रायपुर: महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में सरकारी योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल से संचालित ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कैफे’ महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का नया माध्यम बनकर सामने आया है।आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर, जी.ई. रोड स्थित इस कैफे का संचालन लक्ष्मी सखी स्व-सहायता समूह की संचालक लक्ष्मी यदु कर रही हैं। यहां मिलेट से बने पौष्टिक व्यंजनों के जरिए कारोबार के साथ स्वस्थ खान-पान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

चार महिलाओं को मिला रोजगार

लक्ष्मी यदु के अनुसार, कैफे की शुरुआत 8 अप्रैल 2026 को हुई थी। वर्तमान में यहां चार महिलाएं काम कर रही हैं और कैफे से हर महीने करीब 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।इस पहल ने समूह की महिलाओं को नियमित आय का जरिया देने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान करने का अवसर भी दिया है। महिलाओं के लिए यह सिर्फ काम का साधन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन रहा है।

मेन्यू में मिलेट के कई स्वाद

कैफे में पारंपरिक अनाजों को आधुनिक और स्वादिष्ट व्यंजनों के रूप में परोसा जाता है। यहां रागी चीला, डोसा, इडली, ज्वार मैगी, प्रीमिक्स पराठा, मूंग बड़ा और मिलेट कुकीज जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं।आयुर्वेदिक कॉलेज के विद्यार्थी, मरीज और उनके परिजन यहां आने वाले प्रमुख लोगों में शामिल हैं। पौष्टिक भोजन की उपलब्धता खास तौर पर मरीजों और उनके साथ रहने वाले परिजनों के लिए उपयोगी बताई जा रही है।

रोजगार के साथ सेहत का संदेश

‘लक्ष्मी सखी मिलेट कैफे’ की खासियत यह है कि इसका उद्देश्य केवल महिलाओं को आय का साधन उपलब्ध कराना नहीं है। मिलेट आधारित भोजन के जरिए लोगों को पौष्टिक और संतुलित खान-पान के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है।लक्ष्मी यदु का कहना है कि सरकारी सहयोग ने महिलाओं को केवल रोजगार नहीं दिया, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब खुद कमाई कर रही हैं और अपने परिवारों की आर्थिक मजबूती में भागीदारी निभा रही हैं।इस तरह रायपुर का यह कैफे महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमिता और मिलेट आधारित पोषण को एक साथ आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।