर्च बचता है और सबसे अधिक फायदा मरीज को होता है। डॉ. बिन्दु मलकान ने कहा कि एनएबीएल प्रमाणिकता लैब के रिपोर्ट देखने के बाद किसी भी मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर को निर्णय लेना आसान होता है। डॉक्टर मरीज का बेहतर इलाज कर सकता है। एनएबीएल प्रमाण पत्र प्राप्त लैब के रिपोर्ट को लिगल रूप से कोई भी चुनौती नहीं दे सकता है। इसके मानक इतने ऊपर होते हैं कि उसके आधार पर पूरी रिपोर्ट में पारदर्शिता बरती जाती है। क्षेत्र कोई भी हो आने वाले समय में लैब संचालन के लिए एनएबीएल का प्रमाण पत्र लेना अनिर्वाय होगा। इसके लिए क्या उपकरण लगाना है और किस आधार पर रिपोर्ट तैयार करना है उसका निर्धारण एनएबीएल करता है।

सरकार को सभी जगह करना चाहिए अनिवार्य
डॉ. बिन्दु मलकान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सभी लैब के लिए एनएबीएल का प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसे राज्य सरकार को लागू किया जाना है। देश के सभी बड़े शहरो में एनएबीएल के मानक आधार पर लैब का संचालन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार को भी सभी लैब में एनएबीएल अनिवार्य किया जाना चाहिए, इससे मरीज का न केवल रुपए बचता है, बल्कि उसे परेशान भी नहीं होना पड़ता है।
बिना इसके बीमा क्लेम भी नहीं मिलता
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. बिन्दु मलकान ने कहा कि सरकार द्वारा आयुष्मान योजना या फिर निजी बीमा कम्पनी द्वारा किसी भी क्लेम का भुगतान तभी किया जाता है, जब मरीज का इलाज एनएबीएल के मानक अनुरूप रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। अब तक पूरे देश में २५०० एनएबीएल मानक अनुरूप लैब हैं। इसके रिपोर्ट की मान्यता राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है। ई-हैल्थ लागू होने के बाद कोई भी मरीज घर बैठे ही देश व विदेश के डॉक्टरों से अपना इलाज करा सकता है।

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