छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने अनिश्चितकालीन महाबंद, चक्काजाम का किया आगाज
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ के तत्वाधान में ड्राइवर सुरक्षा कानून, शराबबंदी और वेलफेयर बोर्ड का गठन करने की मांग को लेकर 25 अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए महाबंद चक्काजाम का आगाज कर दिया है। इसके पहले दिन शहर के अंतर्राज्यीय बस अड्डा में करीब 100 की संख्या में एकजुट हुए महासंगठन से संबद्ध ड्राइवरों ने जमकर नारेबाजी की और कहा जब तक छत्तीसगढ़ में शराब बंद नहीं होगा, ड्राइवरों का जीवन असुरक्षित रहेगा। हालांकि ड्राइवरों के महाबंद चक्काजाम का पहले दिन स्थानीय स्तर पर असर देखने को नहीं मिला। यात्री बसें पूर्वववत संचालित हो रही थीं, और यात्री बेरोकटोक आना-जाना कर रहे थे। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पहला दिन होने के कारण यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसे देखते हुए ड्राइवरों पर वे किसी प्रकार का दबाव नहीं बना रहे हैं। महाबंद चक्काजाम में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित वाहनों के चालक भी शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ के जिला प्रभारी मो. अशफाक अंसारी ने बताया कि महाबंद चक्काजाम का पहला दिन होने के कारण यात्री बसों का आना-जाना हो रहा है। कई बसों में यात्रियों के रहने के कारण होने वाली परेशानियों को देखते हुए वे फिलहाल नरम रूख अपनाए हुए हैं। छठ महापर्व के कारण बस स्टैंड में यात्रियों की भीड़ भी काफी थी, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ सकता था। इधर महाबंद व मांगों के समर्थन में बैठे चालकों के द्वारा फोन पर निरंतर अपने साथियों से संपर्क करके इन्हें बसों को खड़ी करके अनिश्चितकाल के लिए महाबंद चक्काजाम में शामिल होने प्रेरित किया जा रहा था। इनका कहना है कि छह माह से वे अपनी मांगों को लेकर सरकार को ज्ञापन पर ज्ञापन देते आ रहे हैं कि ड्राइवर आयोग, वेलफेयर बोर्ड का गठन व शराबबंदी का मांग पूरा किया जाए। मांगों को नजरअंदाज करते छह माह बीत गया, प्रदेश, जिला व संभाग स्तर पर महासंघ के पदाधिकारियों द्वारा प्रशासन तक पहुंचाई गई आवाज को शासन स्तर पर अनसुना किया जा रहा है। 2450 किलोमीटर की यात्रा करके मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुआ। उनके द्वारा पूर्व में ही चेतावनी दी गई थी कि मांगों के प्रति किसी प्रकार का सकारात्मक कदम नहीं उठाने पर स्टेयरिंग छोड़ो आन्दोलन को मूर्तरूप करने की तैयारी शुरू कर देंगे, इसी तारतम्य में हम अपने ड्राइवर भाईयों को समझा रहे हैं, कि वे स्टेयरिंग छोड़कर महाबंद चक्काजाम के उद्घोष को साकार करें। यह किसी का व्यक्तिगत नहीं हक और अधिकार का लड़ाई है। अगर लड़ाई जीतते हैं, तो उनके बच्चे, परिवार का भविष्य सुरक्षित रहेगा। पूरे छत्तीसगढ़ में महाबंद चक्काजाम चालू हो गया है, सरकार उनकी मांगों को नहीं मानी तो उग्र आन्दोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा। इनका दावा है कि छत्तीसगढ़ के बार्डर क्षेत्र पूरी तरह से सील हैं, जिससे आवागमन बंद हो गया है। यात्रियों को आवागमन के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। सरगुजा जिले में फिलहाल ड्राइवरों को समझाइश दी जा रही है, बात नहीं बनती है तो यहां भी रोड जाम किया जाएगा, किसी भी वाहनों का आना-जाना पूरी तरह से बंद करने वे बाध्य होंगे।
ड्राइवर भी इज्जत और हक के हकदार
छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंगठन का कहना है कि जब तक ड्राइवर सुरक्षा कानून लागू नहीं होगा, तब तक चक्काजाम जारी रहेगा। ड्राइवर सुरक्षा कानून ही ड्राइवर की जान का तोड़ है, वहीं वेलफेयर बोर्ड का गठन होने से उनका परिवार खुशहाल होगा। सड़क पर जान देने वाले ड्राइवर अपने हक की लड़ाई के लिए संघर्ष की राह पर हैं, और अब वे आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। इन्होंने कहा कि सुरक्षित ड्राइवर, सुरक्षित परिवहन की पहचान बने, इसके लिए शासन को जागृत होना पड़ेगा। ड्राइवर भी इज्जत और हक का हकदार है। देश का पहिया चलाने वाले ड्राइवर अपने हक की पूर्ति के लिए वाहनों का चक्का रोकने मजबूर हैं।

Categorized in: