आज हम चर्चा करेंगे राष्ट्र की वर्तमान परिस्थितियों तथा उनपर मीडिया के रुख की–
1 हमारे मीडिया के लिए सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु आपदा है, पिछले 3 महीनों से उस पर लगातार चर्चा चल रही है किंतु कोरोना संक्रमण से प्रतिदिन मरने वाले 1000 लोगों पर कोई चर्चा नहीं होती। आखिर क्यों?

3 जंग में शहीद हुए प्रत्येक सैनिक को गार्ड ऑफ ऑनर मिलता है, परिवार को मान सम्मान मिलता है किंतु जान पर खेलकर इलाज करते हुए चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मी के जीवन का कोई मोल नहीं। ऐसा क्यों?

4 क्या केंद्र एवं राज्य सरकारों ने हमें सन् 1947 के विभाजन की तरह इस बार भी मरने के लिए छोड़ दिया है?

5क्या यह केवल इत्तेफाक है या बहुत बड़ा षड्यंत्र?

सविस्तार—

आज हमारा राष्ट्र अत्यंत गंभीर आपदा से गुजर रहा है। प्रतिदिन चाइनीस कोरोनावायरस की वजह से करीब 1 लाख मरीज संक्रमित हो रहे हैं( यह एक प्रकार का अवांछनीय विश्व रिकॉर्ड है)
केंद्र सरकार मौन है तथा राज्य सरकारें clueless है। प्रतिदिन 1000 से ज्यादा मौतें हो रही हैं कुल मिलाकर 45 लाख लोग पॉजिटिव हो चुके हैं तथा करीब 76,000 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
आश्चर्यजनक बात है कि केंद्र सरकार तथा मीडिया दोनों इस पर मौन है।

मीडिया एक बहुत ही शक्तिशाली माध्यम है तथा इसे प्रजातंत्र का चौथा पिलर भी माना जाता है किंतु पिछले करीब 3 महीनों से मीडिया में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु एवं उनसे जुड़े लोग मसलन रिया चक्रवर्ती, कंगना रानावत इत्यादि ने अधिकार जमाया हुआ है।
ऐसा केवल एक या दो चैनल में नहीं हो रहा बल्कि पूरा मेनस्ट्रीम मीडिया केवल और केवल सुशांत के संदर्भ में ही खबरें चला रहा है।

ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई प्रायोजित कार्यक्रम चल रहा हो।
निश्चित रूप से प्रायोजक केंद्र एवं राज्य सरकारें होगी, विपक्ष तो हो नहीं सकता।

पिछले कई दिनों से चाइनीस कोरोनावायरस के संक्रमित मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं तथा तकरीबन 1000 लोगों की रोज मृत्यु हो रही है। ऐसी परिस्थिति में सारे चैनल एवं मीडिया को मरीजों की बेहतर देखभाल एवं महामारी के विस्फोट को सीमित करने हेतु समन्वयक की भूमिका निभानी चाहिए किंतु ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने पहले लॉकडाउन कराया,
फिर दिए जलवाए,
कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में पुष्पवर्षा करवाई, थाली बजवाई
किंतु महामारी निरंतर बढ़ती रही।

कोई बात नहीं हमारा पहला प्लान फेल हो गया किंतु हमें अब क्रांतिकारी निर्णय लेने की अत्याधिक आवश्यकता है।

यह घोर विडंबना है कि–
केंद्र सरकार ने महामारी से निपटने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपी;
राज्य सरकारों ने नगरीय प्रशासन एवं कलेक्टर को सौंपी
और कलेक्टर ने जिम्मेदारी मरीजों को सौंप दी है।
अब मरीजों को केवल ईश्वर का ही आसरा है।

हमारी सरकारें महामारी की रफ्तार को रोकने का रोडमैप भी नहीं बना पाई है उसे कंट्रोल करने की बात तो बेमानी है।

यह वक्त कड़े फैसले लेने का है ताकि कोरोना के इलाज में होने वाली समस्याएं जैसे-

कोविड-19 की दवाइयों की किल्लत,

अस्पतालों में बेड की किल्लत,

अत्याधिक चिकित्सा कर्मियों के संक्रमित एवं मृत्यु होने की रोकथाम के प्रयास,

मरीजों के उपचार में प्रयुक्त होने वाले संसाधनों की कालाबाजारी रोकने के उपाय इत्यादि।

इन समस्याओं के निराकरण पर सरकार एवं मीडिया का प्रयास होना चाहिए।

समस्त देशवासियों को माननीय प्रधानमंत्री से अत्याधिक उम्मीदें हैं किंतु पता नहीं किन मजबूरियों की वजह से मन की बात में भी वे इस विषय पर कुछ भी बोलने से बचते रहे।

प्यारे देशवासियों,
छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी
आप सब से आग्रह करती है कि ऐसी विषम परिस्थितियों में हमें एकजुट होना होगा।
हमारे पास केवल सोशल मीडिया का ही सहारा है।

अतःआपसे निवेदन है कि आज हम निम्नलिखित 3 संकल्प लें -*

1 कोरोना महामारी का बेहतर इलाज एवं प्रबंधन हम सबका अधिकार है । हमें इसकी जानकारी को सोशल मीडिया पर जल्द से जल्द साझा करना होगा ताकि हम केंद्र एवं राज्य सरकारों पर उचित कार्रवाई करने हेतु दबाव बना सकें।

2मीडिया एवं सरकार की कोताही पर अपनी नाराजगी जाहिर करें

3 हम अत्याधिक एकता का परिचय देते हुए; सीमित संसाधनों में ही एक-दूसरे की अत्याधिक मदद करने का संकल्प करें।

अंत में हम आपसे से आग्रह करते हैं की- 1कोरोना वायरस की गाइडलाइंस का पालन करें,
2 जांच करवाने से ना डरे
तथा
3जल्द से जल्द इलाज करवाएं

क्योंकि सावधानी से बचाव होगा तथा जल्द से जल्द जांच एवं इलाज से जीवन बचेगा।

धन्यवाद !