राजमाता की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, पंचतत्व में हुईं विलीन, बेटे टीएस सिंहदेव ने दी मुखाग्नि, आंखें हुईं नम

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0 सरगुजा रियासत की राजमाता व मध्यप्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री देवेंद्र कुमारी सिंहदेव का रानी तालाब में हुआ अंतिम संस्कार
अंबिकापुर. पूर्व सरगुजा रियासत की राजमाता, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की मां व अविभाजित मध्यप्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री देवेंद्र कुमारी सिंहदेव पंचतत्व में विलीन हो गईं। बेटे टीएस सिंहदेव ने उन्हें नम आंखों से मुखाग्रि दी। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। रानी तालाब में आयोजित राजमाता के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल सबकी आंखें भीग गईं। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह समेत छत्तीसगढ़ का पूरा मंत्रिमंडल, विधायक, अन्य दिग्गज कांग्रेस-भाजपा नेता सहित आम जनता शामिल हुए।
गौरतलब है कि पूर्व सरगुजा रियासत की राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव का लंबी बीमारी के बाद 10 फरवरी की देर शाम दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर बुधवार की दोपहर विशेष विमान से दरिमा एयरपोर्ट लाया गया। यहां से फूलमालाओं से सजे वाहन में राजमाता के पार्थिव शरीर को कोठीघर लाकर विधि विधान से अंतिम स्नान कराया गया। इसके बाद पार्थिव शव रघुनाथ पैलेस में अंतिम दर्शन हेतु रखा गया। राजमाता के अंतिम दर्शन में पैलेस में भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर 3 बजे के बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। अर्थी को कंधा उनके दोनों बेटे टीएस सिंहदेव व अरुणेश्वर शरण सिंहदेव ने दिया। रघुनाथ पैलेस से निकली यात्रा रानी तालाब तक पहुंची। इसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी।


राजकीय सम्मान के साथ दी गई विदान
राजमाता का पार्थिव शरीर का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शाम करीब 5 बजे रानी तालाब परिसर में उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। मुखाग्नि उनके बेटे व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने दी। इस दौरान वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर राजपरिवार से राजमाता के छोटे बेटे अरुणेश्वर शरण सिंहदेव, बेटी आशा सिंहदेव, मंजूश्री आनंद, पोता आदित्येश्वर शरण सिंहदेव, विंध्येश्वर शरण सिंहदेव, शैलेष सिंहदेव, बहू त्रिशाला सिंहदेव, पोती एैश्वर्या सिंहदेव समेत अन्य मौजूद रहे।


एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री भी पहुंचे
राजमाता की अंतिम यात्रा व अंतिम संस्कार कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, स्कूल शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे, नगरीय निकाय मंत्री शिव डहरिया, पीएचई मंत्री गुरु रूद्र, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, आबकारी मंत्री कवासी लखमा, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, विधायक खेलसाय सिंह, सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, मोहन मरकाम, वृहस्पति सिंह, डॉ. प्रीतम राम, चिंतामणि महाराज, शैलेष पांडेय समेत अन्य शामिल हुए।


दिग्विजय बोले- पारिवारिक संबंध हैं
सरगुजा राजपरिवार से उनके काफी घनिष्ठ एवं पारिवारिक संबंध थे। महाराजा एमएस सिंहदेव प्रशासनिक कामों को देखते थे जबकि राजमाता काफी सौम्य व सरल स्वभाव की थीं। नर्मदा आंदोलन में उन्होंने लाठी भी खाई और जेल भी गईं थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे। उनके जाने का मुझे व्यक्तिगत और पारिवारिक तौर पर क्षति हुई है।

मंगलवार को नहीं करती थी यात्रा
राजमाता देवेन्द्र कुमारी पूरी जिंदगी मंगलवार को यात्रा नहीं करती थी। यह उनकी मान्यता थी। इसकी वजह से सोमवार की शाम को उनका निधन होने के बावजूद पार्थिव शरीर को बुधवार को दिल्ली से अंबिकापुर लाया गया। राजमाता के पार्थिव शरीर को उनके छोटे पुत्र अरूणेश्वर शरण सिंहदेव, पुत्री आशा देवी, मंजू श्री व अन्य लोगों ने विशेष प्लेन से लेकर दरिमा पहुंचे।

मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री चले पार्थिव शरीर के पीछे
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के सभी मंत्री व विधायक अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। यह सबसे बड़ी बात थी कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्वविजय सिंहदेव ने टीएस सिंहदेव के साथ राजमाता के अंतिम यात्रा में कंधा दिया। इसके साथ ही प्रदेश का पूरा मंत्री मंडल उनके पीछे-पीछे पैदल चल पड़ा।

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