रायपुर : नकटी गांव स्थित ब्लू वाटर खदान में डूबे आदिल का शव आखिरकार करीब 77 घंटे बाद बरामद कर लिया गया। पिछले तीन दिनों से NDRF और SDRF की टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं। लंबे इंतजार के बाद शव पानी की सतह पर दिखाई दिया, जिससे परिजनों की उम्मीदें एक दर्दनाक अंत में बदल गईं।बताया जा रहा है कि पिछली रात शव स्वतः पानी की सतह पर आ गया। आदिल के परिजन लगातार उसके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन शव मिलने के बाद परिवार और इलाके में शोक का माहौल बन गया।
तैरकर दूसरी ओर जाने की शर्त बनी हादसे की वजह
जानकारी के अनुसार, 19 अगस्त की शाम आदिल अपने तीन दोस्तों के साथ ब्लू वाटर खदान क्षेत्र में गया था। वहां दोस्तों के बीच पानी के एक छोर से दूसरे छोर तक तैरकर जाने की शर्त लगी। इसके बाद आदिल और उसका एक साथी पानी में उतरे।तैरते समय आदिल गहरे पानी की ओर चला गया और कुछ ही देर में डूब गया। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। सूचना मिलते ही प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान शुरू कराया।
नेवी की मदद लेने की भी तैयारी थी
आदिल की तलाश के लिए स्थानीय बचाव दलों के साथ NDRF और SDRF की टीमें लगातार अभियान चला रही थीं। पानी की गहराई और खदान की परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय नौसेना से भी मदद मांगी थी। ईस्टर्न कमांड की विशेष टीम के रायपुर पहुंचने की तैयारी के बीच ही रविवार को आदिल का शव बरामद हो गया।
पहले भी जा चुकी हैं कई जानें
ब्लू वाटर खदान में यह पहला हादसा नहीं है। इस क्षेत्र में पहले भी डूबने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले करीब नौ वर्षों में यहां लगभग 10 लोगों की जान जा चुकी है।घटना के बाद एक बार फिर इस खतरनाक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने क्षेत्र को प्रतिबंधित करने और सुरक्षा के लिए फेंसिंग कराए जाने की बात कही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।