3 से 4 दिन पूर्व हो चुकी थी मौत, शव पर पाया गया चोट का निशान, गायब मिला एक नाखून

सूरजपुर/जरही। सूरजपुर जिले के घुई वन परिक्षेत्र अंतर्गत कक्ष क्रमांक 705 में बाघ का शव मिलने से वन महकमे में हड़कम्प मच गया है। वन विभाग शव बरामद कर जांच पड़ताल में जुटा है। भैसामुंडा सर्किल के रेवटी क्षेत्र में यह शव मिला है। जंगल में मिले बाघ के शव पर चोट के स्पष्ट निशान पाए गए हैं, जबकि एक नाखून के गायब होने से शिकार या तस्करी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। घटनास्थल से लोहे का एक हथियार भी बरामद किया गया है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाघ की मौत लगभग तीन से चार दिन पूर्व हो चुकी थी, लेकिन इतने समय तक शव का जंगल में पड़ा रहना वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। नियमित गश्त, कैमरा ट्रैप और निगरानी दल की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में वन अमले की उपस्थिति सीमित रहती है, जिससे असामाजिक तत्वों को गतिविधियों का अवसर मिल जाता है। घटना की सूचना मिलते ही बलरामपुर और सूरजपुर वन मंडल के वरिष्ठ अधिकारी एवं संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। बाघ के शव को कब्जे में लेकर नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई है। वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। साथ ही पूरे क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मिली लाश
घुई वन परिक्षेत्र का बड़ा हिस्सा गुरु घासीदास-तैमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र में पहले भी बाघों की आवाजाही दर्ज की जाती रही है। बताया जा रहा है कि मृत बाघ को वन विभाग के द्वारा ट्रेस नहीं किया गया था। आशंका है कि यह बाघ वाड्रफनगर या बिहारपुर वन परिक्षेत्र से होते हुए घुई रेंज में पहुंचा होगा।

वन्यजीवों की सुरक्षा सवालों के घेरे में
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगलों के बीच बाघों का मूवमेंट लगातार बना रहता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बाघ की संदिग्ध मौत ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दिया है इनका टारगेट शिकारियों को तलाशकर गिरफ्त में लेना  है।

सघनता से की जा रही जांच
बाघ के मौत की सूचना के बाद पूरी टीम सक्रिय है। मौत कैसे हुई यह तो पोस्टमार्टम रिपोट से ही पता चलेगा, लेकिन साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वाड की मदद ली जाएगी। डॉक्टर व अधिकारियों की टीम की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की जाएगी।
डीआर साहू
डीएफओ,सूरजपुर

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