जिसके पास एक डिसमिस जमीन भी नही उसके नाम से निकला फर्जी कृषि ऋण, और सरकार ने कर्ज माफी का प्रमाण पत्र भी दे दिया

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अम्बिकापुर – छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार की कर्ज माफी की योजना ने किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी लेकिन कुछ ग्रामीण ऐसे भी है कि कर्ज माफी से उनके चेहरे की हँसी गायब हो गई। क्योंकि ये ऐसे ग्रामीण मजदूर हैं जिनके नाम पर एक डिसमिल खेत भी नहीं है लेकिन इनके नाम पर फर्जी तरीके से ऋण लेकर उन्हें कर्ज माफी का प्रमाण पत्र दे दिया गया,,मामला सरगुजा जिले के लखनपुर का है।
जानकारी के मुताबिक लखनपुर क्षेत्र के ग्राम चांदो के चार ग्रामीण ऐसे हैं जिन्होंने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति लखनपुर बैंक से कर्ज लिया ही नहीं लेकिन वह कर्जदार हो गए जिनके नाम से एक डिसमिल खेत भी नहीं है मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक के द्वारा ऑडिट रिपोर्ट तैयार किया जा रहा था जिसके बाद जांच के लिए अंकेक्षण अधिकारी एस.के पैकरा को नियुक्त किया गया और वे जाकर ग्रामीणों से इस संबंध में चर्चा किए तो उन्हें इस बात की जानकारी लगी की सतपाल ,मंगल साय, कैलाश और परमेश्वर के नाम पर करीब साढे़ चार लाख रुपये का ऋण लिया गया है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई,, साफ तौर पर ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का बैंक से कर्ज नहीं लिया है क्योंकि उनके नाम पर एक डिसमिल खेत भी नहीं है, ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिले के कलेक्टर और स्थानीय पुलिस से की। लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई है जिससे ग्रामीण नाखुश है
भूमि हीन ग्रामीणों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण लेने की बात पर जब मीडिया कर्मियों ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति चांदो के लिपिक संजय राम से पूछताछ की गई तो उन्होंने भी कहा कि ऋण लेने के लिए किसानों के नाम पर भूमि होनी चाहिए और इस बात को बताते हुए वह भी घबराने लगा।
साढे चार लाख रुपए के फर्जी ऋण के मामले में जांच करने पहुंचे अंकेक्षण अधिकारी एसके पैकरा से जब बात की गई तो उन्होंने पहले तो बातचीत करने से मना कर दिया वह भी मीडिया को देखकर टालमटोल करने लगे लेकिन उन्होंने भी माना कि फर्जी तरीके से ऋण लिया गया है ।
फर्जी तरीके से साडे लाख रुपए का भूमि हीन ग्रामीणों के ऋण लेने के मामले में किसानों ने आला अधिकारियों से शिकायत कर जांच की मांग की है तो वही मौके पर पहुंचे अधिकारी ने भी जांच में सही पाया है इसके बावजूद अब तक समिति प्रबंधक सुमित वर्मा और उसके सहयोगी के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई कहीं ना कहीं ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है अब देखना होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में किस प्रकार की कार्रवाई करता है।

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