रविवार को माघ मास की पूर्णिमा, इस तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुननी चाहिए

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रविवार, 9 फरवरी को माघ मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है, इसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है। इस तिथि पर पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। हर माह की पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार सत्यनारायण कथा का मूल संदेश यह है कि हमें कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए, हमेशा सत्य बोलें और अपने संकल्प को पूरा करें। भगवान विष्णु का ही एक स्वरूप सत्यनारायण है। पूर्णिमा तिथि पर विष्णुजी और उनके अवतारों की पूजा खासतौर पर करने की मान्यता है।

स्कंद पुराण में है सत्यनारायण कथा

स्कंद पुराण 18 पुराणों में से एक है। इस पुराण का संबंध स्कंद भगवान से है, इसीलिए इसे स्कंद पुराण कहा जाता है। इस ग्रंथ में सभी विशेष तीर्थ, नदियों की महिमा बताई गई है। इसी पुराण में सभी व्रत-पर्वों की कथाएं भी हैं। स्कंद पुराण के रेखाखंड में सत्यनारायण भगवान की कथा का उल्लेख है। इस कथा में मुख्य रूप से दो विषय हैं। एक है अपने संकल्प को भूलना और दूसरा है प्रसाद का अपमान करना। इस कथा में छोटे-छोटे प्रसंगों के माध्यम से बताया गया है कि हमें हमेशा सच बोलना चाहिए। असत्य बोलने पर हमें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसका मूल संदेश ये है कि झूठ बोलने से और अपने संकल्प को पूरा न करने से भगवान नाराज होते हैं और दंड भी देते हैं। इसीलिए हमेशा सच बोलें।

सत्यनारायण भगवान की पूजा से जुड़ी खास बातें

भगवान विष्णुजी के स्वरूप सत्यनारायण की पूजा में केले के पत्ते, फल, पंचामृत, सुपारी, पान, तिल, कुमकुम, दूर्वा विशेष रूप से रखना चाहिए। पूजा में दूध, शहद, केला, गंगाजल, तुलसी के पत्ते भी रखें। दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर पंचामृत बनाए। सूखे मेवे मिलाकर हलवे का नैवेद्य बनाएं।
भगवान की कथा हम स्वयं भी पढ़ सकते हैं या इस पूजा के लिए किसी ब्राह्मण की मदद भी ले सकते हैं। ब्राह्मण से कथा पाठ कराने पर पूरी पूजा सही विधि से संपन्न होती है और भूल की संभावनाएं बहुत कम होती है। इसीलिए अधिकतर लोग ब्राह्मण से ही अपने घर में कथा का पाठ करवाते हैं।

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