39 मकानों पर चला बुलडोजर, धर्म विशेष के लोगों को टारगेट में लेने का लगा आरोप
अंबिकापुर। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाक के नीचे रिजर्व भूमि पर खपरपोश और पक्का मकान बनाकर वनखण्ड खैरबार के चोरकाकछार में किए गए अतिक्रमण को वन अमले ने प्रशासन, पुलिस बल व निगम के टीम की मौजूदगी में जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। अतिक्रमण हटाने को लेकर चली इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मौके पर काफी गहमागहमी का माहौल रहा। कार्रवाई में धर्म विशेष के लोगों को टारगेट में लेने का आरोप भी लगा। देखने योग्य बात यह भी रही वन भूमि में निवास कर रहे लोगों को मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति भी जिम्मेदारों के यहां करवाई गई थी। सभी को बकायदा बिजली और पानी की सुविधा के लिए नल कनेक्शन भी मिला था। यही नहीं वर्तमान में घर-घर में लगाया जा रहा स्मार्ट मीटर भी इनके घरों की दीवारों पर लटका दिया गया था।
बता दें कि वन भूमि से कब्जा की शिकायत भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे के द्वारा करने के बाद वनमण्डलाधिकारी ने इसकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में अवैध कब्जा बड़े पैमाने पर होना सामने आया था, इसके बाद अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया था। शनिवार को हुई कार्रवाई के दौरान सरगुजा संभाग का शायद ही कोई ऐसा थाना और वन परिक्षेत्र होगा, जहां के अधिकारी और पुलिस बल की मौके पर मौजूदगी नहीं रही होगी। इसके पहले 41 कब्जाधारकों को नोटिस दिया गया था, इनमें से 39 लोगों का संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने पर इन्हें अतिक्रमित स्थल को खाली कर देने की चेतावनी दी गई थी, वहीं दो लोगों ने वन भूमि का पट्टा पेश किया था। शनिवार को सुबह 5 बजे से ही पुलिस लाइन में वन विभाग, जिला व पुलिस प्रशासन, नगर निगम की संयुक्त टीम कब्जा हटाने की कार्रवाई के लिए एकत्र हो चुकी थी। आवश्यक दिशानिर्देश देकर इन्हें अतिक्रमण स्थल की ओर रवाना किया गया। टीम के साथ एसडीएम, तहसीलदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक के अलावा वन विभाग के अधिकारी मौजूद थे। जेसीबी के साथ जैसे ही भारी-भरकम पुलिस बल वनखण्ड चोरकाकछार इलाके में सुबह 8 बजे प्रवेश किया, यहां रहने वाले लोगों के बीच खलबली मच गई। चिन्हित अतिक्रामक अपने घरों को खाली करने में गुरूवार-शुक्रवार से ही लगे थे। पूर्व में महामाया पहाड़ में हुई कार्रवाई को देखते हुए इनमें इस बात का भय समाहित था कि कहीं अतिक्रमण हटाने के दौरान उनके द्वारा संजोये गए सामान क्षतिग्रस्त न हो जाएं। अतिक्रमण हटाने के लिए जब टीम पहुंची तो लोग अपने घरों में लगे, दरवाजे, खिड़की, जाली, रोशनदान, सीमेंट सीट सहित अन्य जरूरी सामानों को निकालने के लिए ताकत झोंक रहे थे। मौके पर तोड़ू दस्ते के साथ पहुंचे अधिकारियों को इस दौरान हल्की नोकझोंक का सामना करना पड़ा, जिसे इन्होंने नजरअंदाज कर दिया। कुछ परिवार घर से निकलने को तैयार नहीं थे, जिन्हें पुलिस व वन विभाग की टीम ने पहले समझाइश दी, बाद में बलपूर्वक घर से बाहर करके अपने सामानों को जल्द से जल्द बाहर निकाल लेने कहा। जेसीबी जैसे ही घर को तोड़ने के लिए आगे बढ़ा, कुछ महिलाएं, बच्चों के साथ सामने आ गईं। कोई जेसीबी के सामने आ रहा था तो कोई हाथ जोड़कर सामानों को बाहर निकालने के लिए समय देने का आग्रह कर रहा था। मौके पर पहुंचे अधिकारी इनकी मिन्नतों को नजरअंदाज करते हुए अपनी कार्रवाई शुरू कर दिए।
भीषण गर्मी में बच्चे मलबे में तब्दील होते घर को निहारते रहे

खैरबार वनखण्ड के चोरकाकछार में वन भूमि पर कई लोग मकान बनाकर निवास कर रहे हैं। इनमें से 39 घरों को अवैध निर्माण बताते हुए संबंधित घरों में रहने वाले लोगों को नोटिस थमाया गया था। इन घरों के बीच दो घर ऐसे थे, जिन्हें वन भूमि का पट्टा मिला है। इन दो घरों को चूना से मार्किंग करते सुरक्षित किया गया था। ऐन बरसात के मौके पर अतिक्रमण हटाने की चल रही कार्रवाई के दौरान लोग सूनी आंखों से अपने घरों को जमींदोज होते देख रहे थे। छोटे बच्चे जिस मकान में कूदते-फांदते, मस्ती करते बड़े हो रहे थे, वे मलबे में तब्दील होते मकान को भीषण गर्मी में देखते माता-पिता की गोद में नींद ले रहे थे, या फिर घर से बाहर निकाले गए सामानों के बीच भूखे-प्यासे बैठकर रोते-बिलखते अभिभावकों को निहार रहे थे।
कब्जा कैसे हुआ, जिम्मेदारी करेंगे तय-रेंजर
वन परिक्षेत्राधिकारी निखिल पैकरा ने बताया कि चोरकाकछार के आरएफ 2581 में स्टाम्प पेपर में फारेस्ट की रिजर्व भूमि की खरीद-बिक्री बड़े पैमाने पर होने की शिकायत मिली थी। वन परिक्षेत्राधिकारी अंबिकापुर के प्रतिवेदन दिनांक 8 मई 2025 के अनुसार वन भूमि में अवैध अतिक्रमण होना पाया गया था। ऐसे में इन्हें कार्यालय वनमण्डलाधिकारी के द्वारा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 ‘अÓ का नोटिस जारी करके प्रतिउत्तर चाहा गया, इनमें से 39 लोगों का अवैध कब्जा होना सामने आया। इसके बाद नोटिस देकर और घरों में नोटिस को चस्पा करके इन्हें वन भूमि से बेदखल करने की कार्रवाई की गई। किसी के द्वारा खरीद-बिक्री से संबंधित कोई स्टाम्प प्रस्तुत नहीं किया गया, ये पूर्वजों के द्वारा जमीन पर कब्जा करना बताए। उन्होंने एक सवाल पर कहा कि आरक्षित वन भूमि पर इतने बड़े पैमाने पर कब्जा कैसे हुआ, इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। शहर के नजदीक बड़े पैमाने पर वन भूमि में कब्जा होना बड़ी लापरवाही है। अगर शुरूआती स्टेज में अवैध निर्माण को रोका गया होता, तो ऐसी नौबत नहीं आती।
550 पुलिसकर्मी, 150 वनरक्षक पहुंचे 5 जेसीबी के साथ
रिजर्व फारेस्ट के बड़े भाग में किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए शुरू में 3 जेसीबी का उपयोग किया जा रहा था, बाद में कार्रवाई में तेजी लाने के लिए नगर निगम का दो और जेसीबी मंगाया गया। इसके बाद 5 जेसीबी लगाकर चौतरफा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान पुलिस के 550 स्टाफ और वन विभाग के 150 वनरक्षक तैनात रहे। कार्रवाई के दौरान पुलिस को कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं होने का आरोप लोग लगा रहे थे, इनका कहना था कि अन्य लोगों को अभयदान देकर उनके घरों को बरसात के मौसम में जमींदोज किया गया है।
दो एकड़ भूमि हुआ कब्जामुक्त
वन अधिकारी ने बताया कि शनिवार को हुई कार्रवाई में दो एकड़ से अधिक भूमि कब्जामुक्त हुआ है। वन क्षेत्र की संरक्षित भूमि का सीमांकन व चिन्हांकन करने के बाद वैधानिक तरीके से कब्जा हटाने कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि अगली कार्रवाई गाड़ाघाट से तकिया रोड में की जानी है। इस क्षेत्र में काफी वन भूमि पर कब्जा करके लोगों ने रखा है। इस इलाके में कार्रवाई के दौरान 50 से अधिक लोगों का घर, मकान आना संभावित है।

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