स्थानांतरण के बाद भी उसी जगह पर जमे हैं दर्जनों शिक्षक.. कलेक्टर के आदेश का बना मज़ाक.. कार्यवाही ठंडे बस्ते में..

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रामानुजगंज-विकाश केशरी- बलरामपुर- रामानुजगंज जिले के प्रभारी मंत्री उमेश पटेल के अनुमोदन पर कलेक्टर संजीव कुमार झा के द्वारा शिक्षा विभाग के 212 सहायक शिक्षक एलबी एवं 65 शिक्षक एलबी , वहीं सहायक ग्रेड दो एवं तीन का  स्थानांतरण किया गया था परंतु स्थानांतरण  के बाद भी दर्जनों कर्मचारी अपने ही स्थान पर जमे हुए हैं एवं कलेक्टर के आदेश को धत्ता बता रहे हैं वहीं शिक्षा विभाग भी कार्यवाही करने से कतरा रहा है जिससे जो कर्मचारी स्थानांतरण के पश्चात अपनी स्थानांतरित स्थान पर पदभार ग्रहण कर लिया है वह अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।

                             

गौरतलब है कि जिले के प्रभारी मंत्री उमेश पटेल के अनुशंसा पर कलेक्टर के द्वारा 12 जुलाई 2019 को सहायक शिक्षक एलबी शिक्षक एवं सहायक ग्रेड दो एवं तीन का स्थानांतरण किया गया था। सभी कर्मचारियों का स्थानांतरण छत्तीसगढ़ शासन के स्थानांतरण नीति वर्ष 2019 के तहत किया गया था। जिला स्तर पर स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन 30.7. 2019 तक सुनिश्चित किया गया था स्थानांतरण के पश्चात नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि में कार्यभार नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी बात छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा पत्र में कहा गया था। परंतु शासन के आदेश के बाद भी दर्जनों शिक्षक एलबी सहायक शिक्षक एलबी सहायक ग्रेड 2 एवं तीन अपने स्थानों पर जमे हुए हैं एवं कलेक्टर के आदेश को धत्ता बता रहे हैं।

प्रभारी मंत्री के अनुमोदन का नहीं हुआ पालन- जिले के प्रभारी मंत्री उमेश पटेल के अनुमोदन के पश्चात हुए स्थानांतरण के बाद भी शिक्षा विभाग कलेक्टर के आदेश के क्रियान्वयन में विफल साबित हुआ आज भी दर्जनों कर्मचारी अपने मूल स्थानों पर जमे हुए हैं उनके विरुद्ध शिक्षा विभाग कार्यवाही करने से कतरा रहा है।

शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, मनमानी का लग रहा है आरोप- छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा 27.06.2019 को जारी पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर सहायक शिक्षक शिक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में शाला विशेष में शैक्षणिक व्यवस्था को ध्यान रखते हुए स्थानांतरण किया जाएगा शैक्षणिक व्यवस्था से यहां आशय शाला में कक्षा वार विद्यार्थियों की संख्या विषयवार  शिक्षकों की स्वीकृत पदों की संख्या तथा उसके विषयवार  कार्यरत शिक्षकों की संख्या से है। किसी भी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की शालाओं में स्थानांतरण को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। वहीं पत्र में यह भी लिखा गया था कि जिन पदों पर एवं स्थानों पर अधिकारी कर्मचारी का आधिक्य है ऐसे स्थानों में स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाएगा ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। परंतु शिक्षा विभाग के द्वारा स्थानांतरण करने के दौरान इन सब बातों को भुला दिया। इस कारण शिक्षा विभाग पर के कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं एवं मनमानी करने का आरोप लग रहा है।

जिन कर्मचारियों ने किया आदेश का पालन अब वे ठगा महसूस कर रहे हैं- कलेक्टर के आदेश के बाद कई कर्मचारियों के द्वारा कलेक्टर के आदेश का पालन किया गया वहीं दर्जनों कर्मचारी के द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया ना ही उनके विरुद्ध जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा कोई कार्यवाही की गई जिस कारण अब जिन कर्मचारियों के द्वारा आदेश का पालन किया गया था वह अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।

कैसे होगा शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार- एक ओर शिक्षा के स्तर में जिला का क्रम काफी नीचे है वही बेहतर शिक्षण व्यवस्था के लिए प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद कलेक्टर के द्वारा स्थानांतरित किया गया था। परंतु कर्मचारियों के मनमानी से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि कैसे होगा शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार।

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी बी एक्का ने कहा कि स्थानांतरण आदेश के बाद सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को कर्मचारियों को रिलीव करने का निर्देश दिया गया था। श्री एक्का ने कहा कि एक-दो न्यायालयीन प्रकरणों को छोड़ सभी कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया है। यदि कर्मचारियों को रिलीव नहीं किया गया है तो उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

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