सूरजपुर। जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मसगा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। पंचायत के वर्तमान सरपंच रामविलास तिर्की के खिलाफ जनदर्शन में दर्ज दो शिकायतों ने पंचायत कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम निवासी ने कलेक्टर सूरजपुर को दिए आवेदन में शासकीय राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायत के अनुसार महुवारीपारा में मेन रोड से नधिरा के घर तक मुरमीकरण कर सड़क निर्माण कराया गया, जबकि संबंधित भूमि निजी स्वामित्व की बताई जा रही है। आरोप है कि सड़क निर्माण से पूर्व न तो आवश्यक राजस्व अभिलेखों की जांच कराई गई और न ही खसरा, बी-1 अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस स्थान पर सड़क बनाई गई, वहां पूर्व में कोई सार्वजनिक मार्ग मौजूद नहीं था।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि भूमि निजी स्वामित्व की थी तो पंचायत ने किस आधार पर वहां शासकीय राशि खर्च कर दी? पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि जनता की सुविधा और सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों की खुली अवहेलना का उदाहरण साबित हो सकता है।

जनदर्शन में शिकायत दर्ज होने के बाद अब ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि सड़क निर्माण की स्वीकृति किसने दी, तकनीकी स्वीकृति कैसे मिली और संबंधित अधिकारियों ने निर्माण से पहले आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया था या नहीं। मामले ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

 

कागजों में बनी डोढ़ी, 34 हजार की निकासी, जमीन पर सिर्फ गड्ढा होने का आरोप

ग्राम पंचायत मसगा के खिलाफ दूसरी शिकायत भी कम गंभीर नहीं है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पंचायत द्वारा डोढ़ी (कुआं) निर्माण के नाम पर लगभग 34 हजार रुपये की राशि आहरित कर ली गई, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि निर्माण के नाम पर केवल गड्ढा खोदा गया और उसके बाद कार्य अधूरा छोड़ दिया गया।

यदि यह आरोप सत्य सिद्ध होता है तो यह सीधे-सीधे शासकीय धनराशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का मामला बन सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि का उद्देश्य गांव में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है, लेकिन अधूरे कार्य और राशि निकासी की शिकायतें सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं।

गौरतलब है कि पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर राशि स्वीकृत होने के बाद उसकी गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों और अधिकारियों की होती है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि यदि कार्य अधूरा था तो भुगतान किस आधार पर किया गया और इसकी निगरानी किसने की।

जनदर्शन में एक साथ दो गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद ग्राम पंचायत मसगा की कार्यशैली चर्चा का विषय बन गई है। ग्रामीणों को अब प्रशासनिक जांच का इंतजार है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो न केवल पंचायत प्रतिनिधियों बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है। फिलहाल पूरा मामला कलेक्टर के समक्ष पहुंच चुका है और ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के इन आरोपों पर कितना सख्त रुख अपनाता है।

 

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