सन 1971 में पाकिस्तान-भारत के युद्ध में रहा इनका ऐतिहासिक योगदान

अंबिकापुर। राजस्थान के बूंदी शहर निवासी महेंद्र सिंह परिहार सेना में नौकरी करते हुये शौर्य और वीरता का उल्लेखनीय योगदान दिया है। सन 1971 में पाकिस्तान के साथ भारत का जो युद्ध हुआ था उसमें इनका योगदान ऐतिहासिक था, जो सेना के गौरवशाली इतिहास में चर्चित वीर गाथाओं के रूप में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। इस शौर्य और वीरता हेतु उन्हें भारत के राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित किया गया है। नवीं डेक्कन हॉर्स रेजीमेंट के एक मेजर के रूप में जम्मू के छम्ब सेक्टर में पाकिस्तान के आर्मी जनरल टिक्का खान के सामने दीवार बनकर खड़े होना वास्तव में खुद में एक फिल्म की कहानी जैसा है। देश के प्रति उनके त्याग ,समर्पण और सेवा को नहीं भुलाया जा सकता है।

बता दें कि पारिवारिक कार्यक्रम में अंबिकापुर पहुंचे मेजर महेंद्र सिंह परिहार शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेन्द्र सिंह देव के ससुर हैं। एक मुलाकात के दौरान जब उनसे चर्चा करते हुए पूछा गया कि, सन 1971 के युद्ध में आपकी यूनिट कौन सी थी, और आपकी जिम्मेदारी क्या थी, इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे भारतीय सेना की प्रतिष्ठित बख्तरबंद रेजिमेंट 9 डेक्कन हॉर्स में मेजर के पद पर थे। हमारे पास टी-54, टी-55 टैंक थे। युद्ध के समय छम्ब सेक्टर में पाकिस्तान के हमले को रोकने की जिम्मेदारी हमारी रेजिमेंट पर थी।

टिक्का खान के मकसद को चकनाचूर किया

मेजर महेंद्र सिंह परिहार ने जम्मू के छम्ब सेक्टर को 1971 को सबसे भीषण मोर्चा क्यों माना जाता है? सवाल पर कहा कि, छम्ब सेक्टर पर कब्जे के लिए पाकिस्तान ने पूरी ताकत झोंक दी थी। उनका नेतृत्व जनरल टिक्का खान कर रहे थे, जिन्हें बुचर ऑफ बंगाल कहा जाता था। टिक्का खान सेकेंड कोर के कमांडर थे और उनका प्लान छम्ब फतह करके जम्मू की तरफ बढ़ने का था, लेकिन हम लोगों ने भी ठान लिया था टिक्का खान के मकसद को चकनाचूर करना है। देश की रक्षा के लिए हमारी जान हाजिर थी और जान की बाजी लगाकर हम लोगों ने यह कामयाबी हासिल की।

राष्ट्रपति ने मेंशन-इन-डिस्पैचेस से किया सम्मानित

जम्मू केष्गुडा हाइट्स पर हुए मुकाबला के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा-गुडा हाइट्स की सामरिक पहाड़ियों पर हमारी टुकड़ी तैनात थी। जनरल टिक्का खान के भारी-भरकम टैंकों और सैनिकों के सामने 9 डेक्कन हॉर्स रेजिमेंट के जवानों ने चट्टान की तरह मुकाबला किया। आमने-सामने की टैंक जंग में हमने दुश्मन के इरादे नेस्तनाबूद कर दिए। जम्मू के छम्ब में अदम्य साहस, रणनीतिक सूझबूझ और यूनिट का नेतृत्व करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा उन्हें मेंशन-इन-डिस्पैचेस से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा ये सम्मान सैनिक के लिए सबसे गर्व की बात होती है।

जैसलमेर वॉर मेमोरियल में दीवार पर युद्ध में योगदान का विवरण है उल्लेखित

अपनी जीवित यादों के परिप्रेक्ष्य में मेजर महेंद्र सिंह परिहार ने कहा कि, जैसलमेर वॉर मेमोरियल में पश्चिमी मोर्चे के वीरों को समर्पित एक पूरी दीवार पर मेरे युद्ध योगदान के विवरण को दृश्यमान सहित उल्लेखित किया गया है, ये उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। इसे देखकर आने वाली पीढ़ी को शौर्य व जज्बे की प्रेरणा मिलेगी।

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