डीन को ज्ञापन सौंपकर जताया असंतोष, आज से वर्षों से ठेका प्रथा की होगी शुरूआत
अंबिकापुर। राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में जीवनदीप समिति के अधीन कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग का विरोध करते हुए गुरूवार को काम-काज ठप कर दिया और शहर के घड़ी चौक से रैली निकालकर रास्ते भर जमकर नारेबाजी करते हुए अस्पताल परिसर में धरना दिया। स्वच्छकों के विरोध प्रदर्शन के बाद अस्पताल में बदहाल व्यवस्था दिखने की उम्मीद थी, लेकिन अतिरिक्त स्वच्छकों ने सफाई व्यवस्था की कमान संभाली, जिससे अस्पताल परिसर व वार्डों में स्वच्छता बरकरार रही।


अस्पताल परिसर में जीवनदीप समिति में कार्यरत स्वच्छकों के द्वारा विरोध प्रदर्शन ओर नारेबाजी की सूचना मिलने पर मौके पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम और अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या पहुंचे। इन्हें स्वच्छकों के साथ मौजूद कर्मचारी नेताओं ने ज्ञापन सौंपकर ठेकेदारों के अधीन कर्मचारियों को करने की बात पर आपत्ति जताई और अल्टीमेटम दिया, अगर एक दिन में ठेका प्रथा को बंद करने के संबंध में प्रभावी निर्णय नहीं लिया जाता है, तो वे आन्दोलन के राह पर जाने विवश होंगे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पूर्व में भी अस्पताल के स्वच्छकों को ठेकेदार के हवाले करने की रणनीति बनाई गई थी। वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी के समक्ष उन्होंने इस मसले को रखा था, और अस्पताल के स्वच्छकों को पूर्ववत काम पर रखने के लिए शासन स्तर से निर्देश दिलाने का आग्रह किया था, जिस पर उन्होंने पहल करते हुए तत्कालीन मेडिकल कॉलेज के डीन को सफाई व्यवस्था को ठेका पर नहीं देने निर्देशित किया था। इस संबंध में सचिवालय से एक पत्र भी जारी किया गया था। पुन: शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के स्वच्छकों को ठेकेदार के हवाले करने की मंशा रखी गई है। एक अगस्त से इन्हें ठेकेदार के अधीन काम करना पड़ेगा, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इसके पहले अस्पताल के स्वच्छकों ने कलेक्टर के जनदर्शन में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, और यथावत काम पर रखने का आग्रह किया था।
बैठक लेकर डीन व अधीक्षक ने की मंत्रणा
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल में वर्तमान में करीब 130 स्वच्छक सेवा दे रहे हैं। इन्हें कलेक्टर दर पर वेतन का भुगतान किया जाता है। दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था को ध्वस्त करके आज, एक अगस्त से इन कर्मचारियों को ठेकेदार के अधीन देने की तैयारी पूरी हो गई है। इन्हें वेतन का भुगतान भी ठेकेदार के माध्यम से किया जाएगा। इन कर्मचारियों में असमंजस इस बात को लेकर है कि ठेकेदार के अधीन काम करने की स्थिति में उन्हें कम वेतन मिलेगा, हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ठेका में जाने के बाद भी इनके वेतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जिस वेतन दर पर वे काम कर रहे हैं, उतना ही भुगतान किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के डीन और अस्पताल अधीक्षक ने मीटिंग हॉल में इन्हें बुलाकर ठेके में जाने के बाद बनने वाली स्थिति से अवगत कराया है। गुरूवार को हल्ला बोलते शहर का चक्कर काटे ये कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटे, लेकिन दी गई समझाइस के बाद आज एक अगस्त से इनकी कार्यस्थल पर मौजूदगी रहेगी, ऐसा अंदेशा अस्पताल प्रबंधन जता रहा है।
बिलासपुर की सुरक्षा कंपनी को मिला है ठेका
बताया जा रहा है कि प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में स्वच्छता का जिम्मा निजी कंपनी को दिया गया है। अंबिकापुर के अस्पताल में कार्यरत स्वच्छक बिलासपुर की बुंदेला सिक्यूरिटी नामक कंपनी के अधीन आज, एक अगस्त से कार्य करेंगे। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या ने बताया कि इन्हें पूर्ववत वेतन का भुगतान ठेकेदार के द्वारा किया जाएगा, शासन की मंशा के अनुरूप वेतन की राशि में से 1500 रुपये ईपीएफ का कटौती किया जाएगा, जो इनके खाते में जमा रहेगा, और इनके बचत का आधार बनेगा। जरूरत पड़ने पर वे जमा राशि स्वयं के उपयोग के लिए प्राप्त कर सकते हैं। ईपीएफ की जमा राशि का ब्याज भी इन्हें मिलेगा। पूर्व में कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान होने के कारण ईपीएफ की राशि नहीं काटी जाती थी। डॉ. आर्या ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के डीन और मैंने स्वच्छकों को जितना संभव हो सका, सारी बातों को स्पष्ट कर दिया है।
बयान
प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में स्वच्छता की जिम्मेदारी निजी कंपनी को ठेके पर दी गई है। सिर्फ मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के लिए पृथक से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है। एक अगस्त से यहां की सफाई व्यवस्था आउटसोर्सिंग पर होगी। कर्मचारियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन पत्र को वे शासन को प्रेषित करेंगे।
डॉ. अविनाश मेश्राम, अधिष्ठाता मेडिकल कॉलेज

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