शासन के कड़े रूख के बाद चिकित्सकों ने हड़ताल खत्म करने का लिया निर्णय , लौटे काम पर

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सूरजपुर। शासन प्रशासन के कड़े रूख के बाद अंततः चिकित्सकों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है और सोमवार को चिकित्सकों ने ड्यूटी ज्वाईन कर लिया है। चिकित्सकों के इस फैसले के बाद जहां प्रशासन ने राहत की सांस ली है वहीं चिकित्सक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहें है। बगैर किसी नतीजे के उन्हें काम पर तब वापस लौटना पड़ा है जब पांच चिकित्सकों पर बर्खास्तगी की गाज गिर चुकी है। रविवार को जहां अस्पताल प्रबंधन ने हड़ताल में शामिल डाॅक्टर रोहित पटेल को बर्खास्त कर हड़ताली डाॅक्टरों को बेहद कड़ा संदेश दिया। यही नही अस्पताल प्रबंधन ने तो 13 और डाॅक्टरो की बर्खास्तगी के लिए उनके न्योक्ताओं को पत्र लिख दिया। इससे हड़ताली डाॅक्टरों में हड़कंप मच गया। बताया गया है कि 13 में से 4 डाॅक्टरों को एनआरएचएम द्वारा बर्खास्त कर दिया गया है। जिसमें डाॅ. सीमा गुप्ता, रजनीश गौतम, दीपक ठाकुर, अविनाश सिंह आदि शामिल है। इधर सोमवार को उन दो डाॅक्टरो ने हड़ताल से खुद को अलग करते हुए ज्वाईनिंग दे दी। जिन्हे अस्पताल प्रबंधन ने 24 घंटे की मोहलत दी थी। इनमें श्रृष्टि झारिया व मंगेश चंदेवार शामिल है। दूसरी ओर तमाम उहापोह के बाद अन्य चिकित्सकों ने भी हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया और दोपहर में अस्पताल पहुंचकर ज्वाईनिंग दे दी। फिलहाल ज्वाईन करने वाले डाॅक्टरो में चार बर्खास्त डाॅक्टर भी शामिल है।

ये लौटे काम पर – आज डाॅक्टर दीप कुमार, विजय चैहान, रश्मि कुमार, राजेश कुमार, अजय मरकाम, दीपक जायसवाल, आदित्य राजवाडे, तेरस कवंर, बालकृष्ण तिवारी, प्रियंक पटेल, स्वपनिल गुप्ता, दीपशिखा लकड़ा, सीमा गुप्ता, रजनीश गौतम, श्रृष्टि झारिया, मंगेश चंदेवार, दीपक ठाकुर, महामाया प्रताप सिंह, श्रीपाल सिंह, नीरज पैकरा, राजेश साव, नारद गुप्ता, नंदनी कवंर, साधना सिंह आदि शामिल है। इधर संगठन से जुड़े डाॅक्टरों का कहना है कि वे शासन प्रशासन से यह आग्रह कर रहे है कि जिन पर कार्रवाई की गई है उनकी कार्रवाई वापस ली जाए। इस मसले पर बातचीत की जा रही है। इस मसले पर आगे की रणनीति हेतु संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों से भी चर्चा की जाएगी।

सात डाॅक्टरो का हुआ नुकसान – ज्ञात हो कि डाॅक्टर शासन के द्वारा लिए गए दो पालियों में अस्पताल संचालन के निर्णय के विरोध में यह आंदोलन शुरू किया था। इसके अलावे उनकी नौ सूत्रीय मांगे और है। लेकिन सरकार ने इन डाॅक्टरों की एक नही सुनी उल्टे उन पर कड़ी कार्रवाई कर सबक सिखाने का काम किया। ऐसे में बेवजह सात डाॅक्टरों की बलि चढ़ गई। जिसमें पांच बर्खास्त हो गए। जबकि दो डाॅक्टर विनय गुप्ता, संदीप जायसवाल अम्बिकापुर मेडिकल कालेज अटैच कर दिए गए। जिससे सूरजपुर जिला अस्पताल को भी नुकसान हुआ है।

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