किसी ने 4 तो किसी ने 7 दिन से चक्कर काटने की बात कही  

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिये आने वाले मरीजों को लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। कोई 4 दिन से तो कोई 7 दिन से भूखे-प्यासे सोनोग्राफी के लिये चक्कर काट रहा है। इन हालातों के बीच भड़की महिला का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह चार दिन से सोनोग्राफी के लिये अस्पताल आने की बात कहते नजर आ रही है। कई मोबाइल इनका वीडियो बनाने में लगे हैं। वहीं सोनोग्राफी कक्ष से कर्मचारी वीडियो नहीं बनाने और ऊंची आवाज में बात करने से मना करते नजर आ रहा है। इसमें 30 से ज्यादा मरीजों का एक दिन में सोनोग्राफी नहीं होगा, भी सुनने को मिल रहा है।

वायरल वीडियो में जहां एक ओर मरीजों की रोज-रोज सोनोग्राफी जांच के लिये सफर करने की पीड़ा उजागर हो रही है, वहीं सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक इंतजार करने के बाद भी सोनोग्राफी जांच नहीं हो पाने का मलाल इनमें देखने को मिल रहा है। हालांकि मरीजों को असुविधा न हो, इसके लिये रोजाना 30 पर्ची जांच के लिये सुबह 9 बजे ही ले लिया जाता है। इसके बाद बाहर या दूर-दराज के इलाके से आने वाले मरीजों को आने में विलम्ब हो जाता है, और इनकी जांच पर्ची को स्वीकार नहीं करने से विवाद की स्थिति बनती है। इन सबके बीच जिस प्रकार सप्ताह भर से मरीजों को जांच के लिये दौड़ लगाना पड़ रहा है, इससे सोचनीय स्थिति बन रही है। सोनोग्राफी जांच कक्ष के बाहर जांच के लिये लगी भीड़ के बीच से महिला के द्वारा सामने लाई जा रही पीड़ा के बीच एक आवाज सुनने को मिल रही है, 30 से ज्यादा मरीज नहीं देखेंगे, साथ ही अन्य बातें कही जा रही हंै। इसके पीछे एक बड़ा कारण रेडियोलॉजिस्ट की कमी भी है। अस्पताल में सोनोग्राफी के अलावा सीटी स्कैन, एमआरआई की भी सुविधा दी जा रही है, यहां भी रेडियोलॉजिस्ट का रहना जरूरी है, ताकि गंभीर मरीजों का रिपोर्ट समय पर साझा किया जा सके।

सोनोग्राफी के लिए 24 घंटे व्यवस्था जरूरी

मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल के ओपीडी में रोजाना करीब 700 से 800 मरीज पहुंचते हैं, कभी-कभी यह संख्या कम और बढ़ भी जाती है, वहीं लगभग 100़ मरीज भर्ती होते हैं। बताया जा रहा है कि, सोनोग्राफी जांच के लिये यहां सुबह 9 बजे तक 30 मरीजों की पर्ची ले ली जाती है, इसके बाद आने वाले मरीजों को उल्टे पांव वापस लौटना पड़ता है। इन्हें आवश्यक सुझाव देकर अगले दिन समय पर आने के लिये कहा जाता है। इन परिस्थितियों के बीच सोनोग्राफी जांच के लिये महिला के द्वारा 4 से 7 दिन चक्कर काटने और जांच के लिये नम्बर नहीं मिलने की बात कही जा रही है। साधन, संपन्न लोग तो यहां की भीड़ को देखकर निजी जांच सेंटरों की ओर रूख कर लेते हैं, लेकिन सामान्य लोग क्या करे? वीडियो वायरल होने के बाद लोग पूछ रहे हैं सरकारी अस्पताल में एक दिन में 30 के जांच का कोटा आखिर किसने निर्धारित किया है? सच्चाई यह है कि चिकित्सकों की कमी के कारण ऐसे हालात बन रहे हैं। मरीजों की मांग की है कि सोनोग्राफी के लिए 24 घंटे व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, और चिकित्सक, स्टाफ बढ़ाया जाए।

 

“सोनोग्राफी जांच के लिये 4 दिन से आने का मामला संज्ञान में आया है। मरीजों को हो रही दिक्कत को देखते हुये एक और मशीन स्टॉल कराने की जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान में लेबर वार्ड और मेन ओपीडी में सोनोग्राफी जांच की सुविधा दी गई है। दोनों जगह ही रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक को अपनी सेवाएं देनी पड़ती है। सोनोग्राफी जांच के लिये लोगों को दिक्कत न हो, इसके लिये पहल की जायेगी। वर्तमान में एक पोर्टेबल जांच मशीन के अलावा दो सोनोग्राफी मशीन अस्पताल में उपलब्ध हैं।”

डॉ. आर.सी. आर्या, अस्पताल अधीक्षक

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