काम का दबाव बताकर कर्मचारी संवेदनशील इलाकों में समय पर नहीं पहुंच रहे

अंबिकापुर। शहर के एक बड़े हिस्से में रात के समय बिजली फाल्ट सुधारने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खरसिया नाका, पुराना और नया बस स्टैंड, शीतला वार्ड, बाबू पारा, जेल क्षेत्र, मेडिकल कॉलेज अस्पताल, दर्रीपारा के 5 वार्ड, बीएसएलएल का मुख्य कार्यालय, डाक-तार विभाग, ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मीपुर, मठपारा और गहिरा गुरु वार्ड जैसे संवेदनशील इलाकों में नाइट शिफ्ट में फ्यूज कॉल के लिए मात्र 3 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका शहर का सबसे व्यस्त हिस्सा है। इसमें मेडिकल कॉलेज अस्पताल के साथ जीवन ज्योति, संजीवनी, संकल्प हॉस्पिटल, यशोदा हॉस्पिटल, फिरदौसी हॉस्पिटल, केडी अस्पताल, लेजर हॉस्पिटल, माता राजरानी और एसआरएस अस्पताल जैसे कई निजी अस्पताल के अलावा सरगुजा संभाग का मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल है। रात में इमरजेंसी के दौरान बिजली गुल होने पर मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

मेंटेनेंस ठेके पर, ठेकेदार पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में बिजली का मेंटेनेंस ठेका पद्धति से होता है। क्षेत्र के ठेकेदार भाजपा पार्षद विजय सोनी हैं। लोगों का आरोप है कि स्टाफ की कमी के कारण फाल्ट सुधारने में घंटों लग जाते हैं। इमरजेंसी में देरी होने पर लोग बिजली विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हैं। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें फ्यूज कॉल का कर्मचारी ठेकेदार की पोल खोलते नजर आ रहा है। ऐसे में आम लोगों का देर रात बिजली विभाग के दफ्तर पहुंचना और भड़ास निकालना लाजिमी है।

अस्पतालों वाले फीडर अति-संवेदनशील

मानकों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों वाले फीडर को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में 24 घंटे त्वरित सुधार दल की व्यवस्था होनी चाहिए। सिर्फ 3 कर्मचारियों से इतने बड़े क्षेत्र को कवर करना व्यवहारिक रूप से मुश्किल है। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग से नाइट शिफ्ट में स्टाफ बढ़ाने और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम तय करने की मांग की है। समय रहते इस व्यवस्था को दुरूस्त नहीं किया गया तो अधिकारी और ठेकेदार की जुगलबंदी में विद्युत व्यवस्था बारिश के मौसम में और भी ध्वस्त हो जायेगी।

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