हॉस्टल में पानी के लिए भी मशक्कत, नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने कलक्टोरेट में किया प्रदर्शन

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अंबिकापुर। शासकीय नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल का संचालन पूर्व में तुर्रापानी गांधीनगर में संचालित किया जा रहा था। यहां हॉस्टल सहित सारी सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन एक महीने पूर्व आनन-फानन में हॉस्टल को प्रशासन द्वारा स्थानंतरित कर दिया गया। हॉस्टल को ऐसी जगह स्थानंतरित कर दिया गया, जहां सुविधा के नाम पर न तो ठीक से कमरे हैं और न ही पानी की व्यवस्था है। पानी सहित अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर सोमवार को नर्सिंग कॉलेज प्रथम वर्ष की छात्राओं ने कलक्टोरेट पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। छात्राएं कलक्टोरेट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गईं और उनका एक ही मांग थी, जब तक उनके हॉस्टल में सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती है, वे वहां से नहीं हटेंगी। इधर कलक्टोरेट सभाकक्ष में राज्य निर्वाचन आयुक्त पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक ले रहे थे। इसकी वजह से कलक्टर डॉ. सारांश मित्तर छात्राओं से नहीं मिले, उनके कहने पर एसडीएम अजय त्रिपाठी ने सभाकक्ष से बाहर निकलकर छात्राओं से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद छात्राएं वहीं खड़ी रहीं। तब एसडीएम ने उन्हें कहा कि आप कॉलेज जाएं, वहीं आपसे मिलकर आपकी समस्या का हल निकाला जाएगा। इस दौरान काफी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं प्रदर्शन में शामिल हुर्इं। पहले सभी छात्राओं को बिना किसी शिकायत दिए ही वापस लौटने को कहा। इसके बावजूद डरी-सहमी छात्राओं ने बिना अधिकारियों से मुलाकात किए वापस लौटने से इंकार कर दिया। अधीक्षिका तृप्ति सोनी ने कहा कि कॉलेज में प्रबंधन द्वारा मिनरल वाटर का जार मंगाए जाते हंै और पानी की समस्या के लिए नगर निगम को लिखा गया है, लेकिन टैंकर नहीं दिए जाने से यह समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन नहीं, बल्कि निगम प्रशासन जिम्मेदार है।
हॉस्टल में सुविधाओं का अभाव
छात्राओं का कहना था कि हॉस्टल आनन-फानन में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन जहां स्थानांतरित किया गया, वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। छात्रावास में पानी की व्यवस्था नहीं है। छात्राओं का कहना था कि अपने दैनिक उपयोग के लिए भी हमें पानी बाल्टियों में भरकर ऊपर ले जाना पड़ता था। इसकी वजह से हमें चोटें भी आईं। २० दिसम्बर से हमारी छुट्टियां शुरू हो गईं और कहा गया कि जब हम ५ जनवरी को वापस आएंगे तो पानी की समस्या हल कर दी जाएगी। छुट्टी से जब वापस आए तो पानी की समस्या यथावत बनी रही। यह सिलसिला १४ जनवरी तक चला और बोरवेल भी खराब हो गया। प्रबंधन द्वारा निगम से एक टैंकर मंगवाए जाने का आश्वासन दिया गया। छात्रावास में रहने वाली सभी छात्राओं को प्रथम तल पर पानी भरकर ले जाना पड़ रहा है।
५० बेड के हॉस्टल में १२० छात्राएं
शासकीय नर्सिंग कॉलेज का निर्माण वर्ष २०११ में गंगापुर में सरकार द्वारा कराया जा चुका है, लेकिन इसे मेडिकल कॉलेज को हैंडओवर कर दिया गया है। इसकी वजह से अब नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं को कहीं भी शिफ्ट कर दिया जा रहा है। वर्तमान में छात्राओं को जिस हॉस्टल में शिफ्ट किया गया है वह ५० बेड का है, लेकिन यहां नर्सिंग कॉलेज की १२० छात्राओं को रखा गया है। यहां १२० छात्राओं के लिए ३ शौचालय व ३ यूरिनल हंै। इसकी वजह से भी छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रह

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