कोटाडोल थाना के बरौता गाँव में अंधविश्वास का लग रहा मेला स्थानीय प्रशासन रहा बेखबर

मनेंद्रगढ़ (शुद्धूलाल वर्मा)! तथाकथित एक बाबा के द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि उसके दरबार में जो हाजिरी लगाएगा उसे कोरोना जैसे महामारी छू नहीं पाएगी ! तथाकथित बाबा के द्वारा लगाए जा रहे इस अंधविश्वास के मेले में जमकर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ रही है जिन्हें अंधविश्वास का खुराक दिया जा रहा है ! कोरोना के इस संकट काल में जहां लोग कोरोना जैसी महामारी की चपेट में आ रहे हैं वही भरतपुर विकासखंड के कोटाडोल थाने से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर अंधविश्वास का मेला हर सोमवार को लगता है और स्थानीय पुलिस व प्रशासन को इसकी भनक तक नही लगी। अंधविश्वास के इस मेले में कोरोना को लेकर जारी दिशा निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जाती है । देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है और गाँव मे कोरोना के नाम पर अंधविश्वास की घूंटी पिलाई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के भरतपुर विकासखंड के दूरस्थ ग्राम बरौता में कोरोना काल मे आस्था के नाम पर हजारों की भीड़ जुटाई जा रही है और दुख दर्द के साथ कोरोना जैसी बीमारी भी ठीक करने का दावा किया जा रहा हैं। भरतपुर विकासखंड से 30 किलोमीटर दूर और कोटाडोल थाने से 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित बरौता गाँव में अंधविश्वास के मेले में पहुचने वाले लोगो को इस बात से बरगलाया जा रहा है कि जो बाबा के दरबार मे हाज़िरी लगाएगा उसे कोरोना जैसी बीमारी छू तक नही पाएगी। हर सोमवार को यहां सीधी जिले के महुआ गांव के तथाकथित बाबा के द्वारा अंधविश्वास की खुराक जमकर पिलाई जा रही है। इसके एवज में बाबा द्वारा नारियल और पैसे की दक्षिणा ली जा रही है। जादू टोना के चक्कर में कई गांवों के लोग बाबा के पास आते हैं। ग्राम बरौता तिराहे पर बाबा स्थान पर शिव चर्चा के नाम पर अंधविश्वास का मेला यहां हर सोमवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक होता है। पूरे कोरोना काल मे यहां हर सोमवार अंधविश्वास की भीड़ जुटी। आधुनिकता और विज्ञान के इस दौर में आज भी गांवों में अंधविश्वास हावी है। इसके नाम पर कारोबार भी चलता है। जिस गाँव मे यह अंधविश्वास का मेला लग रहा है वहा कोरोना जैसी घातक बीमारी को न्यौता देने का काम किया जा रहा है। बगैर प्रशासन के परमिशन के हजारों की भीड़ 5 घण्टे तक जुटाई जा रही है। इनमें से कोई मास्क पहना नजर नही आया और न ही यहां सोशल डिस्टेंसिंग देखी गई। कोरोना महामारी के संक्रमण से जूझ रहे देश मे जहाँ धार्मिक स्थल भी कई तरह के नियमो के साथ खुले है। वहां इस तरह का अंधविश्वास का मेला लगना और प्रशासन को इसकी भनक न होना भी कई तरह के सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन के संज्ञान में यह मामला आने के बाद इस अंधविश्वास के मेले में कब रोक लगती है।

Categorized in: