बिना नोटिस, पंचायत की सहमति के पीढ़ियों से काबिजों की जमीन पर खोदाई का आरोप

अंबिकापुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड पर निजी जमीन पर अवैध कब्जा और जबरन खनन का आरोप उदयपुर तहसील के ग्राम परसोड़ी कला निवासी ग्रामीणों ने लगाया है, और कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन सौंपकर एसईसीएल के अधिकारियों पर कार्रवाई और खुदाई कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर तहसीलदार पहुंचे, लेकिन उन्होंने इनसे बात करने से इन्कार कर दिया और कलेक्टर से मिलने के बात को लेकर क्षणिक हंगामा की स्थिति निर्मित कर दिये। इसके बाद तहसीलदार वापस लौट गये। बाद में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले ग्राम परसोड़ी कला के ग्रामीणों की मांग के समर्थन में पहुंचे नंगे पांव सत्याग्रह के राजेश सिंह सिसोदिया ने कहा कि, 03 दिसंबर 2025 को एसईसीएल के मैनेजर और अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना, बिना ग्राम सभा की अनुमति और बिना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए जेसीबी मशीन से इनके निजी भूमि पर खोदाई शुरू कर दी। ग्रामीणों का दावा है कि, उक्त भूमि पर उनके परिवार कई पीढ़ियों से काबिज होकर खेती करते आ रहे हैं। इन्हें न तो नोटिस दिया गया है, न मुआवजा और न ही पुनर्वास की जानकारी दी गई। उन्होंने पूरी कार्रवाई को अवैध और अन्यायपूर्ण करार दिया है। इससे प्रभावित ग्राम परसोड़ी कला के महेंद्र राम राजवाड़े, पिता स्व. बैसाहू राम, गांव की सरपंच करिश्मा सिंह, पूर्व जनपद सदस्य धर्मेन्द्र झारिया, अध्यक्ष ग्रामसभा रामबाई के रघुनाथ राम, शिवप्रसाद, दिनेश, गवंटिया राम, मनीलाल राजवाड़े, लखपत राम, गीता, सुमित्रा बाई, कुसुम बाई सहित अन्य ने बताया कि उनकी भूमि पर एसईसीएल ने जबरन कब्जा करके खुदाई शुरू कर दी है। यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने के लिये बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

सामूहिक आवेदन सौंपकर की यह मांग

ग्राम पंचायत परसोड़ी कला के सरपंच, उपसरपंच, ग्रामसभा अध्यक्ष सहित समस्त प्रभावित ग्रामवासियों ने भी कलेक्टर को दिये आवेदन में कहा है कि उन्होंने संबंधित विभागों तक अपनी आवाज पहले भी पहुंचाई थी, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इनकी मांग है कि, अवैध कब्जे और खुदाई कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाये। दोषियों के विरूद्ध विधिसम्मत जांच कर सख्त कार्रवाई की जाये। यदि भूमि अधिग्रहण का कोई वैध आदेश है तो उसकी प्रमाणित प्रति दी जाए, अन्यथा स्पष्ट किया जाए कि किस आधार पर जमीन ली जा रही है। अब ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया है कि न्याय नहीं मिला तो लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से वे आंदोलन के राह पर अग्रसर होंगे। 

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