दिल्ली/रायपुर। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने एक अंतरराष्ट्रीय ईसाई मिशनरी संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की है। ईडी के अनुसार इस संगठन ने भारत के नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए करोड़ों रुपए की संदिग्ध निकासी की है। इस बारे में शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि, ‘यह जांच उस मामले से संबंधित है, जिसमें अमेरिका के ‘ट्रूइस्ट बैंक’ से जुड़े डेबिट कार्ड भारत लाए गए और देश भर के एटीएम से बार-बार नकद निकालने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया।’

धमतरी और बस्तर से 6.5 करोड़ की संदिग्ध निकासी
ईडी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में इन कार्डों का इस्तेमाल करके वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) प्रभावित इलाकों जिनमें छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला और बस्तर क्षेत्र शामिल हैं, में 6.5 करोड़ रुपए की असामान्य और संदिग्ध नकद निकासी के मामले मिले हैं। निकाले गए कैश का इस्तेमाल बाद में भारत में टीटीआई के खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया।

तलाशी अभियान में मिले 25 विदेशी कार्ड व 40 लाख नगद
एजेंसी के अनुसार ‘इस मामले में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के तहत एफआई​​आर दर्ज होने के बाद, इस सिलसिले में एजेंसी ने 18-19 अप्रैल को कई राज्यों में तलाशी अभियान चलाया था। इस छापेमारी के दौरान 25 विदेशी डेबिट कार्ड, 40 लाख रुपए नकद, और कुछ आपत्तिजनक डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए गए।’

नवंबर से अब तक भारत आए करोड़ो रुपए
छापेमारी के दौरान एजेंसी को एक ऑनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म भी मिला, जिसका इस्तेमाल इन नकद निकासी के रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता था। ईडी ने कहा कि इस प्लेटफ़ॉर्म को कथित तौर पर भारत के बाहर से काम करने वाली संस्थाओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस सिस्टम के जरिए नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत में लगभग 95 करोड़ रुपए भेजे गए थे।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति से मिले 24 कार्ड
एजेंसी ने आगे कहा कि, ‘इस मामले में ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ नाम के एक संगठन और उससे जुड़े लोगों के शामिल होने का शक है, जिसके बाद उसकी गतिविधियों को लेकर जांच की जा रही है।’ इसी बीच एजेंसी को उस वक्त एक अहम कामयाबी मिली, जब ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने ईडी के लुक आउट सर्कुलर के आधार पर मीका मार्क नामक व्यक्ति को बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोककर उसकी तलाशी ली। जांच के दौरान उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए। एजेंसी को संदेह है कि उससे बरामद इन कार्डों का इस्तेमाल एक सोची-समझी योजना के तहत बड़ी मात्रा में नकद निकालने के लिए किया गया, जिससे किसी संगठित नेटवर्क के शामिल होने की आशंका पैदा होती है।

एफसीआरए के तहत रजिस्टर्ड नहीं है टीटीआई का वेब पोर्टल
ईडी के अनुसार, टीटीआई एक ऐसा संगठन है जो एफसीआरए के तहत रजिस्टर्ड नहीं है। टीटीआई के वेब पोर्टल को खोलने पर एक संदेश दिखाई देता है जिसमें लिखा होता है,‘इस देश में ब्लॉक किया गया। इस पेज तक पहुंच प्रतिबंधित है।’

ईडी का कहना है कि, ‘नक्सल प्रभावित इलाकों में इस तरह की एक समानांतर नकद-आधारित अर्थव्यवस्था का उभरना भारत की सुरक्षा और वित्तीय अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा है, और यह अवैध गतिविधियों के लिए धन के लेन-देन को बढ़ावा दे सकती है।’

 

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